दो दिवसीय विपश्यना शिविर हुआ सम्पन्न

शिविर के दौरान आशीष वचन देते तपसी महाराज

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ललितपुर। जनपद के सुदूर क्षेत्र रमणीय विंध्याचल पर्वत श्रेणियों में स्थित मां विन्ध्येश्वरी धाम कुडी़घाट बनयाना में परम पूज्य श्री 108 तपस्वी जी महाराज के सानिध्य में दो दिवसीय विपश्यना, ध्यान शिविर आयोजित किया गया।शिविर में युवाओं ने बढ़-चढक़र प्रतिभाग किया।

तपस्वी जी महाराज ने कहा कि आज की इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में लोगों को अपने लिए समय नही है। इसलिए युवाओं को अपने तनाव को कम करने के लिए ध्यान का सहारा लेना चाहिए। आत्मशुद्धि एवं चेतना हेतु सफल और असरकारी मार्ग एक मात्र ध्यान ही है। संत अनिलदास ने बताया कि विपश्यना एक अत्यंत पुरातन एवं कारगर भारतीय ध्यान विधि है, जिसे हम सैकड़ों बर्ष पहले भुला चुके थे, इस विधि का उपयोग करने से व्यक्ति अपने मन-मस्तिष्क पर पूरा नियंत्रण रख सकता है। देवेन्द्र रावत ने बताया कि गौतम बुद्ध को इसी मार्ग से ज्ञान और सिद्धि प्राप्त हुई थी। बुद्ध के तीन मार्गों में से प्रथम विपश्यना ही है जो आत्मकल्याण हेतु सबसे सुगम रास्ता है। ब्रजेश तिवारी शिविर में प्रतिभाग करने से अपने चारों और एक अलग ही प्रकार की सकारात्मक ऊर्जा महसूस कर रहा हूँ व मन-मस्तिष्क काफी शांत है एवं घर पर भी रोज ध्यान हेतु समय दूंगा।

इस शिविर में दिलीप रैकवार, अनुज पटैरिया, ओमप्रकाश पटैरिया, आनंद रैकवार, पवन यादव, मयंक बबेले ब्रजेश तिवारी, अनन्त तिवारी, नीरज दुवेदी, अभिषेक शर्मा, सूजन सिंह, रोहित यादव, मुन्ना निगम, गोपाल पण्डे, आशाराम कुशवाहा, राजेन्द्र निरंजन, हीरा लाल निरंजन, जयराम सेन आदि ने प्रतिभाग किया।


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