क्षेत्रीय किसान मेला में किसानों ने पहचानी आधुनिक तकनीकें 

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एक्शन एड द्वारा संचालित समृद्धि परियोजना के अन्तर्गत विकास खण्ड जखौरा जनपद ललितपुर के कार्यकर्ताओं एवं किसानो का दो दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय एवं बुन्देलखण्ड जैविक कृषि फार्म जनपद बांदा उ.प्र. में प्रतिभाग किया गया।

ललितपुर। जिसमें कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में क्षेत्रीय किसान मेला में भ्रमण किया जिसमें कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। क्षेत्रीय किसान मेला कार्यक्रम में समृद्धि परियोजना के प्रोग्राम मैनेजर राजन सिंह, एक्शन एड लनखऊ एवं राजेन्द्र निगम प्रोग्राम कॉआर्डिनेटर ने प्रतिभाग किया।

इस कार्यक्रम में किसान भाईयों एवं बहिनो ने 180 प्रदर्शनी स्टालों का भ्रमण किया। इस दौरान कृषि विभाग, उद्यान विभाग, पशुपालन हेतु विस्तृत जानकारी दी जैसे मौसम के अनुसार पशुओं में होने वाली बीमारियों से बचाव एवं टीकाकरण, मछली पालन, मुर्गी पालन, वन एवं फसल को आग से बचाने हेतु जानकारी, जैविक खाद, कृषि यंत्र जैसे ट्रैक्टर्स, रौटा वेटर, रीपर फसल की कटाई, पावर ट्रिलर जुताई, गुडाई व निराई करने हेतु, दवा छिडाकाव करने वाला ड्रोन, स्प्रे मशीन, बूंद सिचाई पद्धति के यंत्र सम्भर सेविल आदि।

नई तकनीक से स्वयं सहायता के द्वारा लघु उद्योग जैसे कि अचार, मुरब्बा, पापड, दलिया, एल.ए.डी. बल्व, शहद उत्पादन आदि। कीटनाशक औषधिया जैसे जीवमृत, ब्रह्मास्त्र, बायो-कोल, नीम अर्क आदि।

इसके अलावा रेशम उत्पाद, मृदा परीक्षण, सोलर प्लान्ट, बीज सोधन, फसली पंजीकरण, हाईब्रिड बीजों का प्रयोग एवं नई तकनीकों से सब्जी लगाने हेतु प्रदर्शनियों का भ्रमण किया गया। भ्रमण के बाद 7 राज्यों से आये इसके अलावा सभी कार्यकर्ताओं एवं किसान भाईयों ने ग्राम छनेहरा लालपुर में बुन्देलखण्ड जैविक कृषि फार्म का भ्रमण किया।

इस दौरान कृषि फार्म के संचालक ने बताया कि संचालित उन्नत सजीव खेती आधारित एस.एप.एस.मॉडल व प्राकृतिक तरीके से खेती के विभिन्न आयामों के सभी के द्वारा किया गया।

उन्होने बताया कि सभी किसानो को समेकित जैविक खेती करना चाहिये ताकि किसानो को कम लागत में ज्यादा उत्पादन हो सके। उन्होने बताया कि आज जो हम सभी किसान भाई रासायनिक खाद का प्रयोग कर रहे है उससे हमारी मिटटी अनउपजाऊ होती जा रही है।

अगर हम सभी किसान भाई इस तरह से खेती करते रहे तो आने वाले कुछ सालों के बाद मिटटी की उर्वरकता लगातार कम हो जायेगी और मिटटी में नमी भी नही होगी रासायनिक खाद के प्रयोग से मानव की उम्र पर लगातार प्रभाव पड रहा है। उन्होने बताया कि मैने जैविक खेती करने की शुरूआत 2008 से की थी। शुरूआत में काफी कठिनाइयों का सामना करना पडा था।

जैविक खेती के बारे बहुत कम लोग जानते थे। इसके उन्होने अपने कृषि फार्म का भ्रमण सभी प्रतिभागियों किसान भाईयों एवं बहनो को रैन वाटर हार्वेस्टिंग मछली पालन के साथ बत्तख पालन, आधुनिक बकरी पालन करने हेतु उन्होने बताया कि बकरी पालते समय प्रमुख बातो को ध्यान में रखना चाहिये जैसे कि जब भी कोई बकरी बीमार होती है तो उस बकरी को अलग से रखना चाहिये ताकि अन्य बकरियां बीमार न हो सके उन्होने बताया कि बकरियों रखने के लिए तीन तरह की जगह होना चाहिये ग्यावन बकरी के लिए अलग स्थान होना चाहिये।

गाय पालन में उन्होने बताया कि हमारे यहॉ रॉठी गाय पाली जाती है जो कि 1 गाय प्रतिदिन 3 से 5 लीटर दूध एक टाईम देती है उन्होने बताया की गाय का मूत्र एकत्र करने हेतु एक नाली से होकर के टेंक में एकत्र किया जाता है और यह मूत्र मछली पालन हेतु, जीवामृत कीटनाशक आदि में प्रयोग किया जाता है|

देशी मुर्गी पालन हेतु बताया कि जब भी कोई मुर्गी पालन करे तो जहा मुर्गी विश्राम करती है वहा पर कुचा हुआ चारा डाल देना चाहिये इस चारे से मुर्गी बीट करते समय उस चारे में चिपक जाता है और जो बीट निकलता है वह खाद बनाने के उपयोग में लिया जाता है।

इसके अलावा मधुमक्खी पालन के बारे में बताया, वर्मी कम्पोस्ट में उन्होने बताया कि गाय का गोबर निकलने के बाद गोबर को कम से कम गर्मी के समय 15 दिन तक ठंडा होने के लिए रखा जाता और ठंडों के समय 8 दिन तक रखना अनिवार्य है इसके बाद खाद का निर्माण करने हेतु वर्मी बेड के नीचे की सतह पर ईट को विछाया जाता है और चारो ओर की दिवाले सिर्फ 4 इंच की होती है जिससे केचुयें को खाद बनाने में आसानी होती है, केंचुआ को नमी से बचाया जाता है और 30 से 40 दिन में  जैविक खाद बनकर तैयार हो जाता है।

अजोला उत्पादन, प्याज स्टोर एवं विभिन्न तरह जैविक खाद निर्माण व जैविक कीट रोंग रक्षक दवाये बनाने की इकाई का अवलोकन किया इसके बाद मिश्रित फसल उत्पादन अजोला, नैपियर, प्याज, लहसुन भण्डार गृह आदि विषयों की विस्तृत जानकारी दी गयी।

इस शैक्षणिक भ्रमण में समृद्धि परियोजना के जिला समन्वय विनय श्रीवास्तव, नन्दलाल, कमलेश कुशवाहा, सीताराम, शिवसिंह, संजय, रवि झॉ एवं किसान भाई गुलाब राजपूत, अशोक कुशवाहा, सरमन लाल, रामस्वरूप, ब्रगभान, रामसिंह, गोपी, तूफान सहरिया, जगभान सहरिया, रामकुमार आदि किसान भाईयों ने क्षेत्रीय किसान मेला में प्रतिभाग किया।


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