विधि विरुद्ध धर्म सम्परिवर्तन प्रतिषेध विधेयक विधान परिषद में पारित, सपा की सभी दलीलें खारिज

विधि विरुद्ध धर्म सम्परिवर्तन प्रतिषेध विधेयक विधान परिषद में भी पारित

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म सम्परिवर्तन प्रतिषेध विधेयक विधानसभा के बाद बृहस्पतिवार को विधान परिषद में भी पारित हो गया है। विपक्ष ने इसमें कई खामियां गिनाईं थीं. विधान परिषद सभापति ने विपक्ष की दलीलों को बाजिब नहीं माना. इसके बाद सपा सदस्यों के हंगामे के बीच विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया।

भोजनावकाश के बाद शुरू हुई कार्यवाही के दौरान इस विधेयक को सदन के पटल पर रखा गया। सदन में सपा और विपक्ष के नेता अहमद हसन और कांग्रेस सदस्य दीपक सिंह ने इसमें कई खामियां गिनाते हुए इसे प्रवर समिति के पास भेजने का आग्रह किया।

सभापति कुंवर मानवेन्द्र सिंह ने इस विधेयक पर नेता विपक्ष और उनकी पार्टी के सदस्यों द्वारा दिये गये संशोधन प्रस्तावों को नियमों के अनुकूल नहीं मानते हुए उन्हें खारिज कर दिया। उसके बाद उन्होंने सपा सदस्यों के हंगामे के बीच विधेयक को ध्वनिमत से पारित घोषित कर दिया।

मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ की अध्‍यक्षता में नवंबर, 2020 में मंत्रिमण्डल की बैठक में उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिशेष अध्‍यादेश को मंजूरी थी। इसमें विवाह के लिए छल, कपट, प्रलोभन देने या बलपूर्वक धर्मांतरण कराए जाने पर अधिकतम 10 वर्ष के कारावास और जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

यह विधेयक बुधवार को विधानसभा में पारित हुआ था।


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