मछली पालन से किसान की दिशा और दशा दोनों बदली

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निवाड़ी – कहते है की जब एक रास्ता बंद होता है तो 10 और नये रस्ते खुद व् खुद सामने और कही न कही से खुल ही जाते है आइये ऐसी ही कुछ कहानी है पठाराम ग्राम के रहने वाले जगदीश अहिरवार जी की|

जगदीश अहिरवार इनके पिताजी श्री मातादीन अहिरवार अपने परिवार के साथ ग्राम पठाराम में लगभग 50 -60 वर्षो से रह रहे है जगदीश के पिता जी ने अपने जीवन में बहुत सारे उतार चड़ाव देखे है,पानी से हमेशा भरे रहते थे तालाब. नहरे और कुंए न खेत में सिचाई करने की चिंता और न ही पानी से जुड़ा हुआ कोई व्यावसाय की चिंता,लेकिन पिछले 7 -8 सालों में ऐसी सुखा देखी जिसकी बजह से किसी भी काम में मन नहीं लगता बस एक ही बात दिखती है की दूसरों की मजदूरी ही करनी पड़ेगी|लेकिन हमारी आने वाली पीड़ी कैसे मजदूरी करेगे  उनका भविष्य भी अब तो दाव पर लगा था,जो तालाब हमेशा भरे रहते थे आज वो सूखे पड़े है जब थोड़ी बहुत बारिश होती है तभी सिर्फ नाम के लिए पानी आ  जाता है,लेकिन कुछ समय के बाद फिर वही समस्या तालाब,कुए सब सूख गये|

जगदीश  के पास लगभग 1 एकड़ जमीन होगी लेकिन समस्या वही पानी की पानी अगर अच्छा हो तो खेती के साथ साथ कुछ और भी व्यावसाय कर सकते है|परिवार में 04 महिलाये व्   05 पुरुष हैAऔर सबसे बड़ी बात तो ये थी की जगदीश के परिवार में आय का मुख्य श्रोत खेती ही है वाकी तो ऐसा है कभी कोई मजदूरी लग जाती है तो चले जाते है नहीं तो अपनी खेती ही देखते है,तभी अचानक से एक खबर कानो में सुनाई दी की डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्ज(ताराग्राम) संस्था की तरफ से मैरिको तालाब जीर्णोद्धार परियोजना के तहत तालाब गहरीकरण का कार्य किया जा रहा है,तभी लगा की सायद अब कुछ अच्छा होने वाला हैA इस योजना के तहत APA चैकडेम का गहरीकरण का कार्य किया गया है|

पहला फायदा तालाब से निकलने वाली मिट्ठी को अपने खेतो में डाला इसके साथ साथ कुछ किसानों ने अपने घरों की पुराई का काम किया जो मिटटी उनको कही और से पैसे में लेनी थी वो उनको फ्री में ही मिल गई   इसके साथ ही APA चैकडेम का मैरिको जीर्णोद्धार परियोजना से तालाब का गहरीकरण किया गया इसमें अब पानी कुछ ज्यादा समय के लिए रहेगा यह सब देखकर सारे गाँव वाले बहुत खुश हुए साथ ही जगदीश जी के मन में इसको लेकर एक नया उद्यम करने की मंसा जागी उन्होंने सोचा कि कु न इस तालाब में हम मछली पालन करे क्योकि अब तो पानी रहेगा और किसी भी बात की कोई समस्या भी नहीं होगी इस तरह अपनी सोच को अंजाम देने के लिए जगदीश ने तालाब में 5 टीन मछली का बीज डाल दिया|

जगदीश को अब सुकून था कि अब तो हम खेती का काम भी अच्छे से कर सकते है,मछलियों का बीज छोड़ने के बाद जगदीश जी अपनी खेती का काम भी करने लगे,कुछ के बाद जगदीश को पता चला की उस बीज से 5000 मछली के बच्चे हो गये थे अब तो जगदीश बहुत खुश हो गये क्योकि ये संख्या अभी और बढती जायगी और मछली का व्यावसाय करके मुनाफा भी होने वाला था|जगदीश जी की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा क्योकि खेती में सिचाई की चिंता भी नहीं रही,साथ में एक व्यावसाय करने का रास्ता भी मिला साथ ही इस वर्ष ताराग्राम से जो गहरीकरण कराया गया इससे अब पानी दिसंबर –जनवरी तक रहेगा|पानी ज्यादा समय रहने से तालाब के आस पास जो किसान है उनको अपनी फसल में सिचाई की समस्या ख़तम हो गई थी|


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