बस संचालक नहीं कर रहे कोविड गाइडलाइन का पालन|

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बसों की छत और गेटों पर,लटककर यात्रा कर रहे यात्रियों को कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा,प्रशासन की लापरवाही  कार्यप्रणाली के चलते हो सकता है  बड़ा हादसा|

ललितपुर_ कोरोना संक्रमण का खतरा एक बार फिर प्रशासन व बसों संचालकों की लापरवाही से बढऩे का खतरा बनता नजर आ रहा है।  बस स्टैड पर हालत यह है कि बसों में सफर करने वाले 80 फीसद यात्री मास्क ही नहीं पहन रहे हैं। वहीं दूसरी ओर बस संचालकों का इस ओर ध्यान नहीं है।

वे केवल सवारियों को बस के अंदर व बाहर ही नहीं बिठाते है बल्कि  बस की छत पर ठसाठस भर कर ढोने में ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। जबकि  कोरोना गाइड लाइन का पालन कराने की शर्त पर बस संचालन की अनुमति मिली थी, इस पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं है।

आपको बता दें शहर के बस स्टैंड से रोजाना 100 से 150 बसों का संचालन होता है। जो झांसी, सागर, भोपाल, टीकमगढ़, चन्देरी, बार, जाखलौन, छत्तरपुर, अशोकनगर, बीना, महरौनी, मड़ावरा, बालाबेहट, देवगढ़, इंदौर आदि शहरों में आती जाती है। लेकिन कोविड 19 के नियमों का पालन नहीं किया जाता।

शनिवार को सुबह से ही बिना मास्क के सवारियां बसों में ठसाठस बैठी व बसों की छत पर सवारियां अपनी जान जोखिम में डालकर बस के गेट पर लटकती सावरिया नजर आई।

बस स्टैंड पर बसों की प्रतीक्षा में जो लोग बैठे थे, वे भी बगैर मास्क के बैठे रहते हैं। इधर एआरटीओ विभाग व यातायात पुलिस का ध्यान शहर के अंदर इस ओर नही हैं। कोरोना गाइडलाइन के अनुसार 50 सवारी बसों में भर सकते हैं। लेकिन यहां तो बसों में सीट से दो से तीनगुनी तक सवारी भरी जा रही हैं।

ऑटो संचालक भी उड़ा रहे है यातायात नियमों की धज्जियां|

ललितपुर शहरी क्षेत्र व शहर से ग्रामीणों को जाने वाली ऑटो वाले पूर्ण क्षमता के साथ चल रहे हैं। प्रशासन रोक पाने में असफल नजर आ रहा है। ऑटो के अंदर बिना मास्क पहने व एक ऑटो में 15 से 25 सवारियां यात्रा करती देखी जा रही हैं। प्रशासन व यातायात पुलिस ऑटो चालकों के सामने नतमस्तक दिख रहा है।

कमाई का चक्कर फैला रहा कोरोना का संक्रमण|

पुलिस प्रशासन के नाक के नीचे ऑटो और बसों में कमाई का चक्कर कोरोना संक्रमण को भी फैला रहा है। यात्रा के लिए निर्धारित से अधिक यात्रियों को लेकर ऑटो और बस सडक़ों पर दौड़ रहे हैं। सवारियां भी लापरवाही से यात्रा कर रही हैं। मास्क तक नहीं लगा रहे हैं। सैनिटाइजेशन भी नहीं किया जा रहा है। कोरोना के संक्रमण की रोकथाम के लिए शासन ने बस की एक सीट पर एक यात्री को बिठाने के निर्देश दिए थे। लेकिन कोरोना की गाइड लाइनों को भूलकर पुलिस प्रशासन कुम्भकर्ण की नींद में सो रहा है।

बिना मास्क लगाए कर रहे यात्रा

कोरोना महामारी का डर अब लोगों में बिल्कुल भी नहीं दिख रहा है। लोग बसों की छतों पर बैठकर यात्रा कर रहे हैं। निजी बसों में यात्रा करने वाले अधिकांश लोगों के मुंह पर मास्क नहीं होते हैं। इससे कोरोना फैलने का खतरा भी बढ़ रहा है। लेकिन, इसकी परवाह न तो निजी बस संचालकों को है और न ही एआरटीओ के अधिकारियों को। बसों की छत पर बैठा रहे सावरियां|

हालात ये हैं कि जितनी सवारियां बसों के अंदर बैठी हुई हैं, उतने ही लोग छतों के ऊपर बैठकर यात्रा कर रहे हैं। सवारियों को सामान की तरह भरकर ले जा रही बसों को देखकर यह नहीं लगता कि देश में कोरोना महामारी का प्रकोप है। वहीं, रोडवेज बसों में भी कोरोना से बचाव के संबंध में कोई खास इंतजाम नहीं दिख रहे हैं। अधिक सवारियां भरकर चल रही बसें न सिर्फ लोगों की जान के साथ खिलवाड़ कर रही हैं, बल्कि नियमों की धज्जियां भी उड़ा रही हैं। इस ओर संबंधित विभाग के अधिकारी भी ध्यान नहीं दे रहे हैं।

चेकिंग के नाम पर होती है खानापूर्ति, चालान होते केवल गरीब लोगों के

पुलिस प्रशासन द्वारा कोरोना गाईड लाइन नियमों को पालन कराने के लिये चेकिंग अभियान चलाया जाता है, जिससे वाहन चालक कोरोना गाइड लाइन का पालन करे, जैसे वाहन चालक मुँह पर मास लाकर वाहन चलाये, अगर मास न लाये तो उसका चालन कर दिया जाता है, जिससे कोरोना महामारी से बच सके, लेकिन वही दूसरी ओर कोरोना संकमण को बस व ऑटो संचालक बढ़ावा दे रहे है। इस ओर प्रशासन मुखदर्शक बना हुआ है। बसों की छत से लेकर गेट तक सवारियां लटकती नजर आ रही है, लेकिन प्रशासन द्वारा इस ओर कोई ध्यान न देकर मोटरसाइकिल सवार गरीब लोगों का चालान कर इतिश्री कर वाहवाही लूटी जा रही है।


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