योगी आदित्य अब UP के ‘नाथ’, थोड़ी देर में लेंगे शपथ, मंत्रिमंडल में दिखेंगे कई चौंकाने वाले चेहरे

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लखनऊ. UP के नए मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ के नाम पर मुहर लगने के बाद योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में शपथ ग्रहण समारोह स्थल का जायजा लिया . शपथ ग्रहण समारोह की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गईं हैं. योगी के साथ यहाँ फिलहाल 40 के करीब मंत्री शामिल हो सकते हैं। जातीय समीकरणों के बीच संतुलित बनाते हुए चेहरों को मंत्रिपरिषद में शामिल किया जाएगा। सूत्रों की मानें तो इसमें अगड़ी व पिछड़ी का ध्यान रखते हुए दलित, ओबीसी के साथ-साथ ठाकुर-ब्राह्मण, वैश्य व कायस्थ को भी सीटों के अनुसार प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।

योगी आदित्य के हाथ में कमान

बुंदेलखंड के साथ पूर्वी-पश्चिमी यूपी के साथ-साथ मध्य क्षेत्र को भी प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।सपा सरकार में बुंदेलखंड से कोई मंत्री नहीं था. भाजपा के एक वरिष्ठ पार्टी पदाधिकारी का कहना है कि सबसे बड़ी चुनौती पिछड़े, अति पिछड़े व दलितों को मंत्रिमण्डल में स्थान देने की रहेगी क्योंकि पार्टी ने 112 ओबीसी उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे थे जिनमें से 91 जीतकर आए हैं। वहीं 78 दलित प्रत्याशी उतारे गए थे जिनमें से 71 जीतकर आए हैं।

वे बताते हैं कि अगड़ी जातियों के बीच संतुलन बनाना भी टेढ़ी खीर होगी। कुल 71 ठाकुर उम्मीदवारों में से 45 मैदान मार चुके हैं जबकि 15 जाट प्रत्याशियों में से 11 जीते हैं। वहीं 69 ब्राह्मण उममीदवारों में से भी 61 जीते हैं जबकि 26 वैश्य में से 19 प्रत्याशी मैदान मारकर विधानसभा पहुंच रहे हैं। चार-चार भूमिहार व कायस्थ उम्मीदवार भी जीतकर आए हैं। इनके बीच जातीय संतुलन बिठाना न सिर्फ योगी के लिए बल्कि पार्टी नेतृत्व के लिए भी बड़ा सिरदर्द है।

संतुलन बनाये रखना बड़ी चुनौती

यही नहीं पार्टी नेतृत्व को क्षेत्रवाद के संतुलन का भी ध्यान रखना है और युवा व ऊर्जावान लोगों को आगे लाने की चुनौती भी है। चुनाव पूर्व जो लोग बाहर से आकर पार्टी में शामिल हुए और जिन्होंने अपने साथ-साथ आसपास की सीटों को भी पार्टी की झोली में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई हैं उनका भी ख्याल रखना है।

इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा युवाओं के लिए दिए गए नारे ‘न्यू इण्डिया’ के तहत पहली बार जीतकर सदन पहुंच रहे युवाओं के साथ-साथ पार्टी के वरिष्ठ और पूर्ववर्ती भाजपा सरकारों में मंत्री रहे नेताओं को भी एडजस्ट करने का दबाव ऊपर से अलग है। साथ में आरएसएस काडर को ध्यान में रखते हुए एक-दो विधान परिषद सदस्यों को भी मंत्रिपरिषद में शामिल किए जाने की संभावना है। लिहाजा मंत्रिपरिषद को छोटा रखकर भविष्य में बाकी को एडजस्ट करने की नीति पर ही चलने की उम्मीद है।

 

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