ये है बीजेपी का विकास मॉडल, बुंदेलखंड में अस्पताल के फर्श पर होती है महिलाओं की नसबंदी, कांग्रेस बोली- पीएम अभी सीप्लेन में सवार हैं

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छतरपुर में अस्पताल के फर्श पर लेटी महिलाएं
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में अस्पताल के फर्श पर नसबंदी के बाद महिलाएं
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में अस्पताल के फर्श पर नसबंदी के बाद महिलाएं

छतरपुर. जिस देश में गुजरात के विकास मॉडल के शोर में बीजेपी केंद्र में काबिज हो गई उसी देश के बीजेपी शासित राज्य मध्य प्रदेश में अस्पतालों से अमानवीय ख़बरें मिल रहीं हैं. बुंदेलखंड के छतरपुर जिले के  सिटी हॉस्पिटल में महिला नसबंदी ऑपरेशन के दौरान बेहद लापरवाही बरती जा रही है। यहाँ महिलाओं का नसबंदी ऑपरेशन महिलाओं को जमीन पर लिटाकर किया जा रहा है। बुंदेलखंड के दूसरे गवर्नमेंट हॉस्पिटलों का भी यही हाल है. प्रशासन इस मामले पर चुप्पी साधे है. लोगों में रोष है. तो वहीँ कांग्रेस ने इस विकास पर तंज कसा है. कांग्रेस ने कहा, प्रधानमंत्री सीप्लेन में बैठकर जल से आसमान में उड़ान भरकर विकास के नाम पर गुजरात में चुनावी फायदा देख रहे हैं, वहीँ लोगों को मूलभूत सुविधाएँ भी नसीब नहीं हैं.

सरकार चला रही नसबंदी कार्यक्रम, अपने खर्च पर घर लौट रहीं महिलाएं

परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत  सिटी हॉस्पिटल में इन दिनों जिले के सभी आठों ब्लाकों की महिलाओं के नसबंदी ऑपरेशन हॉस्पिटल के डॉक्टरों द्वारा किए जा रहे हैं। इन महिलाओं को हेल्थ डिपार्टमेंट की एएनएम, आंगनबाड़ी वर्कस, सहित हेल्थ डिपार्टमेंट के कर्मचारी मोटीवेट कर टीटी ऑपरेशन कराने के लिए सिटी हॉस्पिटल लेकर आते हैं। इन महिलाओं को ऑपरेशन के लिए हॉस्पिटल तक लाने के लिए मिशन परिवार विकास कार्यक्रम योजना के तहत 100 रुपए और घर तक सुरक्षित भेजने की फैसिलिटी के लिए 250 रुपए हेल्थ डिपार्टमेंट को महिलाओं पर खर्च करने होते हैं। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि महिलाओं को अस्पताल में जमीन पर ही लिटा दिया जता है. वहीँ पर उनका ओपरेशन भी कर दिया जाता है. कोई सुविधा नहीं है. वहीँ ऑपरेशन कराने वाली महिलाओं सहित हेल्थ वर्कर्स को जानकारी न होने के कारण निजी वाहन की मदद से अपने गांव लौटना पड़ रहा है। सिटी हॉस्पिटल में ऑपरेशन कराने आए पेशेंट ने बताया कि हम महिलाओं को ऑपरेशन के लिए लाया जाता है। पर आने जाने की फैसिलिटी नहीं दी जाती। हम लोगों को अपने रुपए खर्चकर गांव से आना और जाना पड़ता है। आने के दौरान तो हम लोग बस से आते हैं पर ऑपरेशन होने के बाद लेटकर जाना पड़ता है। इसलिए किराए का वाहन करना जरूरी रहता है। सिर्फ अपने लिए निजी वाहन करने के कारण उन लोगों के अधिक रुपए खर्च होते हैं।

अफसरों ने पल्ला झाड़ा –

सीएमएचओ डॉ. एके तिवारी का कहना है कि नसबंदी ऑपरेशन करने आने वाली महिलाओं को आने और जाने की फैसिलिटी मिलना चाहिए। ऑपरेशन कैंप तक लाने के लिए 100 रुपए और घर वापस छोड़ने के लिए प्रति महिला 250 तक खर्च करने का प्रावधान है। यह प्रबंध कैंप प्रभारी को करना होता है। यदि महिलाओं को लाने और ले जाने का प्रबंध नहीं किया जा रहा है तो वाहन की व्यवस्था कराई जाएगी.

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कांग्रेस ने लगाया शिवराज सरकार पर आरोप

कांग्रेस प्रवक्ता दुर्गेश शर्मा ने प्रदेश की शिवराज सरकार पर आरोप लगाया कि इस सरकार में लोग बेहाल हैं. गरीबों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है. सरकारी चिकित्सा फेल हो गई है. मरीजों का उपचार नहीं किया जा रहा है. विकास का दावा झूठा है. जनता मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान है.

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