भारतीय मूल के इंजीनियर का कमाल, बनाया आॅनलाॅइन शाॅपिंग के लिए अनोखा साॅफ्टवेयर 

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झांसी। वर्तमान समय हर कोई ई-कामर्स या आॅनलाॅइन खरीदारी करता है। इसके लिए कंपनियों ने भी कई प्रकार के हैवी साॅफ्टवेयर तैयार किए हैं। बावजूद, साॅफ्टवेयर में रियलटाइम मैनेजमेंट और खरीदारी की पूरी प्रोसेसिंग का सिंक्रोनाइजेशन साॅफ्टवेयर डेवलपर्स के लिए आज भी चैलेंज है। ऐसे में भारतीय मूल के साॅफ्टवेयर इंजीनियर अभिषेक बनर्जी ने ऐसा साॅफ्टवेयर तैयार किया है, जो अभी तक के साॅफ्टवेयर से काफी एडवांस्ड है।
आॅनलाॅइन शाॅपिंग के क्षेत्र में एमेजन, फिल्पकार्ट और स्नैपडील जैसी कंपनियां बहुत बड़े स्तर पर काम कर रही हैं। लेकिन, इन कंपनियों के लिए ग्राहकों को पूरी तरह से संतुष्ट करते हुए आॅनलाॅइन शाॅपिंग की पूरी प्रक्रिया के तालमेल को बेहतर बनाए रखना अभी भी बहुत मुश्किल हो रहा है। इसकी मुख्य वजह आॅनलाॅइन शाॅपिंग का क्षेत्र काफी विस्तृत होना और प्रतिदिन काफी बड़े स्तर पर खरीदारी का होना है, जिस कारण से इन्हें सभी प्रकार के रिकार्ड को व्यवस्थित करने में काफी परेशानी होती है।
अभिषेक ने पश्चिम बंगाल यूनिवर्सिटी आॅफ टेक्नोलाॅजी से बीटेक किया है। वह इस समय एक रिटेलर ग्रुप के साथ ई-कामर्स बिजनेस को और बेहतर बनाने के लिए साफ्टवेयर तैयार करने में व्यस्त हैं। अभिषेक का काम एक ही छत के नीचे पूरे कामर्शियल सिस्टम को रियलटाइम में तैयार करने पर फोकस है। उनका यह साफ्टवेयर हेल्थकेयर व ई बैंकिंग सेक्टर में काफी सुरक्षित और प्रभावी है। अभिषेक ने अपने साफ्टवेयर को मैथमेटिक्स के सिद्धांतों को अपना कर कंटेंट बेस्ड डायनेमिक रूटीन अप्रोच का फाॅलो किया है। जिस कारण उनका काम दूसरे सभी इंजीनियरों से काफी अलग और बेहतर है। आॅनलाॅइन शाॅपिंग चेन का साफ्टवेयर बहुत ही जटिल होता है। इसमें सबसे बड़ी परेशानी पूरी प्रक्रिया को रियलटाइम में प्रोसेस करने की है। अभी भी साॅफ्टवेयर इंजीनियरों के लिए लानलाइन शापिंग के साफटवेयर को रियलटाइन में प्रोसस के लायक बनाना काफी चैलेंज भरा है। इससे पूरी प्रक्रिया धीमी हो जाती है। दरअसल होता यह है कि जब कोई व्यक्ति सामान खरीदता है तो इसकी सूचना कई स्तरों पर कई प्रकार के लोगों या विभागों तक पहुंचती है, जैसे स्टोर, कूरियर, आनलाइन पेमेंट सिस्टम, बायर, सेलर आदि। जिससे हर किसी को खरीद से संबंधित अलर्ट और आगे की प्रक्रिया के संबंध में जानकारी मिल जाए। जिससे स्टोर से खाली हुए सामान की भरपाई हो सके। यह सभी रियलटाइम में होने चाहिए, नहीं तो पूरी प्रक्रिया गड़बड़ा जाएगी और सामान के स्टाक को बनाए रखने में दिक्कत आएगी। इससे व्यापारी की खास का धक्का लगेगा और इसका पूरा असर बिक्री पर पड़ेगा।

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