हिमालय की चोटी पर इस गुफा में उमा भारती ने की तपस्या,...

हिमालय की चोटी पर इस गुफा में उमा भारती ने की तपस्या, स्वर्ग से की तुलना

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पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने इस बार लोकसभा चुनाव नहीं लड़कर सभी को चौंका दिया था. राजनीति से दूर वह इन दिनों गंगा मैया और प्रकृति साधना में लीन हैं. उन्होंने हिमालय पर अपने तप के बाद कुछ बेहतरीन तस्वीरें साझा की हैं. ”


हरिद्वार। कुछ समय के लिए राजनीति से दूर रहने की घोषणा के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती अपना पूरा ध्यान जप और तप में लगा रहीं हैं। हाल ही में उमा भारती ने हिमालय पर्वत की ऊंचाई पर बनी एक कुटिया में नौ दिन कड़ी साधना के अनुभव साझा किए हैं। उन्होंने इस स्थान पर पहुंचने के लिए बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण को श्रेय दिया है।

उमा भारती अपनी FB दीवार पर लिखतीं हैं..

‘आज स्वर्ग से धरती पर उतरी हूं। पतंजलि के विश्व प्रसिद्ध आचार्य बालकृष्ण जी की प्रेरणा से 9 दिन पौड़ी जिले के घने जंगलों में स्थित प्रसिद्ध झिलमिल गुफा के ऊपर बिताए।

वहां पर आचार्य जी ने एवं बाबा रामदेव जी ने बहुत सुंदर प्राकृतिक स्थान में छोटी सी कुटिया बनाई है, आचार्य जी की इच्छा थी कि मैं 9 दिन वहां मौन रहकर भगवान नाम स्मरण करूं।

जगह इतनी सुरम्य एवं अलौकिक है कि वहां से वापस आने की इच्छा ही समाप्त हो गई थी।आचार्य जी कल वहां पर पुनः आए, हवन एवं आसपास के ग्रामवासियों के बीच भंडारा हुआ एवं आचार्य जी ने मुझे अपने कर्तव्य का स्मरण कराया।

आचार्य बालकृष्ण जी मुझसे आयु में 10 साल से ज्यादा छोटे हैं लेकिन मेरे भाव जगत में वह पिता एवं गुरु तुल्य हैं, आज जब मैं वहां से चलने लगी तो मेरा मन भर आया।

पौड़ी जिले के गंगा के किनारे हिमालय की ऊंचाई पर घना जंगल, घने बरगद के पेड़, गायें तथा उस सुरम्य स्थान में रहने वाले वैदिक मार्ग का अनुशरण करने वाले कुछ ब्रह्मचारीगण – बस इतनी ही दुनिया थी।

किंतु वह दुनिया विशाल, अलौकिक एवं संपूर्ण थी इसलिए आते समय वहां के दो वैदिक ब्रह्मचारीओं को अपनी पसंद की यह कविता सुनाई- Woods are lovely, Dark and deep, But I have promises to keep, And miles to go, Before I sleep.

वर्ष 2010 में इसी तरह का हवन करवा कर मौन रखवाकर आचार्य बालकृष्ण जी ने मेरे जीवन की नई शुरुआत की थी जिसमें गंगा ही गंगा थी। अब 9 साल बाद फिर से हिमालय के घने जंगलों से शक्ति संवर्धन करवा के गंगा की यात्रा के लिए फिर तैयार करके भेज दिया है।

देवरहा बाबा कहते थे- गौ भारत माता का मन है, गायत्री भारत माता की वाणी है, गंगा भारत माता के प्राण हैं। ।।गंगा मैया की जय।।’

साभार- उमा भारती के फेसबुक पेज से ..

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