आर्थिक तंगी में किसान ने लगाई फांसी, अस्पताल ने वाहन नहीं दिया तो PM के लिए खटिया पर शव ले गए परिजन

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टीकमगढ़. बुंदेलखंड में किसानों द्वारा मौत को गले लगाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में बंटे बुंदेलखंड के किसान भुखमरी के कगार पर नजर आने लगे हैं. आर्थिक तंगी से जूझ रहे 28 वर्षीय किसान ने फांसी लगाकर जान दे दी। उसके शव को अस्पताल ले जाने में स्थानीय प्रशासन के जिम्मेदारों ने भी तंगी दिखाई। फलत: परिजनों को खटिया पर शव को पोस्टमार्टम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाना पड़ा। जिला सूखा प्रभावित है। इसके बावजूद अब तक सूखा राहत राशि नहीं बांटी गई है। पृथ्वीपुर थाना अंतर्गत नगर परिषद के वार्ड नं. 10 बरगोला खिरक में गुरुवार रात किसान के 28 वर्षीय पुत्र ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

– मजदूरी से परिवार का भरण-पोषण नहीं हो पा रहा था। सूखा राहत की राशि भी अभी नहीं मिली है। इसलिए धनीराम ने दिल्ली जाकर मजदूरी करने की इच्छा जाहिर की थी। लेकिन अचानक आत्महत्या कर ली। परिवार में उसकी पत्नी और दो बालक, एक बालिका हैं।

 

इनका कहना-
हमसे किसी ने भी शव वाहन की मांग नहीं की है। शव को चारपाई पर लाने जानकारी मिली थी। जिसके बाद शव को वापस घर भेजने के लिए वाहन उपलबध कराया गया है।
डॉ. एमके जैन, ब्लॉक मेडीकल ऑफीसर

– सूखा राहत राशि के अभी प्रकरण तैयार किए जा रहे हैं। इसके बाद प्रक्रिया के तहत ही राहत राशि का आवंटन किया जाएगा।
जीएस पटेल, तहसीलदार पृथ्वीपुर

 

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