बुन्देलखण्ड के इस फौजी को शादी के लिए भी नहीं मिली छुट्टी, खुदकुशी कर दे दी जान, बारात के दिन उठी अर्थी

0
army bundelkhand shaheed
दमोह। देश की सरहद पर तैनात उस फौजी को शादी के लिए भी छुट्टी नहीं मिली। उसने बार-बार अपनी शादी के लिए अफसरों से छुट्टी दिए जाने की गुहार लगाई, लेकिन छुट्टी नहीं मिली तो उसने जान देने का फैसला कर लिया।  वक्त की मार ऐसी कि जिस दिन हिंडोरिया के इस फौजी की शादी के लिए बारात उठनी थी उस दिन गांव से उसकी अर्थी उठ गई।
गौरतलब है कि पठानकोट में तैनात हिंडोरिया निवासी प्रीतम पिता भोले चौरसिया की 23 नवंबर को शादी थी। बारात मध्यप्रदेश के दमोह जिले के हिंडोरिया से सागर जाना थी। लेकिन, छुट्टी न मिलने के कारण प्रीतम ने पठानकोट में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। बुधवार को जब गांव में उसका अंतिम संस्कार किया गया तो पूरा गांव आसुओं के सैलाब में डूब गया।
हरतरफ मातमी मंजर, दुल्हन की मेंहदी सजी रह गई
परिजन पंजाब से फौजी का शव लेकर बुधवार की सुबह हिंडोरिया पहुंचे। बुधवार को ही उसकी बारात सागर जानी थी, लेकिन यहां शादी के दिन ही उसका अंतिम संस्कार किया गया। वहीं दुल्हन भी शादी के लिए मेंहदी रचाकर बैठी रह गई। उसके घर पर भी मातम छा गया। अंतिम संस्कार में प्रीतम के गांव के साथ ही साथ आस-पास के गांव के भी लोग शामिल हुए। मृतक प्रीतम चौरसिया के भाई मुकेश चौरसिया का कहना है, पठानकोट पहुंचने के बाद अधिकारियों ने उन्हें प्रीतम का शव नहीं दिखाया। न ही परिजनों को घटना स्थल पर ले जाया गया। सुसाइड नोट के बारे में भी कोई जिक्र नहीं किया गया। सीधे शव अमृतसर से दिल्ली और दिल्ली से इंदौर फ्लाइट से पहुंचा दिया। अब तक कोई जानकारी नहीं दी गई। इधर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए वधु पक्ष के लोग भी दमोह पहुंचे।
घर में थी दावत, तभी आ गई मौत की खबर
जैसे ही 20 नवंबर को परिजनों को प्रीतम के आत्महत्या करने की सूचना मिली तो सारी खुशियां मातम में बदल गईं। नीरज ने बताया कि 20 नवंबर को व्यवहारियों का प्रीतिभोज था। उस दिन खाना बनाया जा रहा था कि दोपहर डेढ़ बजे जैसे ही फोन पर सूचना मिली की प्रीतम ने आत्महत्या कर ली है तो सभी बिलखने लगे। उन्होंने बताया कि सभी रिश्तेदारों व परिचितों को शादी के कार्ड बांटे जा चुके थे। रिश्तेदारों का आना भी शुरू हो गया था। इसके पहले जून में प्रीतम की सगाई सागर निवासी कीर्ति के साथ हुई थी।
पिता की आंखों से नहीं थम रहे आंसू
इस घटना के बाद हिंडोरिया में प्रीतम के घर लोगों का आना-जाना लगा रहा। गांव के सारे लोग फौजी के घर के बाहर बैठे थे, सभी के चेहरे मायूस थे लेकिन वह अपना दर्द अंदर ही अंदर दबाए हुए थे। इसी बीच प्रीतम के पिता भोले प्रसाद भी एक कुर्सी पर बैठे थे। अपने जवान बेटे के मौत का गम उनकी रूंधती आंखों में नजर आ रहा था। घर के अंदर महिलाओं के रोने की आवाज आ रही थी।

LEAVE A REPLY