विधानसभा में बोले गरौठा विधायक, अन्ना जानवरों को रोके बिना बुन्देलखण्ड में खेती मुश्किल

0
File Photo-MLA Jawahar lal rajpoot

बुन्देलखण्ड खबर

झांसी। गरौठा विधायक जवाहर राजपूत ने एक बार फिर विधानसभा में किसान हित में अन्ना जानवरों पर पूरी तरह अंकुश लगाये जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने अन्ना जानवरों की रोकथाम के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री किसान और गाय की चिंता कर रहे हैं। इसके साथ ही प्राकृतिक खेती को मुख्यधारा में लाने के लिए सरकार से कार्यक्रम बनाने का भी आग्रह किया।

विधानसभा में गरौठा विधायक ने सवाल करते हुए कहा कि छुट्टा जानवरों से फसल को नुकसान हो रहा है। किसान अपनी फसल की अन्ना जानवरों से रक्षा नहीं कर पा रहा है। इन जानवरों से दुर्घटनाएं भी हो रहीं हैं। उन्होंने कहा कि किसान प्राकृतिक खेती करे तो एक गाय के गौमूत्र से दस एकड़ खेती बिना जहर के हो सकती है। क्योंकि उर्वरक और कीटनाशक से जहरयुक्त खेती हो रही है, जिससे घातक कैंसर जैसी बीमारियां हो रहीं हैं और निर्यात भी घट रहा है। कीटनाशक के प्रयोग की वजह से दूसरे देशों में गेहूं, चावल आलू का निर्यात नहीं हो पा रहा है।अन्ना जानवरों का समाधान केवल प्राकृतिक खेती और पालेकर पद्धति से ही हो सकता है।

विधायक ने कहा कि बुन्देलखण्ड इस समस्या से जूझ रहा है, जबकि इजरायल जैसे देश बुन्देलखण्ड से जनसंख्या में कम होने के बाद भी गाय पालन कर प्राकृतिक खेती को अच्छी तरह कर रहा है। इजरायल के किसानों ने अच्छे प्रबंधन के साथ इसे आगे बढ़ाया है। यदि दस एकड़ की खेती पर हम एक गाय भी पालें तो उसके गोबर और मूत्र से इजरायल की तरह अच्छे प्रबंधन के साथ खेती की दशा और सेहत सुधार सकते हैं। यदि पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर तैयार किया जाए और सरकार इसमें किसान की मदद करे तो निश्चित तौर पर किसान को फायदा होगा।
इसको लेकर विधायक जवाहर लाल राजपूत ने विधानसभा में प्रस्ताव रखकर प्रदेश में खाद्यान्न एवं सब्जी उत्पादन में कीटनाशक एवं रासायनिक उर्वरकों से जनसामान्य को हो रहे नुकसान को देखते हुए प्रकृतिक खेती किए जाने की कार्ययोजना बनाई जाए।

इसके साथ ही विधायक जवाहर राजपूत ने अन्ना जानवर समस्या पर सदन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि अन्ना जानवरों पर पूरी तरह अंकुश तभी लगेगा जब सभी गांव पंचायतों में गौ आश्रय केंद्र बनाए जाएंगे। इसकी जिम्मेदारी और जवाबदारी दोनों ही स्थानीय इकाई की हो ताकि किसी किसान के खेत में जानवर न घुस सकें। उन्होंने कहा कि जानवरों को पंचायत स्तर पर रोकने से ही इस पर अंकुश लगेगा। इसके साथ ही गरौठा विधायक ने बैलों के बंधियाकरण करने के लिए अभियान चलाने को भी प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि अन्ना जानवरों की रोकथाम के लिए यह जरूरी है।
विधानसभा में विधायक राजपूत ने गौ आश्रय केंद्रों में पक्के चबूतरे व शेड बनाने की बात कही।

विधायक राजपूत के सवाल पर मंत्री सुरेश खन्ना ने गौ आश्रय केंद्रों की जानकारी दी। मंत्री ने कहा कि बुन्देलखण्ड की 8 पंजीकृत गौशालाओं को 64.50 लाख रुपए प्रति गौशाला की दर से दो किश्तों में दिया गया, जिसमें पांच सौ सोलह लाख रुपए वर्ष 2017-18 में दिए गए और पांच सौ सोलह लाख रुपए वर्ष 2018-19 में दिए गए। बुन्देलखण्ड क्षेत्र के 7 जिलों में बेसहारा गौवंश की समस्या के निराकरण के लिए पशु आश्रय गृह की स्थापना के लिए 30 लाख रुपए प्रति पशु आश्रय गृह की दर से लगभग दस लाख रुपए वर्ष 2017-18 में इसके अतिरिक्त भी दिया गया है। हम गौवंश को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होने देने की कोशिश कर रहे हैं।

LEAVE A REPLY