सपा सांसद विशंभर ने कांग्रेस प्रत्याशी दलजीत खिलाफ मोर्चा खोला, कहा मुलायम मेरे आदर्श, कांग्रेस को नहीं सपोर्ट

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बांदा। अखिलेश-राहुल की दोस्ती के बाद लिखी गई गठबंधन की इबारत बांदा की तिंदवारी सीट पर नेताओं के मतभेद नहीं मिटा पा रही है। कांग्रेस और सपा का गठबंधन होने के बावजूद सपा  के राष्ट्रीय महासचिव राज्यसभा सांसद विशंभर प्रसाद निषाद ने तिंदवारी में कांग्रेस प्रत्याशी दलजीत सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सपा संरक्षक पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के निर्देशों को बताते हुए स्पष्ट किया कि जनपद में सिर्फ बबेरू से ही सपा प्रत्याशी का प्रचार किया जाएगा। आरोप लगाया कि तिंदवारी के कांग्रेस प्रत्याशी ने उनकी बिरादरी के खिलाफ सपा कार्यालय में बयान दिया। ऐसे में वह कैसे कांग्रेस प्रत्याशी का समर्थन कर सकते है। वैसे भी नेता जी ने इस कांग्रेस और सपा गठबंधन को पहले ही अनैतिक करार दिया था। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशियों को हराने के लिए कहा था। ऐसे में वह नेता जी के निर्देशों पर ही कार्य करेंगे। अंतिम दम तक वह नेता का साथ नहीं छोडेंग़े।
प्रदेश में सपा और कांग्रेस के गठबंधन पर खुद सपा संरक्षक पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने आपत्ति जताते हुए अनैतिक कहा था। इतना ही नहीं सपा संरक्षक ने कांग्रेस प्रत्याशियों के खिलाफ सपाइयों को चुनावी मैदान में उतरकर हराने का भी ऐलान किया था। इसका असर सपाइयों में देखने को भी मिल रहा है। तिंदवारी विधानसभा सीट इस बार गठबंधन में शामिल कांग्रेस को मिली है, जिसमें मौजूदा विधायक दलजीत सिंह कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर चुनावी मैदान में है। इसी सीट से सपा ने गठबंधन के पहले पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव राज्यसभा सांसद विशंभर निषाद की पत्नी शकुंतला निषाद को प्रत्याशी बनाया था, लेकिन सीट कांग्रेस के खाते में जाने से उनको मैदान से हटना पड़ा। अब राष्ट्रीय महासचिव ने पार्टी के साथ गठबंधन होने के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राष्ट्रीय महासचिव राज्यसभा सांसद विशंभर प्रसाद निषाद ने कहा कि वह पार्टी संरक्षक पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह के साथ है। नेता जी ने पहले ही कह दिया है कि यह अनैतिक गठबंधन है। कांग्रेस प्रत्याशियों को हराने के लिए नेता जी ने कार्यकर्ताओं को निर्देश भी दिए हैं। ऐसे में वह कांग्रेस प्रत्याशियों को हराने का काम करेंगे। आरोप लगाया कि तिंदवारी विधानसभा क्षेत्र से सपा के अध्यक्ष पतराखन निषाद को कांग्रेस प्रत्याशी ने ही पार्टी से बाहर निकलवाया है। सपा कार्यालय में तिंदवारी विधायक ने अपने भाषण में कहा कि तिंदवारी सीट से निषादों ने 25 साल से अपनी बपौती बना रखी है। इसे छीनने का काम हमने किया है। सपा महासचिव ने इस बयान को लेकर कहा कि ऐसे लोगों का हम कैसे प्रचार कर सकते हैं। उनका समर्थन कतई नहीं किया जा सकता है। महासचिव ने क्षत्रियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि वर्ग विशेष के लोग केवल जातिवाद की बयार में बह रहे है। उनकी बिरादरी का प्रत्याशी चाहे जिस दल से चुनाव मैदान में उतर आए, यह वहीं के हो जाते है। राज्यसभा सांसद ने कहा कि अभी वह कुछ पत्ते नहीं खोल रहे है। आगामी छह फरवरी तक नामांकन है। इसके बाद इसका खुलासा किया जाएगा। जनता खुद समझ रही है। मतदाता जागरूक है। हम भी मतदाता है। ऐसे बड़बोले कांग्रेस विधायक को हराने के लिए जहां जरूरत होगी, वहां वोट देंगे। उन्होंने कहा कि हम सामंतशाही, गुंडागर्दी नहीं चलने दी जाएगी। इनका वह हमेशा मुकाबला करते आए है और करते रहेंगे। ऐसे बालू माफियाओं का वह हमेशा विरोध करते रहे है और करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि बबेरू में सपा का प्रत्याशी चुनाव मैदान में है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को बबेरू में जाकर पार्टी प्रत्याशी का प्रचार करने को कहा

विशंभर बोले, हत्या के केस में फंसाया था दलजीत ने
सपा महासचिव ने आरोप लगाया कि कांग्रेस विधायक दलजीत सिंह ने उनको फर्जी 302 के केस में फंसाया था। तीन-चार महीने तक यह मामला चला। कांग्रेसी आए दिन धरना प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन जिसकी हत्या में फंसाया गया था, वह मुंबई में मिला था। उसने स्पष्ट तौर पर बताया था कि उसे विधायक तिंदवारी दलजीत सिंह ने यहां भेजवाया है। सब कुछ जनता के सामने खुलकर आ गया फिर ऐसे लोगों का हम कैसे समर्थन करेंगे। नेता जी ने उनको कई बार विधायक, मंत्री, सांसद के साथ ही पार्टी में पदाधिकारी बनाकर महत्व दिया है। कोई भी नेता जी का साथ छोड़ दे, लेकिन वह उनका साथ कभी नहीं छोड़ सकते है।

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