बसपा सरकार में थे मंत्री अब डंडा लेकर गलियों में घूमते है बशीरुद्दीन….

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हमीरपुर। हमीरपुर जिले में एक ऐसे शख्स की शख्सियत यहां की राजनीति में चर्चा का विषय आज भी बनी हुयी है जो मायावती की सरकार में मंत्री बनने के बाद अपने लिये एक भी धेला नहीं कमाया। बसपा सुप्रीमो की नियत पर सवाल उठाने पर बशीरुद्दीन को चुनाव में दोबारा टिकट नहीं दिया तो अब राजनीति से उन्होंने सन्यास ही ले लिया है। अब मौदहा कस्बे में वह आम इंसान के रूप में सड़कों पर देखे जाते है। उनकी कैसी हुई राजनीति में इन्ट्री, आगे पढ़े

मौदहा कस्बे के बशीरुद्दीन पहली बार वर्ष 1991 मेें मौदहा सीट के लिये बसपा के टिकट से चुनावी समर में उतरे थे। तब उन्हें भाजपा के प्रत्याशी बादशाह सिंह से शिकस्त मिली थी। उन्हें पहली मर्तबा में ही 18895 मत मिला था। भाजपा कैंडीडेट को 26138 मत प्राप्त हुये थे। इसके बाद 1993 में फिर से बसपा के टिकट से मौदहा सीट के लिये वह चुनाव लड़े थे। उन्होंने भाजपा के कद्दावर नेता बादशाह सिंह को हरा दिया था। उन्हें 35560 मत मिले थे वही भाजपा कैंडीडेट को 35448 मत मिले थे। उस समय सूबे में सपा के गठबंधन से मायावती सीएम बनी थी मगर कुछ ही समय बाद गेस्टहाउस कांड से सत्ता छोड़ दी थी। 1995 में भाजपा की मदद से बसपा ने फिर सरकार बनायी और बशीरुद्दीन को मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया था। वह अल्पसंख्यक कल्याण, वक्फ एवं हज विभाग के साथ तीन अन्य विभागों के चेयरमैन भी रहे। मंत्री के रूप में कई कदम उठाये थे। बताते है कि 1996 में फिर विधानसभा के चुनाव हुये जिसमें मौदहा सीट से चुनाव लडऩे के लिये उन्हें बसपा ने टिकट नहीं दिया था। बस यही से उन्होंने राजनीति से तौबा कर ली। बताते है कि बशीरुद्दीन सीतापुर से निर्दल के रूप में चुनाव लड़े थे जो बुरी तरह हारे थे।

मिशन से भटक चुकी है बसपा 

पूर्व मंत्री बशीरुद्दीन का कहना है कि 1996 में लोकसभा के चुनाव के लिये चै.ध्रूराम लोधी को लेकर मायावती के पास गये थे। तब ज्यादा खर्च न करने पर किसी और को टिकट दे दिया गया था। बस यहीं से बसपा से उनका मोह भंग हो गया।

नहीं बनेगी यूपी में बसपा की सरकार

बशीरुद्दीन ने आज यहां बातचीत में कहा कि सूबे में अब बसपा की सरकार नहीं बनेगी क्योंकि इस पार्टी में अब कुछ बचा नही है। उनका कहना है कि बसपा अपने मिशन से भटक चुकी है और बेईमानों को ही टिकट दिया जाता है। ईमानदार लोगों की कोई कद्र नहीं है।

बेटे की पगार से चलता है घर

पूर्व मंत्री का कहना है कि उनका एक बेटा सउदीअरब में नौकरी करता है जिसकी पगार से उनके घर का खर्चा चलता है। एक और बेटा है जो प्राइवेट कम्पनी में नौकरी करता है। इसके अलावा खेतीबाड़ी से पूरे परिवार का जीवन हंसी खुशी से गुजर रहा है।

ईमानदारी के कारण आज भी है पैदल

कभी लालबत्ती से बशीरुद्दीन सड़कों पर चलते थे मगर आज वह अपने घर से पैदल ही निकल पड़ते है। उनके पास कोई वाहन नही है। गरीबों की मदद के लिये जब उन्हें हमीरपुर मुख्यालय में अफसरों से मिलना होता है तो वह हाथ में डंडा लेकर बस में बैठ जाते है।

ईमानदार सीएम से ही सुधरेगा सिस्टम

बशीरुद्दीन का कहना है कि रामनरेश यादव व चै.चरण सिंह सीएम थे जिनकी ईमानदारी से प्रदेश के अधिकारी भी ईमानदार थे। उनका कहना है कि जब सीएम ईमानदार होता है तो अफसर ईमानदारी से काम करते है। यह सिस्टम भी ईमानदार सीएम से ही सुधरेगा।

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