कोलारस और मुगावली में सिंधिया की रणनीति को मात देने शिवराज साध रहे जातीय समीकरण

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@संदीप पौराणिक-
भोपाल. (आईएएनएस)|  मध्यप्रदेश के दो विधानसभा क्षेत्रों में होने वाले उपचुनाव शिवराज सिंह सरकार की साख का सवाल बन गए हैं. यहाँ जीत के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आनन-फानन में मंत्रिमंडल का विस्तार कर पिछड़े वर्ग से नाता रखने वाले तीन विधायकों को मंत्री बनाकर जातीय समीकरण साधे हैं,  ताकि कोलारस और मुंगावली में भगवा परचम फहराया जा सके.

गुजरात के विधानसभा चुनाव और फिर अभी हाल में राजस्थान के उपचुनाव के नतीजों ने भाजपा की चिंता बढ़ा दी है। भाजपा इन दोनों ही राज्यों के ग्रामीण इलाकों में काफी पिछड़ी है। यह बात मध्यप्रदेश की भाजपा और मुख्यमंत्री चौहान पर असर कर रही है। यही कारण है कि उन्होंने कांग्रेस के पिछड़े वर्ग के नेता के.पी. यादव को भाजपा में लाया और अब जिन तीन विधायकों- नारायण सिंह कुशवाहा, जालम सिंह पटेल और बालकृष्ण पाटीदार को मंत्री बनाया है, वे भी पिछड़े वर्ग से ही आते हैं।

राजनीतिक विलेश्षक साजी थॉमस का कहना है, “देश के विभिन्न हिस्सों से आ रहे चुनाव नतीजे भाजपा का उत्साहवर्धन करने वाले तो नहीं कहे जा सकते। इसके चलते मुख्यमंत्री चौहान के लिए भी राज्य के दो उपचुनाव महत्वपूर्ण हो गए हैं। वे हर हाल में इन्हें जीतना चाहते हैं, ताकि पार्टी और हाईकमान को यह संदेश जाए कि चौहान का प्रभाव राज्य में कम नहीं हुआ है और वह पार्टी के भीतर के विरोधियों को भी चुप करा सकेंगे। यही कारण है कि पिछड़े वर्ग का ज्यादा से ज्यादा वोट पाने के लिए मंत्रिमंडल विस्तार में पिछड़ा वर्ग के विधायकों को स्थान दिया गया है।”

शिवपुरी के कोलारस और अशोकनगर के मुंगावली विधानसभा क्षेत्र के जातीय समीकरणों को जानने वालों का कहना है कि यहां कुर्मी, कुशवाहा सहित प्रजापति आदि बड़ी संख्या में हैं, इसी बात को ध्यान में रखकर यह मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया है। मुख्यमंत्री चौहान स्वयं जिस वर्ग किरार से आते हैं, उनके मतदाता भी हैं। इस तरह भाजपा और सरकार पिछड़ा कार्ड के जरिए ही ये दोनों चुनाव जीतने की कोशिश में है।

यहां बताना लाजिमी होगा कि ये दोनों विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के गुना संसदीय क्षेत्र में आते हैं। साथ ही यह सिंधिया राजघराने का प्रभाव वाला क्षेत्र है। दोनों विधानसभा क्षेत्रों से कांग्रेस विधायक रहे हैं। इस स्थिति में इन्हें छीनना भाजपा के लिए आसान नहीं है, यही कारण है कि सत्ता और संगठन हर तरह के दाव-पेंच अपना रही है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव का कहना है, “मुख्यमंत्री चौहान का असली चेहरा प्रदेश की जनता के सामने आ चुका है, अब तो उनकी विदाई की घड़ी है। इस सरकार ने किसान, गरीब और गांव की उपेक्षा की है, इसलिए जनता उन्हें सबक सिखाएगी। ये दोनों उपचुनाव जीतना भाजपा के लिए आसान नहीं है, इसलिए वह जातिवाद का सहारा ले रही है। इसका भाजपा उम्मीदवारों को कोई लाभ नहीं मिलने वाला है।”

उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि अगर ये तानों व्यक्ति मंत्री पद के काबिल थे, तो उन्हें पहले ही मंत्री बनाना चाहिए था। उन्हें महज कुछ माह के लिए मंत्री पद क्यों दिया गया?”

भाजपा की प्रदेश इकाई के मुख्य प्रवक्ता दीपक विजयवर्गीय ने सफाई दी कि मंत्रिमंडल का विस्तार बहुप्रतीक्षित था, विस्तार की चर्चाएं अरसे से चल रही थीं, उस समय कोई उपचुनाव तो था नहीं, यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है कि वह किसे मंत्री बनाए। इसे राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। प्रशासनिक स्थिति के मद्देनजर भी ऐसे फैसले लिए जाते हैं।”

राज्य में पिछले दिनों हुए अटेर, चित्रकूट विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव के अलावा नगरीय निकायों के चुनावों में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। इसको ध्यान में रखते हुए भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव से पहले होने जा रहा संभवत: अंतिम उपचुनाव किसी भी हालत में हारना नहीं चाहती।

 

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