शिवराज के पहुँचते ही कैसे टूट गई ओरछा के रामराजा की प्राचीन परंपरा, प्रशासन ने नहीं करने दिए प्रजा को दर्शन

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ओरछा. देश के इतिहास में पहली बार ओरछा स्थित रामराजा सरकार में कायम पौराणिक परंपरा को तोड़ दिया गया. रामराजा सरकार के पट प्रशासन ने प्रजा के लिए बंद कर दिए. यह तब हुआ जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ओरछा पहुंचे थे. जब तक शिवराज सिंह ओरछा में रहे जनता को मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया गया. इस पर लोगों ने सरकार और प्रशाशन की आलोचना की है. इसे बीजेपी का VVIP कल्चर बताया.कांग्रेस ने तो यहाँ तक कह दिया कि देश में ओरछा ही इकलौती जगह है जहां विराजे भगवान् राम को सरकार होने की मान्यता है. यहाँ पहुंचने पर PM या CM को पुलिस सलामी तक नहीं दी जाती है. लेकिन शिवराज सिंह ने इस परंपरा को तोड़ दिया है. उन्होंने रामराजा की नगरी में खुद को राजा की तरह पेश कर जनता को ही मंदिर जाने से रोके रखा. मामला बुधवार सुबह का है. सीएम को यहां चल रही मोरारी बापू की रामकथा में शामिल होना था। ओरछा के लोगों का कहना है कि ऐसा पहली बार हुआ है जब जनता को मंदिर में जाने से रोक दिया गया हो.

 

मोरारी बापू की रामकथा सुनने पहुंचे थे शिवराज ramraja-temple
बताते हैं कि  मुख्यमंत्री शिवराज चौहान सुबह करीब 10.15 बजे ओरछा पहुंचे और सीधे मोरारी बापू की रामकथा में शामिल होने चले गए। वहां सीएम को प्रशासन द्वारा जनता को मंदिर में जाने देने से रोकने की सूचना मिली। उन्होंने प्रशासन से कहा कि वह भक्तों को मंदिर में प्रवेश करने से न रोके. उन्होंने इसकी जाँच कराने की भी बात कही, लेकिन अभी तक कोई जाँच कमेटी गठित नहीं की गई है.

कथा सुनने के बाद CM ने भी किये दर्शन
कथा सुनने के बाद मुख्यमंत्री भी रामराजा सरकार के दरबार में पहुंचे और माथा टेक कर , पूजा-अर्चना की व प्रदेश की जनता की खुशहाली की कामना की।

कांग्रेस ने उठाये सवाल

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता के के मिश्रा ने कहा है कि मुख्यमंत्री खुद को प्रदेश का राजा मानते हैं इसीलिए उन्होंने ओरछा पहुँचते ही आम जानते को रामराजा सरकार के दर्शन से रुकवा दिया. राम के नाम पर राजनीति करने वाली बीजेपी के मुख्यमंत्री यहाँ यह  भी भूल गए कि ओरछा वह स्थान है जहां भगवान् राम को ही राजा माना जाता है. यहाँ प्रधानमंत्री तक को सलामी नहीं देने की परंपरा रही है. सलामी सिर्फ रामराजा सरकार को ही दी जा सकती है और इसके लिए सरकार के ही निर्देश हैं. शिवराज ने इस परंपरा को तोड़कर पौराणिक आस्था और परंपरा को तोडा है. उन्हें माफ़ी मांगनी चाहिए.

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