राजा को क्यों रास नहीं है रंक

राजा को क्यों रास नहीं है रंक

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file photo -ranjeet singh judev
अब बात ये कि राजा समथर ने प्रदीप जैन आदित्य पर निशाना क्यों साधा है।
 क्या जिस तर्ज पर प्रदीप जैन ने एक सामान्य परिवार से उठकर दो बार झांसी विधानसभा चुनाव जीतकर और उसके बाद लोकसभा चुनाव फतह कर दिल्ली तक की यात्रा कर ली, वह कई सीनियर नेताओं के लिए व्यक्तिगत कुंठा का कारण बन गया.
 गौरतलब यह भी है कि जिस झांसी सीट पर कांग्रेस जैसी पार्टी के आधार स्तम्भ रहे नारायण दत्त तिवारी तक जमानत जब्त करा चुके हैं वहां प्रदीप जैन ने न सिर्फ कांग्रेस के मुश्किल काल में हार का बनवास खत्म कर एक के बाद एक चुनाव जीते, बल्कि दिल्ली सरकार के मंत्रिमंडल का भी हिस्सा रहे.
 जबकि प्रदीप जैन पर सवाल उठने वाले महाराज समथर भले ही इंद्रा राजीव लहर में सात विधानसभा चुनाव जीतने का दावा करते हो वह उसके बाद लगातार चार चुनाव हारते हुए खुद राजनीतिक हाशिए पर चले गए.
 लोग अब उनके ताज़ा बयान को राजा और रंक के भेद से तौल रहे हैं.
पहली बार झांसी में आकर किसी सीनियर कांग्रेसी नेता ने प्रदीप जैन आदित्य के राजनीतिक अस्तित्व और भविष्य की लेकर जुबानी तीर चलाया है….
 वो भी प्रेस बुलाकर…
 यह प्रियंका गांधी की अगुआई में यूपी में खोया वजूद पाने को छटपटाती कांग्रेस के लिए गुटबाजी के नए अंदाज़ का आगाज़ साबित हो सकता है.
ब्यूरो रिपोर्ट बुंदेलखंड टीवी ..

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