गले में मार्कशीटों की माला पहनकर नामांकन करने पहुँचीं यह प्रत्याशी, बोलीं-सवर्ण और गरीबों के लिए क्यों नहीं हैं सरकारी नीतियाँ

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@Ajay-

झाँसी. नगर निगम चुनाव के लिए नामांकन करने एक प्रत्याशी एसी भी पहुंचीं जिसने विकास के साथ सवर्णों के साथ आरक्षण के नाम पर हो रहे भेदभाव को भी मुद्दा बनाया. भारतीय प्रजाशक्ति पार्टी से प्रत्याशी बनाईं गईं नारी शक्ति सेना की संरक्षिका नीरजा रावत अपने गले में अंकसूचियों की माला पहनकर नामांकन करने पहुँचीं. उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए बेरोजगारी का दर्द भी बयां किया.

प्रजाशक्ति पार्टी लम्बे समय से आरक्षण के खिलाफ अभियान चला रही है. प्रजाशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज रावत ने अपनी पत्नी नीरजा रावत को झाँसी महापौर पद के लिए मैदान में उतारा है. नीरजा रावत बुंदेलखंड महाविद्यालय स्थित नामांकन स्थल पर अपने समर्थकों के साथ पहुँचीं. उनके गले में डिग्रियों की माला आकर्षण का केंद्र रही.

विकास से बड़ी समस्या है बेरोजगारी : नीरजा 

नीरजा रावत ने कहा ‘में झाँसी को वास्तविक स्मार्ट सिटी बनाने के लिए चुनाव लड़ रही हूँ. क्योंकि विकास एक तरफ़ा नहीं होता है. शहर में सड़क,बिजली के साथ लोगों को रोजगार दिलाना भी विकास का हिस्सा है. हमारी पार्टी प्रतिभा के आधार पर रोजगार चाहती है. इसमें आरक्षण नहीं होना चाहिए. यदि 100 अंक वाला बेरोजगार घूमे और 50 अंक वाले को सरकार नौकरी दे तो ये भेदभाव दमनकारी है. सवर्ण प्रतिभाओं का इससे मनोबल टूट गया है. इसी के विरोध में हमने डिग्रियों की माला पहनकर असल तौर पर सबका साथ सबका विकास का सन्देश दिया है. ‘

देश की नीतियों में सामान्य जाति के लिए जगह नहीं – 

  • उन्होंने कहा, ‘देश की नीतियों में सामान्य और गरीब के लिए कोई जगह नहीं है. नौकरी के लिए सामान्य दर दर की ठोकरें खा रहे हें, योग्य बेरोजगार आत्महत्या भी नहीं कर सकता. म्हणत करके जो डिग्रियां हासिल की हें उनका उपयोग सिर्फ अलमारी में रखने के लिए हो रहा है.

खाली डिब्बे लेकर पार्षदों ने भरा पर्चा

नीरजा के साथ जो पार्षद प्रत्याशी पहुंचे उनके हाथ में खाली डिब्बे थे. उनका कहना था की बीजेपी का मेयर झाँसी में जनता ने बनाया था, लेकिन पानी तक लोगों को नहीं मिला. इसके विरोध में हम डिब्बे लेकर नामांकन करने आये हैं.

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