उरई जालौन सीट पर भाजपा बसपा में कांटे के मुकाबले के आसार

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legislature-brahmpuri-elections-nationalist-government-hindustan-february_fe41b268-f5f3-11e6-800c-c780129a337aउरई(जालौन)। जनपद में तीन विधान सभा के लिए 23 फरवरी को होने जा रहे मतदान में जब कुछ घंटे ही शेष रह गए है ऐसे में प्रत्याशियों के द्वारा की जा रही मानमनोबल से तीनों विधान सभा क्षेत्रों में अब वोटों के धु्रवीकरण का खेल तेजी पकड़ चुका है और आज रात के दौरान आम मतदाता निर्णायक स्थिति में पहंुच जाएगा कि उसे कहां वोट करना है। फिर भी अब तक जनपद में जो चुनावी माहौल बना है उसमें उरई जालौन सुरक्षित सीट पर भाजपा बसपा के बीच सीधा मुकाबला हो सकता है ।
उरई विधान सभा क्षेत्र की चुनावी स्थिति जो दिखाई दे रही उसके अनुसार इस सीट पर भाजपा के गौरीशंकर एवं बहुजन समाज पार्टी के विजय चैधरी के बीच कांटे का संघर्ष देखने को मिल सकता है। पिछले चुनाव में भाजपा के गौरीशंकर को 45 हजार वोट मिले थे जबकि बहुजन समाज पार्टी के सतेन्द्रपाल सिंह को करीब 61 हजार वोट हासिल हुए थे इस बार भाजपा के गौरीशंकर वर्मा ही मैदान में है। जबकि बसपा से विजय चैधरी चुनाव लड़ रहे है जो कि उरई से खुद पालिका अध्यक्ष रह चुके है और वर्तमान में उनकी माताजी गिरजा चैधरी पालिकाध्यक्ष है। पिछले चुनाव में समाजवादी पार्टी से दयाशंकर वर्मा 67 हजार वोटपाकर विधायक बने थे ऐसे में स्वाभाविक है कि दयाशंकर वर्माको कमसे कम कोरी वोट का इस बार भाजपा को फायदा हो सकता है। हालांकि अपर कास्ट एवं पिछड़े वर्ग में गौरीशंकर वर्मा अपनी पैठ बनाने में सफल प्रतीत होते नही दिख रहे है ऐसे में दयाशंकर वर्मा के वोट विभाजन का लाभ सपा एवं बसपा दोेनों को मिल सकता है। जहां मुस्लिम वोट पूरी तरह से बसपा के खेमे में जाता दिखाई दे रहा है वहीं पर अपर कास्ट के वोट के विभाजन को रोकने में भाजपा कामयाब नही दिख रही है। समाजवादी पार्टी के ज्यादातर नेता सपा के महेन्द्र कठेरिया के टिकट को पहले ही सपा का भाजपा को वाकओवर करार दे चुके है। चंूकि पिछले चुनाव में कांग्रेस से डा. रामाधीन अहिरवार एवं जदयू से विजय चैधरी एवं महानदल से चैधरी शंभूदयाल चुनाव लड़े थे जिसके चलते बडे़ पैमाने पर चैधरी समाज के वोटों का विभाजन हुआ था इस बार चैधरी समाज से अकेले विजय चैधरी वह भी बसपा से चुनाव लड़ रहे ऐसे में चैधरी समाज का एकमुश्त वोट बसपा के खातें में जाने से कोई नही रोक पाएगा। चैधरी समाज के अलावा मुस्लिम वोट की एकजुटता भी बसपा को फायदे में ले जा रही है। अब इस सीट अपर कास्ट एवं पिछड़े वर्ग का वोट निर्णायक स्थिति में माना जा रहा है। यह भी तय है कि समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी जितना अधिक वोट हासिल करेगे उतना ही फायदा एवं घाटा बसपा एवं भाजपा को होगा। हालांकि अपर कास्ट खासकर ब्राहम्ण एवं व्यापारी वर्ग में बसपा के विजय चैधरी की गहरी पैठ मानी जाती है ऐसे में अगर कुछ अपर कास्ट एवं पिछड़े वर्ग का वोेट विजय चैधरी को मिल जाता है तो बसपा काफी मजबूत स्थिति में पहुंच जाएगी। यह भी तय है कि अगर जिला मुख्यालय उरई से विजय चैधरी कांटे का संघर्ष बनाकर चलते है तो फिर ग्रामीण क्षेत्र में उन्हें आगे बढ़ने में कोई नही रोक पाएगा जिससे इस सीट पर भाजपा बसपा के बीच कांटे का मुकाबला होने के आसार अधिक माने जा रहे है। अगर पिछले चुनाव में बसपा के सतेन्द्र पाल को मिले 61 हजार वोटों के अलावा डा. रामाधीन अहिरवार एवं शंभूदयाल चैधरी तथा विजय चैधरी के वोटों को एकजुट कर दिया जाए तो फिर विजय चैधरी का आंकड़ा एक लाख के ऊपर पहुंच जाता है। तब मुस्लिम समाज की एकजुटता विजय चैधरी को भाजपा के गौरीशंकर के मुकाबले काफी आगे कर देगी। क्योंकि भाजपा प्रत्याशी गौरीशंकर वर्मा को अपने ही लोगों से जबरदस्त भितरघात का सामना करना पड़ सकता है। जबकि ऐसी स्थिति बसपा में कहीं नही दिखाई दे रही है। कुछ भी हो उरई जालौन सीट पर भाजपा एवं बसपा के बीच ही मुकाबला ठहरता नजर आ रहा है।

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