बुंदेलखंड की इन जगहों पर आज भी जारी है मैला ढोने की प्रथा, कुरीति मिटाने फेसबुक ने बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी को दिए 2 हजार डॉलर

0

झाँसी. बुन्देलखंड विश्वविद्यालय के पर्यटन एवं होटल प्रबंधन विभाग के अध्यक्ष एवं बुविवि के प्रवक्ता डां. सुनील काबिया ने बुंदेलखंड में मैला ढोने की प्रथा चलने का दावा किया है. उन्होंने इसे शर्मनाक बताते हुए प्रशाशन के दावों की पोल खोल दी है.फेसबुक के सपोर्ट से इस प्रथा को जड़ से समाप्त करने के लिए बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी की टीम कई जगहों पर पहुंचकर इस प्रथा के उन्मूलन का प्रयास कराने का कार्य करेगी. इसके लिए शासन और प्रशासन का सहयोग लिया जायेगा.
डां. सुनील काबिया ने बताया कि विभाग के छात्रों ने शहर के सीपरी बाजार , नगरा, प्रेमनगर, ईसाई टोला, तालपुरा, लक्ष्मीगेट बाहर, तलैया, रानीमहल, नानक गंज गरिया गांव, खिरक पट्टी, भट्टा गांव आदि क्षेत्रों में अभी भी झड़ाऊ शौचालय हैं । एक तरफ झांसी को स्मार्ट सिटी घोषित कराने का प्रयास किया जा रहा है, वहीं यह अमानवीय कुप्रथा अभी भी चल रही है। हालंकि उन्होंने इसे अभी प्रारम्भिक सर्वे होने की बात कही है। विस्तृत रिपार्ट जून माह में दी आयेगी। इसकी एक प्रति जिला प्रशासन, नगर निगम, समाज कल्याण विभाग को भी दी जायेगी।
पत्रकार वार्ता के दौरान वह नहीं बता सके कि झड़ाऊ शौचालय किस व्यक्ति के मकान में है । डां सुनील कुमार काबिया ने बताया कि उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय के छात्रों की दस सदस्यीय टीम कार्य कर रही है। सभी छात्र आई टी एच एम के हैं । उन्होंने बताया इस कार्य के लिये फेसबुक ने 2000 डालर अर्थात 1 लाख 29  हजार रूपये की आॢथक सहायता मिली है। इससे कैमरा व अन्य संसाधन जुटाये गये हैं। पत्रकार वार्ता के दौरान डां. अर्पणा राज एवं सर्वे टीम के छात्र मौजूद रहे।

 

LEAVE A REPLY