कोरोना संक्रमण रोकने में विफल हुए नोएडा के डीएम से गुस्से में...

कोरोना संक्रमण रोकने में विफल हुए नोएडा के डीएम से गुस्से में बोले योगी, बकवास बंद !

नोएडा में बढ़ रहे कोरोना मरीजों के मामलों की पड़ताल करने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को नोएडा पहुंच गए। उन्होंने लॉक डाउन के बावजूद वहां कोरोना फैलने की वजहों की पड़ताल की तो अधिकारियों के जवाब पर वह गुस्से में नजर आए। उन्होंने जिलाधिकारी बीएन सिंह से जवाब मांगा, लेकिन डीएम संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इस पर उन्होंने बैठक में मौजूद अफसरों पर नाराजगी जताई। मुख्यमंत्री ने अफसरों से यहां तक कह डाला कि अपनी जिम्मेदारी दूसरों पर डालना बंद करिए।

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CM yogi in noida

नोएडा। कोरोना वायरस के संक्रमण का फैलाव उत्तर प्रदेश में बढऩे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने अधीनस्थों से बेहद खफा हैं। अफसर भी सरकार के निर्णयों और आदेशों की अवहेलना में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। नोएडा में बढ़ रहे कोरोना मरीजों के मामलों की पड़ताल करने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को नोएडा पहुंच गए। उन्होंने लॉक डाउन के बावजूद वहां कोरोना फैलने की वजहों की पड़ताल की तो अधिकारियों के जवाब पर वह गुस्से में नजर आए। उन्होंने जिलाधिकारी बीएन सिंह से जवाब मांगा, लेकिन डीएम संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इस पर उन्होंने बैठक में मौजूद अफसरों पर नाराजगी जताई। मुख्यमंत्री ने अफसरों से यहां तक कह डाला कि अपनी जिम्मेदारी दूसरों पर डालना बंद करिए। इस बीच सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए नोएडा के डीएम को हटा दिया है और उनकी जगह सुहास एल वाई को गौतमबुद्ध नगर का नया डीएम बनाया गया है। इससे पूर्व सीएम द्वारा नाराजगी जताए जाने के बाद नोएडा के डीएम बीएन सिंह ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर तीन महीने की छुट्टी मांगी थी। उन्होंने मीटिंग में यह भी कहा कि मैं 18-18 घंटे काम कर रहा हूं। मैं नोएडा में नहीं रहना चाहता। जानकारी है कि सीएम ने जिलाधिकारी के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं।

मुख्यमंत्री की बैठक के दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी और जिलाधिकारी सीएम योगी के सवालों पर कोई ठोस जवाब नहीं दे पाए। दोनों अफसर अपनी जिम्मेदारी दूसरों पर टालते दिखे जिस पर सीएम नाराज हो गए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सीधे बोल दिया कि वह इन इंतजामों से खुश नहीं है। सही मायने में अच्छे ढंग से इंजाम नहीं किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि दो महीने पहले अलर्ट जारी किया गया था, तब से क्या किया गया। दरअसल मुख्यमंत्री नोएडा में ब्रिटिश नागरिक से फैले संक्रमण पर खिन्न थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सही ढंग से सूचनाएं नहीं दी जा सकीं। सीएमओ और डीएम ने स्पष्टीकरण दिया और तैयारियां बताईं लेकिन सीएम ने उहें खारिज कर दिया।

मुख्यमंत्री इस बात से नाराज थे कि ब्रिटेन से आए नागरिक को लेकर सतर्कता नहीं बरती गई। उसके संपर्क में आने वाले लोगों को सही तरह से जानकारी नहीं पहुंचाई गई। जिसकी वजह से यह परेशानी उत्पन्न हुई है। इस बारे में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ अनुराग भार्गव ने स्पष्टीकरण भी दिया। डीएम ने इस मसले पर जवाब देने के लिए हाथ ख?ा किया तो प्रमुख सचिव ने उन्हें रोक दिया।

उत्तर प्रदेश में अब तक कोरोना वायरस के जितने मामले सामने आए हैं, उनमें सबसे ज्यादा गौतमबुद्ध नगर में हैं। इससे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बेहद चिंतित है। नोएडा की सीज फायर कंपनी में ब्रिटेन से ऑडिटर आया था। उस व्यक्ति के संपर्क में आने के कारण अब तक कंपनी से जुड़े अधिकारी, कर्मचारी और उनके परिवार के 19 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। इनमें नोएडा और ग्रेटर नोएडा, दोनों शहरों में रहने वाले लोग शामिल हैं। गौतमबुद्ध नगर में अभी तक 38 मामले सामने आए हैं। इनमें से 21 मामले अकेले ब्रिटिश नागरिक से जुड़े हैं।अफसरों ने बताया कि आगे संपर्क में आने वाले लोगों को पहचान लिया गया है। कुछ लोगों में लक्षण दिखने पर उन्हें तत्काल उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। इस संक्रमण के लिए जिम्मेदार कंपनी के मैनेजमेंट पर एफआईआर दर्ज करवाई गई है।

डीएम ने यह दिया था तर्क, बोले थे 18 घंटे करते हैं काम

मुख्यमंत्री की ओर से इंतजामों पर नाराजगी जाहिर करने पर डीएम बीएन सिंह ने कहा कि वह रोजाना 18 घंटे काम कर रहे हैं। इसके बावजूद अगर हालात संभल नहीं रहे हैं तो वह गौतमबुद्ध नगर में पोस्ट नहीं रहना चाहेंगे। इस पर मुख्यमंत्री ने उन्हें फटकार लगाई।

महामारी के दौरान नहीं मिल सकता उपार्जित अवकाश

इस मामले में शासन के अधिकारी फिलहाल कुछ कहने से इनकार कर रहे हैं। नियुक्ति विभाग के अधिकारियों ने कहा कि प्रदेश में महामारी अधिनियम लागू है ऐसी आपात स्थिति में किसी अधिकारी को उपार्जित अवकाश नहीं स्वीकृत किया जा सकता है।

यह लिखा डीएम ने पत्र

डीएम ने मुख्य सचिव को संबोधित पत्र में जो लिखा वह इस प्रकार है।
कृपया अवगत कराना है कि व्यक्तिगत कारणों से मैं जिलाधिकारी गौतमबुद्धनगर के पद पर नहीं रहना चाहता हूं। अत: जिलाधिकारी के पदीय दायित्वों से मुक्त करते हुए तीन माह का उपार्जित अवकाश स्वीकृत करने का कष्ट करें। क्योंकि वर्तमान में कोविड-19 को ध्यान में रखते हुए किसी भी प्रकार की प्रशासनिक शिथिलता न हो, इस हेतु आवश्यक है कि जिलाधिकारी गौतमबुद्धनगर के पद पर किसी अन्य अधिकारी की तैनाती करने का कष्ट करें।

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