बेटों की खातिर फिर सियासी अखाड़े में उतरेंगीं जालौन की दो राजनैतिक शख्सियतें

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@Rakesh Dwivedi

जालौन. जालौन के दो सियासी दिग्गज एक बार फिर आमने सामने होंगे. पूर्व विधायक विनोद चतुर्वेदी और वरिष्ठ नेता सुरेश निरंजन इस बार अपने-अपने बेटों की खातिर एक दुसरे के खिलाफ सियासी बिसात बिछायेंगे. दोनों ही नेताओं के सामने आने से नगर पालिका का चुनाव रोचक हो गया है.

यही तो राजनीति है । यदि कोई संभावना है तो हर प्रकार का रिस्क भी उठाया जा सकता है । कांग्रेस नेता विनोद चतुर्वेदी ने इसीलिए ज्योतिषीय गणित को भुला रिस्क उठाने को तैयार हो गए हैं । उरई नगर पालिका सीट से अब उनके बेटे आशीष चतुर्वेदी उर्फ आशु कांग्रेस उम्मीदवार की हैशियत से चुनाव लड़ेंगे । उनके खिलाफ पहले से ही अखाड़े में मौजूद वरिष्ठ नेता सुरेश निरंजन भइयाजी के पुत्र ज्ञानेन्द्र सिंह उर्फ ननकू भइया से मुक़ाबला होगा । इस लड़ाई को तब और रोचकता मिलेगी जब भाजपा और बसपा के उम्मीदवार भी अंतिम निर्णय के साथ मैदान में होंगे । बसपा से टिकट बदलवाने का प्रयास अभी तक जारी है । सूत्रों के अनुसार मिथिलेश त्रिवेदी अभी भी एक नेता के साथ लखनऊ में डेरा डाले हैं । वह तमाम शर्तों को पूरा करना चाहते हैं । भाजपा रात तक टिकट घोषित नही कर सकी। दो प्रमुख संतों से आशीर्वाद प्राप्त कर मनीष अग्रवाल काजू भी मजबूत दावेदार के रूप में प्रकट हुए हैं । काजू और बहुगुणा के बीच प्रत्याशी बनने को लेकर जबर्दस्त मुक़ाबला दिख रहा है । किसी अप्रत्याशित निर्णय तक की अब संभावना उत्पन्न हो गई है । वैसे पहली पसंद सभी के लिए विनम्र अनिल बहुगुणा ही दिखाई दिये । यहाँ से दिलीप दुबे और जालौन से रामेन्द्र सिंह बनाजी भी मुक़ाबले में बने हुए हैं ।
राजनीति की बिसात में अब नई पीढ़ी दांव चलेगी । पहले दोनों के पिता के बीच दो बार उरई विधान सभा से ही जोरदार मुक़ाबला हुआ । विनोद चतुर्वेदी और सुरेश निरंजन भइया जी 1993 में चुनाव लड़े थे ,जिसमें दोनों लोगों को पराजय स्वीकार करनी पड़ी थी । भइया जी 1996 में भी लड़े और हारे । इस बार चतुर्वेदी उनके सामने नही थे । 2007 में फिर दोनों लोग अखाड़े में आए । इस बार त्रिकोणात्मक मुक़ाबला हुआ । जीत तो विनोद चतुर्वेदी की हुई किन्तु शिवसेना प्रत्याशी चन्द्र प्रकाश गुप्ता ‘नागराज ‘ के पक्ष में खुद के वोट चले जाने पर भइया जी को पराजय का सामना करना पड़ा । 1993 के चुनाव में भी भइया जी को अच्छे मत मिले थे । अब दोनों के राजनीतिक उत्तराधिकारी मैदान में हैं । दोनों का पहला चुनाव है । दोनों के पिता राजनीति के मंजे हुए खिलाड़ी हैं । शरद यादव की खास पहल पर उम्मीदवार बने ज्ञानेन्द्र इस अखाड़े में काफी दम- खाम दिखानी होगी । अभी उनका चुनाव भइया जी की छवि पर ही होगा । उधर आशीष के पिता विनोद चतुर्वेदी तेवरों वाले लीडर माने जाते हैं । संकोची भइया जी के मुक़ाबले चतुर्वेदी राजनीतिक दांव -पेंचों के माहिर खिलाड़ी माने जाते है । आशीष का चुनाव भी विनोद चतुर्वेदी को ही अपनी विशेष पारंगताओं के बल पर लड़ना होगा । मैदान में तो दोनों बेटे होंगे पर लड़ पिता रहे होंगे ।
उधर भाजपा में पल -पल दावेदारों के नाम आगे – पीछे हो रहे हैं । ऊर्विजा दीक्षित के अलावा दिलीप दुबे तथा जालौन में रामेन्द्र सिंह बना जी भी दौड़ में बने हुए हैं ।

 

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