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पूर्व मंत्री रविंद्र शुक्ला ने फिर उठाई मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न देने की मांग

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मेजर ध्यानचंद: फिर उठी हॉकी के जादूगर को भारत रत्न देने की मांग

झांसी। दद्दा ध्यानचंद्र। ये ऐसा नाम है जिसने बुंदेलखंड के झांसी से निकलकर पूरी दुनिया में भारत का मस्तक ऊंचा कर दिया। ध्यानचंद्र ने भारतीय हॉकी को विश्व विजेता बनाकर हिटलर को भी झुका दिया था। पूरे देश को उन पर नाज है। बुंदेलखंड के लिए तो वे एक अवतार जैसे हैं। और इसी लिए उनको भारत रत्न दिए जाने को लेकर लगातार मांग उठ रही है। पूर्व मंत्री रविंद्र शुक्ल ने एक बार फिर 29 अगस्त खेल दिवस पर दद्दा ध्यानचंद्र को भारत रत्न दिए जाने की मांग की .

कहते हैं कि जब दद्दा हॉकी की स्टिक लेकर मैदान पर होते थे तो गेंद उनकी हॉकी से चिपक जाया करती थी। गेंद गोल होने के बाद ही हटती थी। खेल जानकारों को शक था कि ध्यानचंद की हॉकी स्टिक में होई चुम्बकीय आकर्षण है और लिए उनकी हॉकी को कई बार बदला गया। लेकिन हॉकी के इस जादूगर ने साधारण हॉकी से भी एक के बाद एक गोल मारकर भारत को ओलम्पिक से लेकर कई हॉकी मुकाबलो में विजय दिलाई। उनकी इस हॉकी की प्रतिभा के मुरीद जर्मनी के चान्सलर हिटलर भी थे।

उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेता रविन्द्र शुक्ला कहते हैं कि ध्यानचन्द झाँसी ही नहीं बल्कि पूरे देश दुनिया के लिए महान खिलाड़ी हैं। उनके जैसा कोई अब तक नहीं हुआ। इसलिए उनके नाम पर भारत रत्न जारी कर गौरवान्वित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस महान हॉकी के जादूगर के जन्मदिवस 29 अगस्त को देशभर में खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है। खेलों का नाम आते ही खासकर हॉकी का नाम जेहन में आते ही सबसे पहले दद्दा ध्यानचन्द की याद आती है। लाखों चाहने वाले खेलप्रेमियों और खिलाडिय़ों की कई वर्षों से सरकार से माँग व अपेक्षा है कि दद्दा ध्यानचंद को भारत रत्न से नवाजा जाए। इसके लिए बुंदेलखंड के झाँसी ही नही बल्कि देश के लाखो हाकी प्रेमी व दद्दा के चाहने वाले एक लंबे समय से सरकार से भारतरत्न देने की मांग कर रहे हंै।

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