घटते रोजगारों के बीच बुंदेलखंड में मेधावियों को तराश रही है ‘मेधा’

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शिक्षा प्रणाली व रोजगार पर बात करते हुए ‘मेधा’ ने की एक शुरूआत
रोजगार के नये अवसरों की प्राप्ति हेतु मेधा ने आयोजित की खुली चर्चा

झांसी। सामाजिक संस्था मेधा ने एजुकेशन टू एंप्लॉयमेंट मुद्दे पर झांसी के एक होटल में एक खुली बहस का आयोजन किया। मेधा, जो कि एक गैर-लाभकारी संस्था है, जिसका उद्देश्य एक ऐसा भारत बनाने का है जहां पर युवाओं के लिए रोजगार के समान अवसर उपलब्ध हों। उन्हें काम उनकी प्रतिभा के आधार पर मिले और इस बीच उनकी जाति, लिंग और सामाजिक हैसियत बाधा ना बने।

संवाद को दो भागों में बांटा गया। पहले भाग में दर्शकों को मेधा के बारे में और उसकी अध्ययन प्रणाली के बारे में बताया गया। दूसरे भाग में एजुकेशन टू एंप्लॉयमेंट मुद्दे पर पैनल डिस्कशन किया गया। पैनल डिस्कशन में दो महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात की गई। पहला यह कि क्या हमारी वर्तमान शिक्षा प्रणाली छात्रों को उनकी कॉलेज लाइफ के बाद आने वाली कठिनाइयों और चुनौतियों के लिए तैयार कर रहा है? और दूसरी यह कि जिस तरह से प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर में नौकरियां लगातार कम हो रही हैं ऐसी अवस्था में क्या हम युवाओं को कार्यक्षेत्र में आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार कर रहे हैं?

इस चर्चा में वर्तमान शिक्षा प्रणाली, रोजगार पर लोगों ने अपनी बात रखी। इसके साथ ही वर्तमान में मौजूद रोजगार के साधनो को बढ़ाने व शिक्षा को किस प्रकार स्किल भी जोड़ी जाए, इस पर चर्चा हुई।
कार्यक्रम में पधारे बाबूलाल तिवारी ने कहा कि करके सीखना एक सबसे महत्वपूर्ण है, इस सिद्धांत का उल्लेख महात्मा गांधी ने भी किया था और यदि हमें बेरोजगारी को कम करना है तो वर्तमान में हमारे विद्यार्थियों को भी रोजगार देने वाली शिक्षा की ओर अपना ध्यान केन्द्रित करना होगा।

भेल झांसी में एक्जेक्यूटिव डायरेक्टर के पद पर कार्यरत पंकज जैन ने कहा कि उद्योग उन तकनीकी उम्मीदवारों की तलाश कर रहा है जो अपना काम जानते हैं, हमें अपने युवाओं को कठिन कौशल पर प्रशिक्षित करने की भी आवश्यकता है, उन्होंने यह भी कहा कि बुन्देलखण्ड जैसे क्षेत्र में खाद्य प्रसंस्करण की बहुत संभावनायें है और रोजगार के दृष्टिकोण से उसपर ध्यान देना चाहियें। लोको शेड प्रतिनिधि ने कहा कि शिक्षा सामग्री और प्रासंगिक उद्योग कौशल एक दूसरे से अलग हैं और उन्हें पकडऩे की जरूरत है।

चर्चा में शामिल बुन्देलखण्ड डेवलपमेंट फाउंडेशन (बी.डी.एफ.) के प्रमुख व समाजसेवी अमित त्रिपाठी ने अपने अनुभवों के आधार पर शिक्षा में उन स्किल को भी शामिल करने की भी बात कहीं जिससे वर्तमान परिपेक्ष्य में विद्यार्थियों को जॉब के साथ साथ एक बेहतर जीवन मिल सकें। तो वही चर्चा में शामिल सी.ए. राजेश पाठक ने बेरोजगारी को देश की प्रमुख समस्या मानते हुए इसके समाधान हेतु मेधा जैसी अन्य संस्थाओं को भी आगे आने का आह्वान किया।

यह एक शिक्षा पर रोजगार के लिए खुली चर्चा थी, जिसे शिक्षाविदों, नियोक्ताओं ने आकर सफल बनाया. इस चर्चा के माध्यम से हमे विभिन्न दृष्टिकोणों से एक निष्कर्ष की प्राप्ति तक पहुचने में मद्द मिली। साथ ही यह भी समझ आया कि समस्या कहां है और इसे किस प्रकार हल किया जा सकता है।
कार्यक्रम को मेधा की वाइस प्रेसीडेंट स्वाति गोयल ने संचालित कर सफल बनाया। इसके साथ ही मेधा की ओर से आयोजनकर्ता झांसी एरिया मैनेजर रोहित श्रीवास व एस.आर.एम. आकांक्षा पाण्डेय मौजूद रही। कार्यक्रम में बाबूलाल तिवारी, एन.सी.एस. से देवेश त्रिपाठी, भेल से पंकज जैन, सी.ए. राजेश पाठक, समाजसेवी अमित त्रिपाठी, वीरांगना महिला डिग्री कॉलेज से डॉ. अंजू, चाइल्ड लाइन से अमरदीप बमोनिया, तरुणा, श्रृष्टि जैन, कार्तिके मौजूद रहे।


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