सुसाइड केस : प्रदर्शन कर जूनियर डॉक्टर्स-स्टूडेंट्स बोले- हमारी जाति डॉक्टर, धर्म मरीजों की सेवा, नहीं होता भेदभाव

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मेडिकल कॉलेज में प्रदर्शन करते स्टूडेंट, जूनियर डॉक्टर्स

झाँसी : दलित स्टूडेंट सुसाइड के मामले में महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के स्टूडेंट्स ने प्रदर्शन किया. स्टूडेंट्स का कहना था कि डॉ. अश्विनी कुमार की मौत को जातिवाद का मुद्दा बनाया जा रहा है, जबकि मेडिकल कॉलेज में ऐसा नहीं है. घटना को बेवजह राजनैतिक रंग दिया जा रहा है. जूनियर डॉक्टर्स ने कहा कि उनकी जाति डॉक्टर होना है और धर्म मरीजों की सेवा करना. इसके अलावा मेडिकल कॉलेज में जातिवाद भावना से कोई काम नहीं किया जाता है.

मेडिकल कॉलेज में कुछ दिन पहले बनारस के रहने वाले दलित स्टूडेंट डॉ. अश्विनी कुमार ने हॉस्टल में पंखे से लटक सुसाइड कर लिया था. बताया गया था कि स्टूडेंट पढ़ाई को लेकर परेशान था. वह फर्स्ट ईयर में तीन सब्जेक्ट में फेल हो चुका था. जिस दिन सुसाइड किया उस दिन सुबह उसका एग्जाम था, वह इसी बात से परेशान था. उसने सुसाइड कर लिया.

घटना में नया मोड़ तब आया जब बनारस से उसका भाई मनोज कुमार झाँसी पहुंचा. मनोज ने आरोप लगाया कि अश्विनी को जाति को लेकर परेशान किया जा रहा था, इसी कारण उसने सुसाइड कर लिया. मामले में फार्मा के एचओडी सहित के खिलाफ मामला भी दर्ज कर लिया. इसके बाद कई प्रदर्शन इस घटना को लेकर किये गये.

जूनियर डॉक्टर्स असोसिएशन के पदाधिकारी व स्टूडेंट्स आज मेडिकल कॉलेज में इस मुद्दे को लेकर उतरे. असोसिएशन के सेक्रेटरी विनोद कुमार सोनकर ने कहा कि मेडिकल कॉलेज में ऐसा नहीं होता है. वह खुद दलित हैं. भेदभाव जैसी कोई घटना कभी नहीं हुई.

डॉ. संतोष पाण्डेय ने कहा कि मेडिकल कॉलेज के कई विभागाध्यक्ष दलित वर्ग से हैं. सीएमएस जैसी पोस्ट पर भी इसी वर्ग से ताल्लुक रखने वाले व्यक्ति हैं. 35 प्रतिशत टीचर्स भी इसी समुदाय से हैं, लेकिन कभी कोई शिकायत नहीं आयी. हम सब मिलजुलकर रहते हैं. घटना को जबरन कुछ लोग राजनैतिक रंग दे रहे हैं.

उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होने दिया जाएगा. जातिगत आधार पर मतभेद की बात गलत है. जिन अध्यापकों और लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ है, वो वापस लिए जाएँ.

 

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