जालौन: यहां एक ही गाँव में मिले पाँच नये कुष्ठ रोगी, ऐसे करें लक्षणों की पहचान

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@राम नरेश यादव

जालौन. यहां शुक्रवार को जालौन जनपद के डकोर ब्लॉक के जगदेपुर गाँव में जिला कुष्ठ अधिकारी के निर्देशानुसार कुष्ठ रोगियों को खोजने का निरीक्षण किया गया जिसके दौरान वहाँ पर 5 संदिग्ध मरीजों की पहचान हुई। यहाँ तक की एक परिवार में दो लोग संदिग्ध पाये गए।

39 जिलों में चलाई जा रही है योजना

प्रदेश में राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के तहत घर-घर जाकर कुष्ठ रोगी ढूंडे जा रहे हैं। इस कार्यक्रम के अंतर्गत 39 जिलों को लिया गया हैं। इसमें झाँसी मण्डल के झाँसी और ललितपुर जिलों को लिया गया, जबकि जालौन को इसमें शामिल नहीं किया गया हैं।

जिला कुष्ठ अधिकारी डॉ॰ पवन कुमार का कहना हैं, हालांकि निरीक्षण के लिए कोई बजट आवंटन नहीं हुआ है फिर भी कुष्ठ रोगियों को तो खोज ही सकते हैं।

जिला कुष्ठ परामर्शदाता डॉ॰ मदन मोहन ने बताया, वर्तमान में 134 कुष्ठ रोगी दवा ले रहे हैं इसके अलावा अप्रैल से अभी तक 2 लोग ऐसे मिले हैं जो कुष्ठ की वजह से विकलांग हो गए हैं। उनमें से एक मरीज डकोर ब्लॉक का भी हैं। जगदेपुर गाँव में निरीक्षण के बारें में उनका कहना हैं कि इस गाँव में पहले बहुत कुष्ठ रोगी हुआ करते थे यहाँ तक कि वर्तमान में भी दो मरीज हैं जो दवा ले रहे हैं। उन्होने बताया कि कुष्ठ एक ऐसा रोग हैं जो यदि किसी इंसान को हो जाए तो उसका प्रभाव पाँच साल के बाद दिखाई देगा। ऐसे में बहुत जरूरी हो जाता हैं कि पहले ही निरीक्षण से संदिग्ध मरीज की पहचान कर ली जाए।

डॉ॰ मदन का कहना हैं, जालौन में कुष्ठ रोगियों की संख्या में कमी आई हैं लेकिन यहाँ कुष्ठ रोगी होने की संभावना अभी हैं जिसके चलते समय दर समय कुष्ठ रोग विभाग के द्वारा गाँवों और शहरों में निरीक्षण होता रहता हैं।

जालौन: यहां एक ही गाँव में मिले पाँच नये कुष्ठ रोगी, ऐसे करें लक्षणों की पहचान

 

इन लक्षणों से करें पहचान

  • सामान्य त्वचा की तुलना में त्वचा पर थोड़े लाल, गहरे या हल्के स्पॉट/धब्बे हो|
  • यह स्पॉट/धब्बे सुन्न हो सकते है तथा यहां तक कि यह त्वचा के प्रभावित हिस्से पर होने वाले बालों के झड़ने की समस्या को भी पैदा कर सकते है।
  • हाथ, उंगली या पैर की अंगुली  का सुन्न होना|
  • आँखों की पलकों के झपकने में कमी|

वर्जनाए कैसी कैसी ?

कुष्ठ रोग के साथ अनेक गलत धारणाएं जुड़ी हुई हैं। कुष्ठ रोगी को समाज में हेय दृष्टि से देखा जाता है। यहां तक कि –

  • लोग इसे पूर्व जन्म के बुरे कर्मो का फल मानते है|
  • कुष्ठ रोग के विषय में यह भी गलत धारणा फैली हुई है कि यह रोग वंशानुगत होता है और छूत से फैलता है, जबकिकुष्ठ रोग सभी संचारी रोग जैसे क्षय रोग आदि में से सबसे कम संक्रमणीय है।
  • लोगो का मानना है की यह खान पान की गलत आदतों जैसे सुखी मछली खाने से एवं अशुद रक्त के कारण भी हो सकता है|

इस रोग की हकीकत ये है

किसी भी प्रकार का सफेद दाग कुष्ठ रोग की निशानी नहीं है। कुष्ठ दो प्रकार का होता है, एक हाथ-पैरों का घाव होने के बाद गलना, दूसरे शरीर पर भूरे रंग के सुन्न दाग होना। यह रोग माइक्रो बैक्टिरियम लेप्री बैक्टीरिया के संक्रमण से होता है। परन्तु यह बहुत ही कमजोर वायरस है और मल्टी ड्रग थैरेपी की दो-चार खुराकों से ही इस पर काबू पाया जा सकता है। अगर रोग काफी पुराना भी हो तो भी छह महीने के उपचार के बाद रोग पर काबू पाया जा सकता है। मूलतः यह रोग टीबी के वर्ग का ही है और टीबी के बैक्टिरिया की तरह ही फैलता है। लंबे समय तक रोगी के साथ रहने से ही यह बैक्टीरिया संक्रमण करता है।

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