चित्रकूट के सिपाही सूर्यकांत की सड़क छाप हरकत, पत्रकार पर हमला, विडियो...

चित्रकूट के सिपाही सूर्यकांत की सड़क छाप हरकत, पत्रकार पर हमला, विडियो वायरल

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चित्रकूट: पत्रकार का मोबाईल छीनने वाला पुलिसवाला
@बुंदेलखंड खबर 
चित्रकूट. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भले ही पुलिस को जनता से सही बर्ताव और अपनी छवि सुधारने के निर्देश दे रखे हों, लेकिन पुलिस है कि अपनी आदतों से मानती ही नहीं. ऐसी ही एक घटना चित्रकूट में हुई. यहाँ एक पुलिस वाले ने सड़क छाप हरकत करते हुए सरेआम पत्रकार पर ही हमला कर दिया. इसका विडियो भी वायरल हो गया, जिसमे सिपाही सूर्यकांत पत्रकार जीतेन्द्र मिश्रा को धमका रहा है. इस घटना की जानकारी पुलिस के आला अधिकारियों को दे दी गई है, लेकिन इसके बाद अभी तक कोई एक्शन नहीं लिया गया. पत्रकारों में इस घटना को लेकर रोष है. पत्रकार संगठनों का कहना है की अभद्र पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.

जनपद के रामघाट पर कवरेज करने जा रहे एक प्रतिष्ठित न्यूज मैगजीन/वेबसाइट पेट्रोल न्यूज के जिला संवाददाता जितेंद्र मिश्रा के साथ सीतापुर चौकी में तैनात सिपाही सूर्यकान्त ने उस समय अपने दुर्व्यवहार का परिचय दिया जब मार्ग पर(रामघाट से पहले) नो इंट्री का बैरियर लगा होने के बावजूद मध्य प्रदेश के मझगंवा के भाजपा नेता की कार निकल रही थी, इसी दौरान एक ट्रक भी उसी रास्ते से निकल रहा था. पत्रकार जितेंद्र मिश्रा के मुताबिक इस दौरान कार और ट्रक की आपस में टक्कर हो गई जिसपर दोनों वाहनों के चालकों के बीच कहासुनी होने लगी.
अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए जब पत्रकार जितेंद्र मिश्रा इस घटना का कवरेज करने के लिए अपना मोबाईल इस्तेमाल कर रहे थे की उसी दौरान सिपाही सूर्यकान्त ने ताव दिखाते हुए पत्रकार का मोबाईल छीन लिया और विरोध करने पर उनके साथ अभद्रता करते हुए अपशब्दों का प्रयोग किया. घटना की जानकारी जब पत्रकार ने एसपी मनोज कुमार झा को दी तो एसपी ने फौरन चौकी इंचार्ज सीतापुर को पत्रकार का मोबाईल वापस दिलाने का निर्देश दिया जिसपर चौकी इंचार्ज ने मोबाईल वापस दिलाया.
सवाल यह उठता है कि सिपाही को पत्रकार के कवरेज से क्या दिक्कत थी, क्या नो इंट्री में वाहन प्रवेश होने में सिपाही की कोई भूमिका थी जो कवरेज देखकर उसका पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया और क्या पुलिस को किसी के साथ इस तरह का दुर्व्यवहार करने की आजादी है. अक्सर अधिकारी मातहतों को वर्दी की छवि सुधारने का पाठ पढ़ाते हैं लेकिन उनके मातहत वर्दीधारी अपने ही रौब में पुलिस की छवि को इसी तरह सार्वजनिक स्थानों पर बिना बात के बट्टा लगाते रहते हैं. इसीलिए आज तज खाकी की जो छवि बन्नी चाहिए उससे वह महरूम ही है.

 

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