झांसी पुलिस का जनता पर सितम, भाजपा विधायक ने घेर लिया थाना

झांसी पुलिस ने फरियादी जनता पर सितम ढाया है. जिन लोगों ने मुहल्ले के एक मकान में देह व्यापार जैसी संदिग्ध गतिविधियों की शिकायत पुलिस से की, पुलिस ने उनको ही पीट दिया। डड़ियापुरा के लोगों को घरों से निकाल कर पीटा. भाजपा विधायक इस पर पुलिस के खिलाफ खड़े हो गए हैं। इस घटना से UP की पुलिस व्यवस्था की पोल खुल गई है।

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साक्षी राय 


झांसी। अपनी नंगी देह पर पुलिसिया सितम के सबूत दिखाते ये झांसी के लोग हैं। इनके जिस्म पर ये गहरे घाव तस्दीक करते हैं वर्दी की हैवानियत की। यूपी की बेलगाम पुलिस व्यवस्था की। जो टूट पड़ती है जनता के ऊपर यूं ही अपने निजी स्वार्थ को लेकर। भूल जाती है फर्ज जनता को न्याय दिलाने की अपनी उस शपथ का। उस अशोक चिन्ह का जो सत्यमेव जयते के मैसेज के साथ उसकी वर्दी पर चस्पा है। और झांसी की पुलिस भूल गई है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों को। उनके रामराज कायम करने के उन आदेशों को, जो जनता की सेवा और न्याय देने के लिए जारी किए गए हैं। और शायद इसीलिए सत्ता के ही एक विधायक को थाने का घेराव करने जनता के साथ पहुंचना पड़ गया।

ये झांसी के सदर विधायक हैं, जो झांसी की पुलिस पर उनके क्षेत्र की जनता उनके घरों में घुसकर पीटे जाने पर गुस्से में हैं।

अब आइये जानते हैं कि झांसी की पुलिस ने पूरे के पूरे एक मुहल्ले के लोगों को क्यों पीट दिया। दरअसल, झाँसी कोतवाली इलाके के एक मकान में कुछ संदिग्ध गतिविधियों की शिकायत मोहल्ले के लोगों ने पुलिस से की थी। इस शिकायत के बाद कोतवाली पुलिस बौखला गई। झांसी नगर के विधायक रवि शर्मा का आरोप है कि पुलिस ने घरों में घुसकर पूरे मुहोल्ले की महिलाओं व पुरुषों को बुरी तरह से पीटा है। उनके घरों के दरवाजे भी तोड़ दिए। पुलिसिया सितम से पीडि़त लोगों ने उनके घर पर आकर न्याय को धरना दे दिया। इस पर वह कोतवाली आकर इस कृत्य के खिलाफ खड़े हुए हैं।

इस घटना ने एक बार फिर बेलगाम पुलिस का चेहरा योगी सरकार के सामने ला दिया है। विपक्ष के आरोपों पर जो मुख्यमंत्री कानून का राज होने का दावा कर रहे थे। लेकिन, अब उन्हीं के विधायक पुलिस उत्पीडऩ के खिलाफ थाने में पहुंचे हैं।  झांसी विधायक द्वारा थाने का घेराव करने की जानकारी मिलते ही पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप देखा गया। अपर पुलिस अधीक्षक राहुल मिठास ने विधायक को कार्रवाई का आश्वासन देकर शांत करा दिया। अब देखना ये है कि जिन पुलिस कर्मियों ने पूरे मुहल्ले के लोगों को घर में घुसकर पीटा है। उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई का पैमाना कानूनी होता है या कागजी।

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