‘द हिन्दू’ को दिए interview में हताश दिखे अखिलेश, परिवार में झगड़े को बताया SP-Cong गठबंधन की मजबूरी

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लखनऊ.   चौथे चरण के मतदान के ठीक पहले UP के मुख्यमंत्री ने एसा बयान दिया है, जिसमें उनकी कांग्रेस से गठबंधन को लेकर  हताशा साफ़ झलकती दिखी. अंग्रेजी के प्रमुख अखवार ‘ द हिन्दू ‘ को दिए इन्टरव्यू में अखिलेश ने कहा कि अगर परिवार में झगड़ा न हुआ होता तो सपा-कांग्रेस के अलायंस की जरूरत नहीं पड़ती। अलायंस एक तय समय और परिस्थ‍ितियों पर हुआ। अगर ये चीजें (पारिवारिक विवाद) सामने नहीं आतीं और कुछ पॉलिटिकल डिसीजन न लिए जाते तो ये अलायंस नहीं होता।

 
 अखिलेश ने ‘द हिंदू’ को दिए इंटरव्यू में कहा- “कई बार आप सिर्फ दोस्ती करते हैं। कुछ लोग कहते हैं कि एक उम्र के बाद दोस्ती, जरूरतों के हिसाब से होती है। ये अच्छा है कि हमारा कांग्रेस के साथ अलायंस हुआ है। अब तक हमारी राहुल के साथ केमिस्ट्री काफी अच्छी रही है। हम दोनों एक ही उम्र के हैं, एक जैसा सोचते हैं। वो देश और प्रदेश के बारे में सोचते हैं। हम भी यही चाहते हैं।”
# आपको अलायंस की जरूरत कब महसूस हुई?
समाजवादी ऐसा महसूस करते हैं कि जब कांग्रेस काफी कमजोर हो गई तो उसने सपा को अपने सबसे करीब पाया। मुझे लगता है कि कांग्रेस कमजोर थी और समाजवादियों से दोस्ती भी सही है। कई बार समय और परिस्थ‍ितियां तय करती हैं कि आप किसके साथ जुड़ने जा रहे हैं। सपा और कांग्रेस के बीच पहले कई बार विवाद हो चुका है, लेकिन ये भी याद रखना चाहिए कि सभी समाजवादी नेता कांग्रेस के प्रोडक्ट हैं।”
– “उस समय कांग्रेस ही सिर्फ अपोजिशन पार्टी थी और अगर एक रूलिंग पार्टी थी, तो वो उस पार्टी के खिलाफ ही चुनाव लड़ेंगे। अब टाइम चेंज हो गया है। हमें पॉलिटिकल फॉर्मेशन की जरूरत है, जो देश को बीजेपी जैसी सांप्रदायिक ताकतों से बचा सके। कोई ऐसा होना चाहिए जो पीएम मोदी और अमित शाह जैसे नेताओं का जवाब दे सके।”
# क्या ऐसा है कि कांगेस से अलायंस होने में कुछ देरी हो गई?
अगर आप पहले अलायंस कर लेते तो पार्टी वर्कर्स को साथ लेकर चलना और आसान हो जाता। हमारे कई डिसीजन ऐन मौकों पर लिए गए। हमारे पास अलायंस के लिए भी कम समय बचा। शुरुआत में हमारे परिवार में कुछ इश्यूज थे (शिवपाल यादव के साथ हुए विवाद पर इशारा करते हुए)। इस पर काफी ज्यादा समय बर्बाद हो गया।
# अगर पारिवारिक झगड़ा न होता तो ये अलायंस पहले हो गया होता?
तब भी ऐसा न होता। मैंने शुरू में ही कहा कि अलायंस एक तय समय और परिस्थ‍ितियों पर हुआ। अगर ये चीजें (पारिवारिक विवाद) सामने नहीं आतीं और कुछ पॉलिटिकल डिसीजन न लिए जाते तो ये अलायंस नहीं होता।”
– “लेकिन समय और परिस्थ‍ितियां ऐसी थीं कि ये अलायंस जरूरी था, ताकि लोगों को ये मैसेज जाए कि एक प्रोग्रेसिव गवर्नमेंट की प्रदेश में वापसी होगी। इस डिसीजन का अच्छा रिजल्ट ही मिलेगा।
# 2019 में भी सपा का कांग्रेस से अलायंस होगा?
कोई भी आदमी या पॉलिटिकल पार्टी पहले खुद का इंटरेस्ट देखती है। अभी हम यूपी को ही देख रहे हैं। 2019 के बारे में कहना अभी जल्दबाजी होगी। इस चुनाव के बाद ही आगे की स्ट्रैटजी तय करेंगे कि हम साथ रहेंगे या नहीं।”
#आप पूरे झगड़े में एक विजेता के रूप में सामने आए। आपके पास पार्टी का कंट्रोल है और आप ही सपा का एजेंडा भी सेट कर रहे हैं। आपको कैसा लगता है ये जिम्मेदारी पाकर?
पार्टी का प्रेसिडेंट बनने के बाद से मैंने चुनाव के अलावा कोई दूसरा विचार सामने नहीं रखा है। हमारे पास मैनिफेस्टो है और इसमें शहरों के साथ-साथ गांवों को भी बराबर तरजीह दी गई है।”
– हम शायद पहली ऐसी पार्टी हैं जो पर्यावरण, जंगलों और ईको-टूरिज्म पर बात कर रहे हैं। हम ऐसी पार्टी हैं जो शहरों की ट्रैफिक समस्याओं को सुलझाने पर बात कर रहे हैं।”
-हमने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे का निर्माण कराया। अगर हमें मौका मिला तो मैं 340 किमी लंबे लखनऊ से बलिया तक के एक्सप्रेस-वे का निर्माण 30 महीने में करवाऊंगा। ये एक्सप्रेस-वे प्रदेश और देश की अर्थव्यवस्था में काफी मददगार होगा।”
# बिजली के मामले में पीएम ने दीवली-ईद पर कमेंट किया?
-उनका डाटा गलत था। हमने रमजान से ज्यादा दिवाली में 2 हजार मेगावाट अधिक बिजली सप्लाई की। लाइट का फेस्ट‍िवल होने के नाते मैंने प्रदेश के हर जिला हेडक्वार्टर में 24 घंटे बिजली दी।”

 

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