नहीं रहे ‘अटल’, प्रधानमंत्री बोले मैं निशब्द हूँ, अंतिम संस्कार शुक्रवार शाम...

नहीं रहे ‘अटल’, प्रधानमंत्री बोले मैं निशब्द हूँ, अंतिम संस्कार शुक्रवार शाम 4 बजे

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नई दिल्ली. आज़ादी की 72वीं सालगिरह का जश्न अगले दिन ही फीका पड़ गया. देश में तीन बार प्रधानमंत्री रहे भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी का गुरुवार शाम 5.05 बजे निधन हो गया। वे 93 वर्ष के थे। अटलजी के निधन पर 7 दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई। दिल्ली समेत मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, बिहार, झारखंड, पंजाब के सरकारी स्कूलों-कॉलेजों में छुट्टी का ऐलान किया गया। अटलजी दो महीने से एम्स में भर्ती थे, लेकिन पिछले 36 घंटों के दौरान उनकी सेहत बिगड़ती चली गई। उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था। इससे पहले वे 9 साल से बीमार थे।

अटलजी का पार्थिव शरीर कृष्ण मेनन मार्ग स्थित उनके आवास पर रातभर रखा जाएगा। सुबह 9 बजे पार्थिव देह भाजपा मुख्यालय ले जाई जाएगी। दोपहर 1 बजे अंतिम यात्रा शुरू होगी, जो राजघाट तक जाएगी। वहां महात्मा गांधी के स्मृति स्थल के नजदीक 4 बजे अटलजी का अंतिम संस्कार किया जाएगा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अटलजी की अस्थियां प्रदेश की सभी नदियों में प्रवाहित की जाएंगी। अमेरिका ने भी अटलजी के निधन पर दुख जाहिर किया। भारत में अमेरिका के दूतावास ने वक्तव्य जारी कर कहा- अटलजी ने भारत और यूएस के रिश्तों को मजबूत करने में अभूतपूर्व योगदान दिया। जिसके लिए उन्हें हमेशा याद रखा जाएगा।

मोदी बोले एक युग का अंत-  

श्रद्धांजलि में मोदी ने सात ट्वीट किए। उन्होंने कहा, ‘‘मैं नि:शब्द हूं, शून्य में हूं, लेकिन भावनाओं का ज्वार उमड़ रहा है। हम सभी के श्रद्धेय अटल जी हमारे बीच नहीं रहे। यह मेरे लिए निजी क्षति है। अपने जीवन का प्रत्येक पल उन्होंने राष्ट्र को समर्पित कर दिया था। उनका जाना, एक युग का अंत है। लेकिन वो हमें कहकर गए हैं- मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं, जिंदगी सिलसिला, आज कल की नहीं।

मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं, लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं?’’ मोदी ने अपने संदेश में कहा, “देश के भविष्य को दिशा देने वाले और हम सबके प्रिय अटलजी अब नहीं रहे। अटलजी का विराट व्यक्तित्व और उनके जाने का दुख दोनों ही शब्दों के दायरे से परे है। वे एक जननायक, प्रखर वक्ता, ओजस्वी कवि, पत्रकार, प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय व्यक्तित्व के धनी और सबसे बढ़कर मां भारती के सच्चे सपूत थे। उनके निधन से एक युग का अंत हो गया है। मेरे लिए अटलजी का जाना पितातुल्य संरक्षक का साया सिर से उठने जैसा है। उन्होंने मुझे संगठन और अनुशासन दोनों का महत्व समझाया।

वे जब भी मिलते थे, पिता की तरह खुश होकर आत्मीयता के साथ गले लगाते थे। उनका जाना ऐसी कमी है जो कभी भर नहीं पाएगी। अटलजी ने अपने कुशल नेतृत्व और अविरल संघर्ष से जनसंघ से लेकर भाजपा तक इन संगठनों को खड़ा किया। उन्होंने भाजपा की नीतियों और विचारों को देश में जन-जन तक पहुंचाने का काम किया। उनके कठिन परिश्रम और दृढ़ निश्चय का परिणाम है कि भाजपा की यात्रा यहां तक पहुंची। उनका जीवन, दर्शन, सादगी, वाणी और विचार देशवासियों को प्रेरणा देती रहेगी। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदना उनके परिवार और देशवासियों के साथ हैं। उनके चरणों में मैं श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।”

 भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा, “अटलजी के निधन के साथ ही राजनीति के आकाश का ध्रुव तारा नहीं रहा। अटलजी के जाने के साथ ही देश में एक अजातशत्रु राजनेता खोया है, साहित्य ने एक मूर्धन्य कवि को खोया। पत्रकारिता ने एक स्वभावगत पत्रकार को खोया। संसद ने 1957 से देश की आवाज जो बने हुए थे, उनको खोया। जनसंघ से संस्थापक सदस्य और भाजपा ने अपना पहला राष्ट्रीय अध्यक्ष खोया है। करोड़ों युवाओं ने अपनी प्रेरणा को खोया है।

ये नेता मिलने आए :

दो दिन में अटलजी का हालचाल जानने के लिए एम्स में प्रधानमंत्री के अलावा उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू, वाजपेयी के छह दशक तक साथी रहे पूर्व प्रधानमंत्री लालकृष्ण अाडवाणी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज, सुमित्रा महाजन, कल्याण सिंह वसुंधरा राजे, स्मृति ईरानी, सुरेश प्रभु, जेपी नड्डा, शिवराज सिंह चौहान, रामविलास पासवान, डॉ. हर्षवर्धन, जितेंद्र सिंह, अश्वनी कुमार चौबे, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पहुंचे थे।

इनपुट- भास्कर.com

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