दो दिन में दो लोगों को मौत की नींद सुला गया अवैध खनन, डीएम की कार्रवाई पर भी सवाल

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महोबा में अवैध खनन के खिलाफ अनशन पर बैठे लोग

@आशीष सागर
महोबा। महोबा के डीएम सहदेव अचानक अवैध खनन पर सख्त हो जाते हैं। इस बार वह अवैध खनन माफिया को चेताते नहीं, बल्कि उनको दिए गए घाटों पर सीधे निलंबन की कार्रवाई कर देते हैं। इस कार्रवाई में पांच रेत की खदानों की लीजों के निरस्तीकरण के साथ 1.14 करोड़ की पेनाल्टी भी थोप दी जाती है। इसके बाद हडक़म्प मचा, लेकिन इसी कौतुहल के बीच खनन की लूट पर अपना अधिपत्य कायम रखने के लिए एक गोली सीधे जेसीबी मशीन को ड्राइव कर रहे चालक के जिस्म को चीर देती है। अवैध खनन पर वर्चस्व को लेकर यह दो दिन में दूसरी हत्या है. इस हत्या के बाद एक बार फिर सवाल खड़े हो गए। यह घटना डीएम महोबा की कार्रवाई के फौरन बाद ही घट गई, इसलिए सवाल जिलाधिकारी की भूमिका पर भी उठने लगे हैं। प्रशासन पर ही कुछ खनन माफियाओं को संरक्षण दिए जाने जैसे आरोप भी आम हो रहे हैं।

यूपी बुंदेलखंड में खनन का मसला कोई उठना कोई नई बात नहीं है। वैध,अवैध की इस लूट में बारिश बन्दी के बाद भी बाँदा और महोबा में अवैध खनन किया जा रहा है। बरसात के समय बन्द खनन को बाधित अवधि कहते हैं। यूपी में एक जुलाई तो एमपी में 15 जून से नदियों में खनन बन्दी है। किसी भी पट्टेधारके को मशीन या मजदूर से खनन करने पर रोक लगी है। सितंबर के अंतिम सप्ताह में पुन: बालू खदान चालू होंगी। बावजूद इसके डंपिंग की आड़ में छुटभैये और सत्ता पक्ष के लोग अधिकारियों की सांठ -गांठ से अवैध खनन कर रहे हैं। चित्रकूट मंडल का जिला महोबा भले ही योगी सरकार में सूखा घोषित हो लेकिन छोटी नदियों मसलन धसान, चन्द्रावल आदि में बालू की निकासी जेसीबी, एलएनटी मशीनों से की जा रही है। बीते शनिवार को जिलाधिकारी महोबा सहदेव ने कार्यवाही करते हुए 5 खनिज के पट्टे निरस्त किये थे। 1.14 करोड़ का जुर्माना भी लगाया गया। लेकिन, इस कार्यवाही का बालू खनन के कारोबारियों पर तनिक भी भय नहीं दिखा। डीएम की इस फौरी सख्ती के 24 घण्टे भी नहीं हुए और महोबा में खनन माफियाओं ने एक जेसीबी चालक को रविवार रात बराना (पनवाड़ी) में गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। गोली लगने से जेसीबी चालक की मौत हो गई । इलाके में सनसनी है की डीएम के एक्शन का क्या मतलब है।

डीएम पर भी लगने लगे आरोप-
सूत्र ये भी कहते हैं शुक्रवार को अवैध खनन को लेकर एक को मौत के घाट उतार दिया गया था। इसके बाद डीएम सहदेव ने कार्रवाई की। एक अधिवक्ता तो यहां तक कहते हैं कि जो लोग बालू डम्प किये हुये थे उनका नुकसान हो रहा था । क्योंकि पनवाड़ी से माल बहुत कम में भर रहा था। 12000 रूपये में 1400 फुट बालू मिल रही थी। इससे डम्प बालू की कीमत बढ़ ही नही पा रहे थी। और इसी को लेकर प्रशासन पर पट्टा निरस्तीकरण का दबाव था। इसके बाद ही आनन-फानन में डीएम ने शनिवार को एक की मौत के बाद ये आंशिक कार्यवाही की है।

महोबा बना अवैध खनन की बड़ी मंडी-
बतलाते चलें कि महोबा का पनवाड़ी अवैध बालू व्यापार का नया ठिकाना बनकर उभरा है। इस सरकार से पहले महोबा में बालू इस तर्ज पर नहीं उठाई गई है। महोबा में पहाड़, बोल्डर, क्रेशर का रोजगार ही चलता रहा है। बुंदेलखंड किसान यूनियन के अध्यक्ष विमल शर्मा महोबा में अवैध खनन को लेकर अनशन पर हैं। उन्होंने तीसरे दिन भी अवैध बालू डम्प करने वालों पर कार्यवाही की मांग की है। बाँदा में भी बारिश बन्दी के बाद 9 खदाने बन्द है पर चोरी के धंधे में सेंधमारी बन्द होना कहाँ मुनासिब हो सकता है। अतर्रा,नरैनी, मध्यप्रदेश की सीमा से लगे पन्ना आदि में बेधडक़ बालू चोरी की जा रही है।

बालू का पेशा करने वाले एक छोटे ट्रैक्टर चालक ने बतलाया कि नरैनी थाने, तहसीलदार, कोतवाल, एसडीएम को प्रति ट्रक एक हजार रुपया जाता है। हमराही ट्रक को लोकेशन बतलाने का अलग से लेता है। गिरवा से बाँदा आउटर तक ट्रक निकासी वाले लडक़ों को 200 रुपया गाड़ी मिलता है। रात भर की जगहर के बाद हम लोगों की रोजी चलती है। बिना पुलिस को दिए अवैध बालू चल ही नहीं सकती। उधर बाँदा शहर में ई रिक्शा पिछले सात माह से अवैध बालू बिना रायल्टी के उठा रहे है ।

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