ऐसे हों हमारे नेता : 4 बार MLA, एक बार रहे मंत्री, सिर्फ 10 रुपये में करते हैं गरीबों का इलाज

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मरीज को देखते डॉ. अरविन्द जैन

ललितपुर : हमारा नेता कैसा हो, जैसे बहुचर्चित नारे का अगर आदर्श उत्तर पूछा जाए, तो जवाब डॉ. अरविन्द जैन का नाम बिना हिचक के लिया जा सकता है। चार बार विधायक, एक बार मंत्री रहे, इसके बाद भी वह नेताजी न होकर लोगों के ‘डॉक्टर साहब’ बने हुए हैं। एक ऐसा डॉक्टर जिसने कई दशक पहले 1 रुपये में इलाज करना शुरू किया। और इस महंगाई के दौर में भी सिर्फ 10 रुपये लेकर लोगों का इलाज करते हैं। उनके अस्पताल में आज भी लोगों की लाइन लगती है। ये वही नेता हैं जिन्होंने विधानसभा में हंगामे के बीच कलराज मिश्र को बचाने के लिए विपक्षियों पर हमला कर दिया था। इस घटना से वह पूरे देश में चर्चा में आ गये थे। डॉक्टर अरविन्द जैन कहते हैं कि सेवा करने वाला नेता ही जनता को चुनना चाहिए। पहले यही चलन था। अब चुनाव और चुने जाने के तरीके बदल गये हैं। कमीशनखोर लोगों को नेता नहीं चुनना चाहिए।

गाँव गौना के हैं रहने वाले, 1989 में पहली बार बने थे विधायक : ललितपुर के गाँव गौना में 1935 में अरविंद कुमार जैन का जन्म हुआ। पिता परचूनी की दुकान चलाते थे। आर्थिक तंगी के बीच पढाई के बाद वह समाजसेवा में आ गये। 1967 में उन्होंने पार्षद के लिए नामांकन किया, लेकिन पर्चा वापस ले लिया। वह पार्षद नहीं बनना चाहते थे। 1989 को पहली बार उन्हें बीजेपी ने टिकट दिया। पहली बार में ही इलेक्शन जीत गये। इसके बाद 1991, 1993, 1996 में चुनाव जीते। 1997 में कल्याण सिंह की सरकार में उन्हें स्वास्थ्य राज्यमंत्री बना दिया गया। इस तरह वह चार बार विधायक व एक बार मंत्री रहे।

वो पल जब नेचर के विपरीत दिखे थे : अरविंद जैन बताते हैं कि 1997 में भारतीय जनता पार्टी को विधानसभा में बहुमत सिद्ध करना था। विधानसभा में हंगामे हो रहा था। विधानसभा में अन्य दल हंगामा कर रहे थे। किसी ने हंगामे के बीच बीजेपी नेता कलराज मिश्र के सिर पर कुछ फेंक कर हमला किया। इसके बाद हम सब गुस्सा गये। अरविन्द जैन बताते हैं कि उन्होंने अपने बचाव में विपक्षियों पर हमला कर दिया। जो भी हाथ आया, फेंक कर मारा। इससे किसी को कोई शारीरिक नुकसान नहीं हुआ, लेकिन हंगामा थम गया। विपक्षियों पर हमलावर होते हुए की तस्वीर देश भर की मेन स्ट्रीम मीडिया ने प्रसारित और प्रकाशित की। वह बताते हैं कि उनका स्वभाव ऐसा नहीं है, लेकिन हालात ने बचाव में उन्हें ऐसा करने के लिए विवश कर दिया।

डॉक्टर से नेता बने, फिर भी लोगों के लिए डॉक्टर ही रहे : अरविन्द जैन ने बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी से एबीएमएस व संस्कृत विश्वविद्यालय बनारस से शात्राचार्य की डिग्री प्राप्त की। 1960 में उन्होंने ललितपुर शहर में सावकार चौराहे पर क्लीनिक खोला। डॉ. अरविंद जैन उस समय सिर्फ एक रुपये में लोगों का इलाज किया करते थे। 1960 से अब तक 56 वर्ष बीतने के बाद भी 81 वर्षीया डॉ. अरविंद जैन सबसे सस्ता इलाज करते हैं। बिना फीस के बस 10 रुपये की दवा देते हैं.

सादगी की मिसाल मानते हैं लोग : डॉ. अरविन्द जैन बताते हैं कि पैसा और भ्रष्टाचार के जरिये धनवान होना उनका लक्ष्य कभी नहीं था। वह लोगों की सेवा करना चाहते थे। उन्होंने अपने इलाके में कई ऐसे काम किये जिससे लोग उन्हें सच्चा समाजसेवी नेता मानते हैं। उन्होंने किसानों को सिंचाई के साधन उपलब्ध कराये। अस्पताल, विद्यालय, खुलवाये। सड़कें बनवायीं। वह बताते हैं कि अब चुनाव करोड़ों में होता है। उन्होंने अपने चारों चुनाव सिर्फ 2-2 लाख रुपये खर्च कर जीते। चार चुनाव उन्होंने सिर्फ 8 लाख रुपये खर्च कर जीते। यह पैसा भी पार्टी और उनके सहयोगियों ने खर्च किया था।

जाति-धर्म ने विकास रोक कर रखा है : bundelkhandkhabar.com से अरविन्द जैन कहते हैं कि जनता को सोचना चाहिए। जाति और धर्म ने उनका विकास रोक कर रखा है। वह और देश अभी की स्थिति से कहीं ज्यादा आगे बढ़ सकता है। इसके लिए जनता को जागरूक होना होगा।

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