मोखों लगतई हिन्दी प्यारी, हर भाषा से न्यारी..

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मऊरानीपुर (झाँसी) मधुपुरी साहित्यिक एवं सामाजिक परिषद की मासिक काव्य गोष्ठी हिन्दी दिवस के रुप में अजय कुमार पटैरिया के बाड़े में पाठकपुरा में आयोजित की गयी। जिसके मुख्य अतिथि अवध बिहारी सूरौठिया एवं अध्यक्षता मदन कान्त व्यास ने की।

इस मौके पर कवियें ने अपनी – अपनी कविताओं से समा बाँधा। जिस पर श्रोतागण मनमुग्ध होते हुये देखे गये। इस मौके पर डा. डी. आर. वर्मा ने कहा कि हिन्दी की है शान निराली, हिन्दी इमरत प्याली। प्रकाश चन्द्र निराला ने कहा कि हिन्द देश की जा हिन्दी है , हिन्दी से जा पहिचान है। प्यूष निराला ने कहा कि आज काल की मम्मी तो , गजब ढा रई। उमर हो गई 47 की 27 बता रई।
सुरेश चौधरी ने कहा कि मेरे मालिक ये तमन्ना है कि जब जान से जाँऊ।

ज्ञानप्रकाश यादव ने कहा कि बरसा के पानी ने बुबोई किसान की जमीन नैया। जयप्रकाश खरे ने कहा कि सत्तर करोड की अपनी भाषा , हिन्दी के व्यवहार से। बैजनाथ पाँचाल ने कहा कि हिन्दी है आत्मा राष्ट्र की, जननी का सम्मान है।
प्यारेलाल बेधडक लाल ने कहा कि हिन्दू, मुस्लिम , सिक्ख, ईसाई। सबई समाने हिन्दी में। महेन्द्र कुमार तिवारी ने कहा कि जिन्दगी मिलती है कुछ कर दिखाने की। सुल्तान खाँ ने कहा शाखों से फिर से मजबूत पत्ते निकल आयेगें। वृन्दावन लाल वर्मा ने कहा कि मोखे लगतई हिन्दी प्यारी, हर भाषा से न्यारी। हदय नाथ चौबे ने कहा कि हम हिन्दू हिन्द देश के वासी, हिन्दी को अपनाये।
डॉ. रामदयाल सोनी ने कहा कि सारे जहाँ से अच्छा यह देश लगे प्यारा। अजित तिवारी ने कहा कि हमें वर्ष भर करना होगा, निज विकास का यत्न। अवध बिहारी सूरौठिया ने कहा कि कैसा विरोध कौन देगा अवरोध इसे। रेवाशंकर पाठक ने कहा कि अपनी हिन्दी भाषा नीकी और लगे सब फीकी।
इस मौके पर अज्जू पटैरिया, सन्तोष पटैरिया, यश पटैरिया, रघुवीर सेन, मुन्नी लाल पाठक, दीपू अग्रवाल, लवी पाठक, आदि लोग उपस्थित रहे। गोष्ठी का संचालन हदय नाथ चौबे ने किया।

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