‘उम्मीद की रौशनी’ बना झाँसी का ये पुलिस वाला, जानिये क्यों हो रहा मशहूर

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गरीब बच्चों के साथ जितेन्द्र

झाँसी : झाँसी में एक पुलिस वाला लोगों की उम्मीद की रौशनी बन चुका है. यह पुलिस वाला कैसे लोगों के लिए जी रहा है इसकी बानगी देखिये. रात को 2 बज रहे थे. ठण्ड बहुत थी. सड़क के किनारे एक बुजुर्ग महिला बीमारी से कराह रही थी. इसकी सूचना कुछ युवाओं को मिली. मौके पर एम्बुलेंस लेकर गये. महिला को उठाकर अस्पताल पहुँचाया. ज़रूरत पड़ने पर उसे ब्लड भी डोनेट किया. जो भी सुनता है कि ये युवा कोई और नहीं बल्कि झाँसी के पुलिस विभाग में नौकरी करते हैं तो तारीफ किये बिना नहीं थकते.

झाँसी के पुलिस विभाग में जितेन्द्र यादव डीआईजी कार्यालय से सम्बद्ध हैं. डकोर के रहने वाले जितेन्द्र पांच साल से पुलिस में हैं. वह कहते हैं कि जब पुलिस में नहीं थे तब पुलिस के लिए कभी अच्छा नहीं सुनते थे. वह नजरिया बदलना चाहते हैं. वह हमेशा से गरीबों की मदद करना चाहते थे. इसी मकसद के साथ उन्होंने ‘उम्मीद रौशनी की’ नामक संस्था बनाई. बताते हैं कि पुलिस में रहते हुए संस्था बनाने से कोई दिक्कत न हो, इसलिए संस्था को अपने भाई के नाम कर दिया. वह एक तरह से संस्था को सपोर्ट करते हैं.

जितेन्द्र बताते हैं कि वह और उनके तीन साथी हैं. हरीश कुमार, वीर सिंह, रफीकउद्दीन हैं जो उनके पुलिस की नौकरी में होते हुए भी हमेशा उनके साथ होते हैं. अच्छे काम को ये लोग बांटते हैं. इसके साथ ही 30 से 40 अन्य युवाओं की टीम है जो उनसे जुड़ी है.

जितेन्द्र बताते हैं कि गरीबों की मदद के लिए वह अपनी सैलरी से हर माह एक-एक हज़ार रुपये जुटाते हैं. इसे संस्था के अकाउंट में जमा करते हैं. फेसबुक, ट्विटर, वाट्सएप पर ग्रुप बनाए हैं. इस माध्यम से कई लोगों ने उन्हें गरीबों के लिए आर्थिक मदद दी है.

इस तरह करते हैं मदद : ‘उम्मीद रौशनी की’ के बैनर तले ये युवा पुलिसकर्मी बहुत लोगों की दुआएं हासिल कर चुके हैं. कई बार सड़क किनारे बीमार हालत में गरीब पड़े रहते हैं. अगर ऐसे किसी मरीज की सूचना पुलिस कर्मियों को मिलती है तो तुरंत ही यह टीम पहुँचती है. कितनी भी बुरी हालत क्यों न हो, उसे उठाकर अस्पताल ले जाते हैं. टीम के सदस्य व उनके साथ नौकरी करने वाले रफ़ीक बताते हैं कि कुछ दिन पहले उन्हें एक बुजुर्ग बीमार महिला के पड़े होने की सूचना मिली. महिला के हाथ पाँव में बुरी तरह से गलाव था. लोग दूर भाग रहे थे. इसकी परवाह न कर उन्होंने महिला को उठाया और उसे अस्पताल पहुँचाया. सोमवार की रात ही एक ऐसे ही व्यक्ति को अस्पताल पहुँचाया. अस्पताल में उसकी मौत हो गयी. उसके अंतिम संस्कार के लिए रुपये दिए.

गरीब बच्चों के साथ मनाते हैं जन्मदिन, गरीबों का कराते हैं फ्री इलाज : पुलिस में ही जॉब करने वाले उनकी टीम के सदस्य वीर सिंह व हरीश बताते हैं कि वह चिकित्सा कैंप लगवाते हैं. इसमें गरीबों को फ्री में देखा जाता है. उन्हें दवाइयां दी जाती हैं. इसके साथ ही गरीब बच्चों को ज़रूरत की चीज़ें देते हैं. ठण्ड आ गयी हैं, इसलिए हाल ही में गर्म कपड़े दिए. खाना भी ले जाते हैं, ताकि कोई भूखा हो तो दे सकें. वह बताते हैं कि टीम के सदस्य अपना जन्मदिन गरीब बच्चों के साथ ही मनाते हैं. बच्चों के लिए खाने पीने के सामान व गिफ्ट ले जाते हैं.

जितेन्द्र बताते हैं कि वह डेढ़ साल से ये सब इसलिए कर रहे हैं ताकि समाज का पुलिस के प्रति नजरिया बदल सके. पब्लिक को लगे कि संवेदनाएं पुलिस विभाग में भी होती हैं. हमेशा गालियाँ देते सुना है, लेकिन पुलिस दुआओं की हक़दार भी है. अब वह कुछ गरीब बच्चों को पढाये जाने की योजना बना रहे हैं.

 

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