तालबेहट में भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में समीकरण, ब्राह्मण के साथ वैश्य,...

तालबेहट में भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में समीकरण, ब्राह्मण के साथ वैश्य, साहू व कोरी वोट से मिली मजबूती

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तालबेहट,ललितपुर। तालबेहट नगर पंचायत चुनाव में इस बार इस बार लड़ाई बेहद दिलचस्प है। यहां पहली बार भाजपा प्रत्याशी हरिश्चन्द्र रावत के पक्ष में माहौल बनता दिख रहा है तो वहीं, बीते दस सालों से चेयरमैन रहीं मुक्ता सोनी अपने ही झूठे वादों से विपक्षी उम्मीदवारों के निशाने पर हैं। विधानसभा चुनाव में तालबेहट नगर से भाजपा को बंपर वोटिंग हुई थी। उस समय चेयरमैन रहीं मुक्ता सोनी समाजवादी पार्टी के लिए वोट मांग रहीं थीं, लेकिन नगर के लोगों के मूड भाजपा के साथ रहा। यहां ब्राह्मण, वैश्य, साहू, कुशवाहा और कोरी वोटरों ने जातिगत सोच से ऊपर उठकर भाजपा को वोट किया था। यही आधार अब निर्दलीय प्रत्याशियों के लिए परेशानी का सबब बन गया है।
विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिले थे 6 हजार वोट
बीते विधानसभा चुनाव में तालबेट नगर पंचायत ही इकलौती ऐसी नगर पंचायत थी जहां पूरे जिले में बीजेपी को सर्वाधिक वोट मिले थे। तालबेहट में कुशवहा वोट महज डेढ़ सौ की संख्या में हैं। लेकिन यहां लोगों भाजपा प्रत्याशी रामरतन कुशवाहा को खुलकर वोट दिया। ब्राह्मण यहां हमेशा से ही भाजपा का वोट माना गया है। इसके साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कारण साहू समाज के लोग भी बीजेपी का पुख्ता वोट बैंक बन गए। वहीं हाल ही में महरौनी विधायक मंनू कोरी को मंत्री बनाए जाने के बाद कोरी समाज का भी पूरा समर्थन भाजपा के साथ आ गया। ललितपुर नगर पालिका का टिकट भी साहू समाज के प्रत्याशी के खाते में दे दिया गया। इन्हीं समीकरणों के चलते भाजपा प्रत्याशी हरिश्चन्द्र रावत के पक्ष में जातीय समीकरण बनने शुरू हो गए हैं।
हरिश्चन्द्र की निर्विवाद छवि भी गेम चेंजर
हरिश्चन्द्र रावत एक व्यापारी वर्ग से आते हैं। इसी को लेकर उनके नाम पर लोगों के बीच कुछ खास असहमति देखने को नहीं मिल रही। हरिश्चन्द्र पुराने भाजपाई माने जाते हैं। उनकी सत्ता और संगठन में मजबूत पकड़ होने पर लोगों को लगता है कि यह सरकार से पैसा लाकर विकास के सूत्रधार बन सकते हैं।
2019 का सेमीफायनल है यह चुनाव
भाजपा के लिए स्थानीय निकाय चुनाव आगामी लोकसभा चुनाव के लिए सेमीफायनल जैसा है। भाजपा को शहरी क्षेत्र में ही सर्वाधिक वोट मिलता रहा है। इसी को लेकर लोकसभा चुनाव के इसके नतीजे अहम हैं। आने वाले लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की साख दाव पर रहेगी।

 

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