अरबों की दौलत छोड़ जैन साध्वी बनेगी ये डॉ. लड़की, 12 साल बाद सन्यास के लिए राजी हुआ परिवार

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न्यूज़ @एजेंसी-

नई दिल्ली. धन दौलत के लिए लोग कितनी भी भागम -भाग क्यों न कर रहे हों, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो सांसारिक भौतिकवाद से ऊब चुके हैं. खबर राजस्थान से है, जहां एक लड़की जो गोल्ड मेडलिस्ट डाक्टर है. उसके पिता अरबपति कारोबारी हैं, लेकिन उसने जैन दीक्षा लेने का फैसला कर लिया है. 18 जुलाई को वह दीक्षा लेगी. 

जानकारी के मुताबिक राजस्थान के पाली जिले के अरबपति परिवार से ताल्लुक रखने वाली गोल्ड मेडलिस्ट डॉक्टर हिना हिंगड़ ने सांसारिक सुखों का त्याग करते हुए जैन दीक्षा लेने का फैसला लिया है. 28 वर्षीय हिना पेशे से फिजीशियन हैं और पिछले तीन साल से अस्पताल मे प्रैक्टिस कर रही हैं. ऐशो आराम की जिंदगी बसर करने वाली हिना पिछले 12 साल से अपने परिवार को जैन दीक्षा लेने के लिए राजी करने की कोशिश कर रही थीं. लिहाजा परिवार की स्वीकृति मिलने के बाद 18 जुलाई को अपने गुरु से दीक्षा ग्रहण करेंगी.

डॉक्टर हिना हिंगड़ का परिवार मूलत: राजस्थान के पाली जिले का रहने वाला है. लेकिन पिछले 5 वर्षों से मुंबई के बोरिवली इलाके में रहता है. पेशे से हिंगड़ परिवार का यार्न का बड़ा कारोबार है. इस अरबपति औद्योगिक परिवार से ताल्लुक रखने वाली डॉक्टर हिना हिंगड़ का कहना है कि अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने फैसला ले लिया था कि उन्हें सांसारिक सुखों का त्याग कर आध्यात्मिक संयम का रास्ता अपनाना है. लेकिन परिवार के अन्य सदस्यों को हिना के इस फैसले पर ऐतराज था. हिना कई सालों से परिवार को मनाने की कोशिश कर रही थीं जो अब जाकर कामयाब हुई है.

सूरत पहुँचीं हिना –

डॉक्टर हिना हिंगड़ 18 जुलाई को जैन दीक्षा लेने के लिए मुंबई से सूरत पहुंच चुकी हैं. हिना के साथ उनकी मां और छोटी बहनें भी आई हैं. उनके परिवार के लोगों का कहना है कि यह वक्त वह हिना के साथ गुजारना चाहेंगे, क्योंकि दीक्षा लेने के बाद हिना से मिलना आसान नहीं होगा.

पहले भी कई लोग ले चुके हैं दीक्षा-

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब किसी संभ्रांत परिवार का कोई सदस्य ऐशो आराम का त्याग कर एक संन्यासी का जीवन जीने का फैसला लिया है. इससे पहले गुजरात के एक बड़े हीरा कारोबारी के 7 वर्षीय बेटे भव्य साचवानी भी जैन भिक्षु बने थें. वहीं पिछले साल ही अहमदाबाद के 17 वर्षीय वर्शील शाह भी जैन भीक्षु बने थे. पढ़ाई लिखाई मे अव्वल वर्शील को इंटरमीडिएट की परिक्षा मे 99.9 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए थे. वर्शील के इस फैसले ने तब सभी को चौंका दिया था. जैन धर्म शांति और अहिंसा के रस्ते पर चलने की सीख देता है. युवा इससे खासे प्रभावित हो रहे हैं. 

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