ऐन मौके पर मात खा गए सिटिंग MLA दयाशंकर, टिकट काटकर कठेरिया को थमा दिया अखिलेश ने

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जालौन। समाजवादी पार्टी में प्रत्याशी के टिकट बदलने का खेल नामांकन के अंतिम दिन तक बंद नहीं हुआ है सोमवार को सपा के सदर विधायक दयाशंकर वर्मा  का टिकट पार्टी हाईकमान ने काट दिया है जबकि सपा के अधिकृत प्रत्याशी दयाशंकर वर्मा ने गठबंधन कांग्रेस के प्रत्याशी के साथ में विगत 4 फरवरी को अपना नामांकन भव्य जुलूस के माध्यम से कर चुके हैं। अचानक दयाशंकर वर्मा का टिकट काटकर सपा हाईकमान ने महेन्द्र कठेरिया को दे दिया है। कठेरिया पार्टी का अधिकृत पत्र लेकर ही सोमवार को नामंाकन के अंतिम दिन कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपने समर्थकों के साथ पर्चा दाखिल कर दिया।
उधर दयाशंकर वर्मा का टिकट कट जाने के बाद उनके समर्थकों में मायूसी देखी जा रही है जबकि महेन्द्र सिंह कठेरिया के समर्थकों में खुशी का माहौल देखा जा रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पार्टी हाईकमान द्वारा टिकट काटे जाने से नाराज सपा के सदर विधायक दयाशंकर वर्मा ने निर्दलीय के रुप में चुनाव लडऩे का मन बना लिया है फिर चाहे पार्टी उन्हें क्यों न निकाल दे। सपा हाईकमान ने पहले की सदर विधायक दयाशंकर वर्मा का टिकट काटकर उनके स्थान पर महेन्द्र सिंह कठेरिया को प्रत्याशी बनाया गया जिसके बाद सपा प्रत्याशी ने अपना कार्यालय खोलकर नामांकन पत्र दाखिल करने की तैयारियों के साथ ही क्षेत्र में अपने समर्थकों के साथ पहुंच कर अपने लिए वोट देने की अपील भी करने लगे थे टिकट बदलने से नाराज सदर विधायक दयाशंकर वर्मा ने अपने समर्थकों के साथ लखनऊ पहुंच कर डेरा डाल कर अपना पक्ष रखा, जिसमें वह सफल भी रहे। महेन्द्र कुमार कठेरिया का टिकट कटवाने के बाद उन्होंने 4 फरवरी को अपने समर्थकों व गठबंधन के कांग्रेस प्रत्याशी विनोद चतुर्वेदी के साथ भव्य नामांकन जुलूस निकाल कर नामांकन पत्र भी दाखिल कर दिया था। सोमवार को नामांकन पत्र दाखिल करने के अंतिम दिन दयाशंकर वर्मा का टिकट काटकर सपा हाईकमान ने दोबारा महेन्द्र कुमार कठेरिया को अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर दिया जिन्होंने अपने समर्थकों साथ कलेक्ट्रेट पहुंच कर नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है।
निर्दलीय लड़ सकते हैं चुनाव
उधर टिकट कटने से नाराज सपा के सदर विधायक दयाशंकर वर्मा ने निर्दलीय चुनाव लडने का मन बना लिया है इसके बाद अब सपा हाईकमान दयाशंकर वर्मा के खिलाफ क्या कार्यवाही करती है यह तो आने वाला समय ही बतायेगा या फिर दयाशंकर वर्मा हाईकमान के दबाव में अपना नामांकन पत्र आने वाले समय में वापस लेते हैं।

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