हमीरपुर गांव में मटकों से बना लिया वॉटर प्यूरिफायर, दूषित पानी से मिल गई निजात

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बुन्देलखण्ड खबर-

लखनऊ। बुंदेलखंड इलाके के हमीरपुर जिले एक गांव में लोगों ने देसी तकनीक से वाटर फिल्टर बनाया है. ये अनोखा वाटर प्यूरिफायर बेहद सस्ता है. लोगों द्वारा देसी तकनीक से बनाए ये देसी वॉटर प्यूरिफायर गांव के कई घरों में देखे जा सकते हैं. इस काम में बुंदेलखंड में काम करने वाली संस्था परमार्थ व पीडब्ल्यूसी ने लोगों की मदद की. और सस्ता प्यूरिफायर तैयार करा दिया.

इस तरह बना प्यूरिफायर
हमीरपुर जिले के सरीला ब्लॉक के गांव धरऊपुर के लोगों ने ये कर दिखाया है. विकासशील सोच रखने वाले के इस गांव के लोगों ने जल संरक्षण और जल संग्रह का पाठ पढ़ा और इसके बाद दो संस्थाओं की मदद से प्यूरिफायर तैयार कर लिया. गांव के लोगों ने बताया कि इसके लिए सबसे पहले तीन मटकों की जरूरत पड़ती है.matka -2

दो मटकों में की तली में छेद किया. इन्हें एक मटके के ऊपर रख दिया. सबसे नीचे वाले मटके में टोंटी लगाई. ऊपर के मटकों में साफ कपड़ा, साफ कोयला और कुछ ईंट के टुकड़े डाले. फिर इसमें ऊपर से पानी भर दिया. ये पानी कपड़ा, कोयला, ईंट से होकर गुजरता है तो यह छन जाता है. गांव के लोगों ने बताया कि सबसे नीचे लगे घड़े में लगी टोंटी से पानी निकालते हैं.

सिर्फ 200 से 300 रुपए होते हैं खर्च
गांव के लोग बताते हैं कि अक्सर हैंडपंप से गंदा पानी निकलता है. दूसरे श्रोत भी गंदा पानी देते हैं. ये गंदा पानी पीने के लिए इस्तेमाल करने पर बीमारियां फैलती हैं. इसलिए ये तरीका उन्हें बीमारियों से बचा रहा है. इस प्यूरिफायर को बनाने के लिए 200 से 300 रुपए खर्च होते हैं.

परमार्थ संस्था के सचिव संजय सिंह व पीडब्ल्यूसी के वाइस प्रेसिडेंट जयवीर सिंह, निदेशक अनिल सिंह बताते हैं कि गांव के लोगों में जागरूकता सराहनीय है. गांव के लोगों ने प्यूरिफायर के साथ ही स्वच्छ रहने वाले के और भी तरीके अपनाए हैं. गांव के लोग खुद ही शौचालय बनाने के आगे आ रहे हैं. गांव की दीवारों पर स्वच्छता अभियान के स्लोगन भी लिखे दिख जाते हैं. गांव के लोग केंद्र सरकार के स्वच्छता अभियान से प्रेरित हैं.

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