दलित महिला रेप केस: राठ MLA मनीषा ने आरोपी को पकड़वाया, बाँदा MLA प्रकाश ने पुलिस से छुड़ाया

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बाँदा. दरोगा जी, में विधायक बाँदा बोल रहा हूँ. ये रेप के झूठे केस में आप जिसे पकड़कर थाने लाये हैं वो हमारा कार्यकर्ता है. फ़ौरन छोड़िये उसे. थानेदार – जी सर, दरअसल वो विधायक महोदया राठ का फोन आया था आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए. विधायक- ठीक है, आपका थाना बाँदा जिले में है. आप अभी उसे छोड़िये और ठीक से जाँच कर लीजिये फिर मुझे बताइयेगा कि  मामला क्या है. यह ताज़ा मामला है. घटना बाँदा जिले की है. यहाँ एक दलित महिला से रेप होता है और रेप के आरोपी सवर्ण विरादरी के युवक को गिरफ्तार कराने के लिए पीड़ित महिला को राठ विधायक मनीषा अनुरागी से गुहार लगानी पड़ती है. मनीषा के फोन पर पुलिस आरोपी को पकड़कर थाने लाती है तो बाँदा विधायक के फ़ोन पर आरोपी को छोड़ दिया जाता है. अब इसकी शिकायत BJP के बड़े नेताओं को दे दी गई है, लेकिन इस मामले में BJP के दो विधायकों का स्वाभिमान जरुर टकरा गया और इसके साथ ही बुंदेलखंड में ब्राह्मण व कोरी गठजोड़ भी सवालों में आ गया.

दरअसल, 12 मार्च को बिसंड़ा थानांतर्गत तेंदुरा गांव में इसी बिरादरी की एक महिला के साथ ब्राह्मण बिरादरी के युवक द्वारा तमंचे के बल पर दुष्कर्म किया था. इस मामले में नामजद अभियुक्त शिवराम मिश्रा को पुलिस ने दो बार गिरफ्तार किया और दोनों बार भाजपा के ही एक ब्राह्मण विधायक के दबाव में थाने से छोड़ दिया गया।

 

पीड़ित ने अमित शाह समेत मंत्री विधायकों से की शिकायत

 

कार्रवाई न होने से हताश पीड़ित परिवार ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के अलावा, प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री रमापति शास्त्री से लेकर सूबे में अपनी बिरादरी के सभी आठ विधायकों तक यह मामला भेज कर भाजपा के चुनावी एजेंडे ‘न गुंडाराज, न भ्रष्टाचार’ पर कई सवाल पूछे हैं। पीड़ित परिवार ने कहा कि बिसंड़ा पुलिस ने मु.अ.सं.-37/2017, धारा-376, 323, 504, 506 आईपीसी व एससी/एसटी एक्ट में नामजद आरोपी शिवराम मिश्रा को पहले 12 मार्च को गांव में गिरफ्तार कर छोड़ दिया था, फिर उसे 19 मार्च की शाम गांव में दर्जनों लोगों की मौजूदगी में नत्थू राजा की दुकान से मय असलहा गिरफ्तार कर रात भर थाने में रखने के बाद जेल भेजने के बजाय भाजपा के एक ब्राह्मण विधायक के दबाव में फिर उसे दूसरे दिन गांव छोड़ आई है।

अब सवाल यह है कि क्या ऐसे ही भाजपा ‘गुंडाराज’ का खात्मा करेगी? पुलिस के एक बड़े अधिकारी ने अपना नाम उजागर न करने की शर्त पर स्वीकार किया कि भाजपा के बांदा विधायक के दबाव में अभियुक्त को दो बार छोड़ा गया है। इस मामले में भाजपा के विधायक कुछ भी खुलकर नहीं बोल रहे हैं.

राठ की विधायक मनीषा अनुरागी कहतीं हैं, पीड़ित के साथ जिसने रेप किया था उसके खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही थी. उन्होंने पुलिस से गिरफ्तारी के लिए कहा था, जिस पर आरोपी पकड़ा गया था. बाद में आरोपी क पुलिस ने क्यों छोड़ा इसकी में जानकारी करूंगी. पीड़ित के साथ अन्याय नहीं होने दिया जायेगा. भाजपा के संकल्प पत्र के अनुसार वह पीड़ित परिवार की हर संभव मदद करेंगीं।

ललितपुर के महरौनी विधायक और योगी आदित्यनाथ सरकार में राज्यमंत्री बने मन्नू कोरी ने कहा, “मामला संज्ञान में आया है, भाजपा हर वर्ग की महिलाओं की सुरक्षा के प्रति कटिबद्ध है। वह मुख्यमंत्री तक मामला पहुंचा कर दोषी पुलिसजनों और अभियुक्त के खिलाफ कार्रवाई कराने का प्रयास करेंगे।

 

 

 कोरी-ब्राह्मण गठजोड़ से जीते 19 MLA में 5 कोरी जाति के

‘कोरी-ब्राह्मण’ गठजोड़ के चलते बुंदेलखंड में सभी 19 MLA चुनाव जीते हैं. इन विधायकों में 5 विधायक कोरी समाज के हैं. इतनी बड़ी संख्या में पहली बार विधायक जीते हैं. विधानसभा चुनाव में बुंदेलखंड के सभी सात जिलों की 19 सीटों पर विजय पताका फहराने वाली भाजपा के पांच विधायक कोरी बिरादरी से हैं, लेकिन बांदा जिले के बिसंड़ा थाने के एक गांव में इसी बिरादरी की महिला के साथ हुए दुष्कर्म की घटना से ‘कोरी-ब्राह्मण’ गठजोड़ गड़बड़ाने लगा है। बुंदेलखंड के सात जिलों -बांदा, चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर, जालौन, झांसी और ललितपुर- में विधानसभा की 19 सीटें हैं। इनमें बांदा की नरैनी, हमीरपुर की राठ, जालौन की उरई सदर, झांसी की मऊ-रानीपुर और ललितपुर की महरौनी सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं।

 

इन सीटों पर जीते हैं कोरी जाति के उम्मीदवार

इन आरक्षित सीटों पर भाजपा ने कोरी बिरादरी पर भरोसा जताया और वे जीते भी हैं। नरैनी से राजकरन कबीर, राठ से मनीषा अनुरागी, मऊ-रानीपुर से बिहारीलाल आर्य, उरई सदर से गौरीशंकर वर्मा और महरौनी से राज्यमंत्री मन्नू कोरी उर्फ मनोहरलाल पंथ विधायक चुने गए हैं।

खड़े होने लगे निति –नियत पर सवाल

दुष्कर्म के इस मामले से जहां बुंदेलखंड में ‘कोरी-ब्राह्मण’ के राजनीतिक गठजोड़ पर बट्टा लगने के आसार बन गए हैं, वहीं भाजपा विधायकों की ‘नीति’ और ‘नियत’ पर भी कई सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना यह होगा कि सूबे के मुख्यमंत्री पुलिस पर ऐसे दबाव बनाने वाले विधायकों की नाक में नकेल भी डालेंगे या फिर पूर्व की सत्तारूढ़ सरकारों की भांति इसकी अनदेखी करेंगे।

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