डायरिया के मरीजों में लगातार हो रही बढ़ोतरी, ऐसे करें बचाव

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@राम नरेश यादव

झांसी. बरसात के दिनों में भीषण गर्मी एवं उमस की वजह से डायरिया और हैजा बीमारियाँ फैलने की ज्यादा संभावना रहती हैं, क्योकि इस मौसम में मक्खियाँ, मच्छर व काकरोंचों की संख्या बढ़ जाती है जो खादय पदार्थो और जल को दूषित कर देते हैं।

यही खादय पदार्थ और जल शरीर के अंदर पहुँच कर डायरिया और हैजा के लक्षण पैदा कर देते है। डायरिया एक ऐसी ही पेट की बीमारी है जो गर्मियों और बरसात मौसम में यह समस्या और अधिक विकराल रूप ले लेती है, क्योकि इस मौसम में तापमान के लगातार घट– बढ़ जाने की वजह से वायरल डायरिया बढ्ने की ज्यादा संभावना हो जाती हैं, क्योकि इस मौसम में मक्खियां और मच्छर अधिकता में बढ़ जाते है, और इन्हीं से पैदा होने वाले वैक्टीरिया मनुष्यों के शरीर में पहुँच कर उल्टी और दस्त जैसे बीमारियों को जन्म देते हैं। वही जनपद में इस समय स्वास्थ्य केन्द्रो में भी इन बीमारियों के मरीजों की संख्या में वृद्धि हो रही हैं जो कि स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता का विषय है।

डॉक्टर डी०एस० गुप्ता, वरिष्ठ सलाहकार चिकित्सक ने बताया कि इस मौसम में दूषित खाना तथा दूषित पानी का इस्तेमाल करने से अमीबीय संक्रमण ज्यादा बढ़ जाता है, जिसके कारण सभी व्यक्तियों में डायरिया बीमारी उत्पन्न होने लगती हैं। उन्होने जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को डायरिया व हैजा से बचाव के उपाय के बारे में बताते हुये कहा कि लोग डायरिया व हैजा से बचने के लिए स्वच्छता का विशेष ध्यान रखे साथ ही खाने-पीने वाली वस्तुओं को हमेशा ढक कर रखे, क्योकि हैजा बीमारी मखखियों के द्वारा फैलती है, जब खाने-पीने कि चीजों पर मक्खियाँ बैठ जाती है और हम लोग वही भोजन ग्रहण करते है तो हैजा व डायरिया जैसी बीमारियाँ उत्पन्न होती है। उन्होने बताया कि इस मौसम में जिला अस्पताल में लगभग 30 फीसदी मरीज प्रतिदिन डायरिया के आ रहे हैं।

इसके अलावा उन्होने बताया कि हैजा रोग विब्रियो कॉलेरी नामक जीवाणु से फैलता हैं। यह जीवाणु संक्रमित व्यक्ति के मलमूत्र एवं कै (उल्टी) में विद्ध्मान रहता हैं। इस जीवाणु का विकास दूषितजल, दूध एवं सब्जियों, बासी भोजन तथा गंदी नालियों व अस्वच्छ वातावरण में अधिक होता हैं।

यह रोग स्त्री, पुरुष, बच्चे, गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली माता तथा सभी उम्र के व्यक्तियों में होता है। गर्भवती माता एवं बच्चे जिनकी प्रतिरक्षात्मक क्षमता कम होती, वह शीघ्र ही इस रोग के शिकार हो जाते हैं। वही अक्सर लोग शुरुआत में हैजा के लक्षणों को पहचान नहीं पाते है, जिसकी वजह से यह समस्या गंभीर हो जाती है, जिसमें रोगी को 3 से 6 घंटे में बार-बार उल्टियाँ व दस्त लगने लगते हैं। उन्होने बताया कि हैजा बीमारी में व्यक्ति को पेट में दर्द नहीं होता सीधे दस्त होने लगते लगभग 20-25 बार हैं। ऐसी स्थिति में रोगी को तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। अगर मरीज थोड़ा ढीला हो जाता है तो तुरंत इस बीमारी से व्यक्ति की मृत्यु तक हो जाती हैं।

इसके अलावा उन्होने बताया कि बच्चों में इस बीमारी की वजह से जल्दी ही पानी और खनिज लवण की कमी हो जाती है। वही 6 माह से ऊपर वाले बच्चों में यह संभावना और अधिक बढ़ जाती है। क्योकि इस आयु में बच्चे के दांत निकलते है और घुटनों के बल चलना या पाँव-पाँव चलना प्रारम्भ करते है। बच्चे गंदी उंगलिया मुंह में डालते है। गंदे खिलौने मुँह में डालते है। इन सब कारणों से बार-बार बच्चे डायरिया व हैजा के शिकार होते है। यदि समय पर उनका उचित उपचार न किया जाये तो मृत्यु तक हो सकती है।

उन्होने इन बीमारियो से बचाव के लिए बताया कि खुले में शौच न करे, शौच करने के बाद हाथ साबुन से अच्छी तरह से धोये, बासी भोजन न खाये, साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखे, छोटे बच्चो को ओ.आर.एस. का घोल दे। जिससे इन बीमारियों से बचा जा सके।

स्वास्थ्य विभाग के आकड़ों के अनुसार जनपद में जहां एक ओर जनवरी 2017 से मार्च 2018 तक हैजा बीमारी के एक भी मरीज नहीं पाये पाये गये है, वही जनवरी 2017 से 19 जून 2018 तक 56 हजार 618 डायरिया के मरीज पाये गये।

  • डायरिया के क्या है लक्षण- दिन भर में 4-5 बार पतले दस्त आना।
  • दस्त के साथ खून आना।
  • पेट मरोड़ना
  • उल्टी आना।
  • बुखार होना।
  • सिरदर्द , कमजोरी होना।
  • बच्चों को दस्त होने पर वह दूध पीना बंद कर देते है।
  • बच्चों में चिड़चिड़ापन आ जाता है। और वह सुस्त हो जाते है।

हैजा के क्या है लक्षण-  हैजा बीमारी में चावल के माड़ की तरह पतले दस्त लगते है, उल्टियाँ होती है, प्यास बहुत अधिक लगती है और पेशाब कम आता है, और शरीर की मांसपेशियों में धीरे-धीरे अकड़न सी होने लगती हैं।

डायरिया व हैजा से बचाव-

  • दूषित भोजन एवं दूषित पानी का सेवन करने से बचे।
  • ओआरएस का इस्तेमाल करे ।
  • बासी चीजे ना
  • बाहर की चीजे ना खाये। घर की ही बनी ताजी चीजे खाये।
  • खाने से पहले हाथों को साबुन से अवश्य साफ करें।
  • खाने को घर पर भी ढककर रखे, क्योकि मक्खियाँ मनुष्य के मल पर बैठ कर यह जीवाणु अपने साथ ले आती है और इन्हें खाने पर छोड़ देती है, जिससे हैजे के होने की समभावना अधिक हो जाती हैं।

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