आ रहा है 100 का नया नोट, ऐसा होगा रंग- रूप

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@बुंदेलखंड खबर 

भोपाल. नोटबंदी तो आप को याद ही होगी. किस तरह प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने अचानक से 1000 और 500 के नोट बंद कर नए नोट बाज़ार में उतार दिए थे. लेकिन 100 के नोट पुराने ही बाज़ार में चल रहे हैं. अब जो खबर

रिजर्व बैंक की ओर से सामने आ रही है उसके मुताबिक जल्द ही बाजार में 100 रु. का नया नोट जारी हो जायेगा. नए नोट का रंग बैंगनी होगा और इस पर वैश्विक धरोहर में शामिल गुजरात की ऐतिहासिक रानी की बाव (बावड़ी) की झलक देखने को मिलेगी। आकार में यह पुराने 100 के नोट से छोटा व 10 के नोट से थोड़ा बड़ा होगा।

आप इस खबर से परेशान नहीं होइए, क्योंकि नए नोट जारी होने के बाद भी पुराने नोट प्रचलन में बने रहेंगे। सौ के नए नोटों की छपाई बैंक नोट प्रेस देवास में शुरू हो चुकी है। नोट की नई डिजाइन को अंतिम रूप मैसूर की उसी प्रिंटिंग प्रेस में दिया गया, जहां 2000 के नोट छापे जाते हैं। इस बार एक बड़ा बदलाव यह भी किया गया है कि नए नोट की छपाई में स्वदेशी स्याही और कागज का ही उपयोग होगा।

मैसूर में जो शुरुआती प्रोटोटाइप (नमूने) छापे गए थे, उनमें विदेशी स्याही का उपयोग हुआ था। देवास में देशी स्याही के प्रयोग के चलते प्रोटोटाइप से हूबहू रंग मिलान करने में आई शुरुआती दिक्कत भी हल कर ली गई है। नए नोट आकार के साथ वजन में भी कम होंगे। जहां पुराने 100 के नोटों की एक गड्डी का वजन 108 ग्राम था, वही साइज छोटा होने से 100 की गड्डी का वजन 80 ग्राम के आसपास होगा। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मुहर के देवास बैंक नोट प्रेस में प्रोडक्शन भी शुरू हो चुका है। आरबीआई अगस्त या सितंबर में इन्हें जारी कर सकता है।

 

बैंकों को अपने एटीएम के केस ट्रेन में एक बार फिर बदलाव करने होंगे, ताकि 100 के नए नोट रखे जा सकें। 2014 में केंद्र में नई सरकार के आने के बाद यह चौथा मौका होगा, जब बैंकों को एटीएम में बदलाव करना पड़ा है। इसके पहले 2000, 500 और200 के नए नोटों के लिए बदलाव करने पड़े थे।

 नोट में होंगे नए सुरक्षा फीचर:

नए नोट में सामान्य सुरक्षा फीचर के साथ-साथ लगभग एक दर्जन नए सूक्ष्म सुरक्षा फीचर भी जोड़े गए हैं, इन्हें सिर्फ अल्ट्रावायलेट रोशनी में ही देखा जा सकेगा।

यूनेस्को की सूची में शामिल है रानी की बाव:

 गुजरात के पाटण स्थित रानी की बाव ( बावड़ी) को यूनेस्को ने 2014 में विश्व विरासत स्थल में शामिल किया था। इस बावड़ी को सन 1063 में गुजरात के शासक भीमदेव सोलंकी प्रथम की स्मृति में उनकी पत्नी रानी उदयमति ने बनवाया था। पिछली शताब्दी में पुरातत्व विभाग द्वारा इसे खोजें जाने के पहले लगभग 700 साल तक यह बावड़ी सरस्वती नदी की गाद में दबी रही। यूनेस्को ने इसे भारत की बावड़ियों में सभी बावड़ियों की रानी का खिताब भी दिया है।

सांची के स्तूप भी छप चुके हैं नोट पर-

-इसके पहले 200 के नोट पर मप्र का सांची, 500 के नोट पर दिल्ली का लाल किला, 50 के नए नोट के पीछे कर्नाटक का हंफी और 10 रुपए के नए नोट पर कोणार्क का सूर्य मंदिर छापा जा चुका है।

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