किसान चैरिटी शो : आर्थिक मदद पाकर छलक पड़े किसानों के आंसू

बाँदा : बाँदा में किसानों के चैरिटी शो का आयोजन हुआ। बुंदेलखंड में हुए इस चैरिटी शो को देश का पहला इस तरह का...

‘उम्मीद की रौशनी’ बना झाँसी का ये पुलिस वाला, जानिये क्यों हो रहा मशहूर

झाँसी : झाँसी में एक पुलिस वाला लोगों की उम्मीद की रौशनी बन चुका है. यह पुलिस वाला कैसे लोगों के लिए जी रहा...

बुन्देलखण्ड की यह आदिवासी बेटी अंग्रेजी सीखने जाएगी लंदन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी

भोपाल। बुन्देलखण्ड की यह आदिवासी बेटी अब अंग्रेजी में करेगी बात। अंग्रेजी भी ऐसी कि बड़े बड़ों को भी सामना करने में होगी मुश्किल।...

इसरो ने उपग्रहों के साथ रॉकेट प्रक्षेपित किया

चेन्नई: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बुधवार शाम छह बजे श्रीहरिकोटा रॉकेट प्रक्षेपण केंद्र से सिंगापुर के छह उपग्रहों के साथ पोलर सेटेलाइट लांच...

तालाबों के संरक्षण को शुरू भू विसर्जन की परम्परा

झांसी। देवी प्रतिमाओं के जल विसर्जन के कारण होने वाले पर्यावरण को नुकसान को दृष्टिगत रखते हुए कुछ लोगों ने नई परम्परा शुरू कर...

गाँधी जयंती: भारत के इन गांवों में गाँधी हैं भगवान, रोज होती है बापू...

नई दिल्ली. हिन्दुस्तान की आज़ादी में राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी का नाम हमेशा स्वर्णिम अक्षरों में रहेगा. आज गाँधी जयंती पर बापू को देश भर...

ऐसे हों हमारे नेता : 4 बार MLA, एक बार रहे मंत्री, सिर्फ 10...

ललितपुर : हमारा नेता कैसा हो, जैसे बहुचर्चित नारे का अगर आदर्श उत्तर पूछा जाए, तो जवाब डॉ. अरविन्द जैन का नाम बिना हिचक के...

फिल्म अभिनेता शहबाज खान बुन्देलखण्ड के ललितपुर में करेंगे फिल्मी प्रतिभा की खोज

ललितपुर। बुंदेलखंड के ललितपुर की प्राकृतिक खूबसूरती पर बालीबुड के कलाकार भी फिदा हो रहे हैं। आगामी तीस नवंबर को 'मर मिटेंगे प्यार मेंÓ...

भारतीय डॉक्टर ने अमेरिका के टीबी रोगियों के लिए ढूंढा नया इलाज, ऐसे किये...

bundelkhandkhabar.com/news/DEL-Indian-doctor-discover-TB-treatment-for-americans Meta tital : Indian doctor discover new treatment of TB for Americans नई दिल्ली। भारत से पढ़ाई करने वाली डाक्टर अस्वीन मारको अमेरिका में टीबी के मरीजों केलिए काम कर रही हैं। उन्होंने जीआईएस तकनीकी का विकास किया है, जो अमेरिका में बेघरलोगों में टीबी की बीमारी को ट्रैस करता है। साथ ही इस तकनीक से वे मरीजों का पूरा रिकार्डरखती हैं, जिससे टीबी के मरीजों को दवा व इलाज दी जा सके। उनके काम को न सिर्फअमेरिकी सरकार सराह रही है, बल्कि भारत में भी उनके काम की तारीफ हो रही है। अस्वीन ने हिमाचल प्रदेश से बीडीएस की डिग्री लेने के बाद कुछ समय तक दिल्ली में कामकिया। बाद में अमेरिका के बोस्टन यूनिवसर्सिटी से पब्लिक हेल्थ का कोर्स किया। बाद मेंउन्होंने अमेरिका के बेघर लोगों की भलाई के लिए स्वास्थ्य सेवाओं पर काम करना शुरू किया।इस दौरान बेघर लोगों में टीबी की बीमारी का पता चला। इस बीमारी से हर साल हजारों लोगोंकी मौत हो जाती है। यह तेजी से फैलने के कारण अमेरिका में भी टीबी के मरीजों की संख्या मेंइजाफा हो रहा है। ऐसे में उन्होंने टीबी को जड़ से समाप्त करने के लिए कुछ नए प्रयोग किए हैं,जो काफी कारगर है। - टीबी रोकने के नए प्रयोग डा. अश्वीन ने टीबी रोगियों के लिए कुछ अनोखे प्रयोग किए हैं। उन्होंने टीबी के दवा इलाज समयको कम कर दिया है। अभी तक पूरी दुनिया में टीबी के सबसे कारगर इलाज को डाट्स प्रणालीमाना जाता है। इसके तहत छह से नौ माह तक मरीज को दवा दी जाती है। इस प्रणाली में एकसबसे बड़ी खराबी है, अगर मरीज बीच में इलाज छोड़ देता है तो उसे टीबी के सबसे जटिलतमबीमारी से जूझना पड़ता है। उसे एमडीआर टीबी हो जाती है, जिसका इलाज न सिर्फ बहुत महंगाहै, बल्कि उसे दो साल से ज्यादा समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ सकता है। ऐसे मेंडा. अस्वीन ने नौ माह के कोर्स को छोटा करके तीन माह का कर दिया। इससे बेघर मरीजों काइलाज जल्दी होने लगा है। इसके अलावा जीनएक्सपर्ट टेक्नोलाॅजी का प्रयोग भी शुरू कियाहै, जो क्षय रोग का पता लगाने की कारगर प्रणाली है। डा. अस्वीन ने सबसे महत्वपूर्ण कार्य जियोग्राॅफिकल इंफारमेशन सिस्टम को तैयार कर कियाहै। इसके तहत बेघर मरीजों का पूरा ब्यौरा कंप्यूटर में रियल टाइम में एकत्रित किया जाता है।जिससे वह अमेरिका में कहीं भी हो तो उसे ट्रैस किया जा सके। पूर्व में अमेरिका में यह व्यवस्थानहीं होने के कारण इन बेघरों की पहचान बहुत मुश्किल होती थी, जिस कारण से अगर इलाजबीच में छूट जाता था तो वह उन्हें पुनः इलाज की सुविधा नहीं मिल पाता थी। और इन्हेंएमडीआर टीबी का इलाज कराना पड़ता था। अमेरिका में टीबी रोग की स्थिति अमेरिका में करीब 5 लाख टीबी के मरीज है, इनमें भी अधिकतर मरीज बेघर हैं, जो पूरे देश मेंघूमते रहते हैं। इलाज नहीं मिलने की दशा में बीस प्रतिशत से ज्यादा प्रतिवर्ष अकाल मौत केशिकार हो जाते हैं। यक्ष्मा, तपेदिक, क्षयरोग, एमटीबी या टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जोमाइक्रोबैक्टीरिया से होती है। क्षय रोग आम तौर पर फेफड़ों पर हमला करता है, लेकिन यहशरीर के अन्य भागों को भी प्रभावित कर सकता हैं। यह हवा के माध्यम से फैलता है। दुनियाकी आबादी का एक तिहाई तपेदिक से संक्रमित है। नये संक्रमण प्रति सेकंड एक व्यक्ति की दरसे बढ़ रहे हैं।

किसानों के लिए फूट गई मासूम मन्नत की गुल्लक

बांदा। बुंदेलखंड के बांदा में फसल तबाह होने के बाद ख़ुदकुशी करने वाले किसानो के परिजन जुटे तो उनकी मदद को कई हाथ आगे...