अब झांसी स्टेशन जैऔ सो चौंक जैऔ, बुन्देलखण्डी कलाकृतियों ने बनाया दर्शनीय

अब झांसी स्टेशन जैऔ सो चौंक जैऔ, बुन्देलखण्डी कलाकृतियों ने बनाया दर्शनीय

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@बुंदेलखंड खबर 

झांसी। अरे बा.. अब लगे कै हम बुन्देलखण्ड में या आ गए। जौ झांसी कौ टेसन (स्टेशन) तौ पूरौअई बदल गऔ। झांसी स्टेशन के भीतर दाखिल होते ही अब बुन्देलखण्ड से वास्ता रखने वालों का इसी तर्ज पर अंदाजे बयां दिखाई दे रहा है।

क्योंकि, झांसी रेलवे स्टेशन पर उतरते ही आप इतिहास और प्राचीन लोक-संस्कृति के अतीत में डूब जाएंगे। यहां की दीवारें आपको बुन्देलखण्डी शौर्य और लोक-जीवनशैली का जीवंत दर्शन कराएंगीं। बुन्देलखण्ड यूनिवर्सिटी के ललित कला संस्थान के छात्र-छात्राएं इस काम को साकार करने में जुट गईं हैं। यहां दीवारों पर उकेरी गईं बुन्देलखण्डी कलाकृतियां लोगों को आकर्षित करने लगी हैं।

झांसी बुन्देलखण्ड के सबसे ऐतिहासिक शहरों में से एक है। महारानी रानी लक्ष्मीबाई के शौर्य पराक्रम और बलिदान ने इस शहर को दुनियाभर में फेमस किया है। यहां बुन्देलखण्डी शैली लोगों को खासा आकर्षित करती है। इसी को लेकर झांसी रेलवे स्टेशन को बुन्देलखण्डी रूप देने के प्रयास शुरू हो गए हैं। यहां प्लेटफार्म एक पर स्टेशन डायरेक्टर कक्ष के सामने बुन्देलखण्डी कलाकृतियां उकेरी जा रहीं हैं। इनमें रानी लक्ष्मीबाई से जुड़ी यादों, चितेरी कला, कल्की अवतार, ओरछा और दतिया का किला समेत कई एतिहासिक स्थलों को रंगों के जरिए दीवार पर उतारा जा रहा है।

चितेरी कला में भगवान विष्णु की पूजा का दृश्य दर्शाया गया है। दतिया के भवानी सिंह कल्की अवतार को दीवार पर उतार रहे हैं। इस कार्य को बुन्देलखण्ड यूनिवर्सिटी के 40 छात्रों का दल समन्वयक डॉ. श्वेता पाण्डेय और शिक्षक दिलीप कुमार के मार्गदर्शन में साकार कर रहे हैं। स्टेशन डायरेक्टर कहते हैं। बुन्देलखण्डी लोक-जीवनशैली की कलाकृतियां स्टेशन को दर्शनीय बनाएंगीं। यह पहला चरण है। दूसरे चरण मुख्य द्वार से लेकर अन्य स्थानों पर भी इस तरह की पेंटिंग्स कराई जाएगी।

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