पहले घूंघट डाला, फिर अखाड़े में भिड़ गईं सैकड़ों बुन्देलखण्डी महिलाएं, हकीकत जानकर आप रह जाएंगे हैरान

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बुंदेलखंड के हमीरपुर में घूँघट वाली महिलाओं का दंगल - फोटो बुंदेलखंड खबर

पंकज मिश्रा/ शेलेन्द्र तिवारी @बुंदेलखंड खबर 

हमीरपुर। रक्षाबंधन के ठीक एक दिन बाद बुन्देलखण्ड का एक गांव चर्चाओं में आ गया। इस गांव में इलाके की महिलाएं शाम को इकठ्ठा हो गईं। वहां एक ऐसा आयोजन किया गया जिसमें महिलाओं को ही महिलाओं से भिडऩा था। वो भी पूरे गांव की महिलाओं के सामने। क्या सास और क्या बहू। क्या बहन और क्या बेटी। सभी महिलाएं एक दूसरे को पटखनी देने के लिए आतुर थे और ढोल बजते ही महिलाएं घूंघट की आड़ लेकर एक दूसरे पर टूट पड़ीं। बुंदेलखंड खबर की टीम ने इस कुश्ती की कुछ तस्वीरें ली हैं. यह दाव पेंच की ऐसी अनोखी प्रतिस्पर्धा थी जिसने सभी को रोमांचित कर दिया। लेकिन इस प्रथा के पीछे की कहानी जानकर आप हैरान हो जाएंगे। जानिए क्या है यह मामला।

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सैकड़ों साल पुरानी है प्रथा
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के एक गांव में सोमवार को शाम सैकड़ों साल पुरानी प्रथा को आगे बढ़ाते हुये महिलाओं का दंगल हुआ जिसमें कई घूंघट वाली नवयुवतियों ने अखाड़े में एक दूसरे को टंगड़ी मारते हुये पटक दिया जिसे देख हजारों महिलायें वाह-वाह कर उठी। यहां महिलाओं के दंगल में बुजुर्ग महिलायें भी अखाड़े में आयी और एक दूसरे को अखाड़े में पटककर दंगल में चार चांद लगा दिये।

घूँघट वाली महिलाओं की कुश्ती के दौरान गाँव में नहीं घुस पाए मर्द
घूँघट वाली महिलाओं की कुश्ती के दौरान गाँव में नहीं घुस पाए मर्द

अंग्रेजी फौज का मुकाबला करने महिलाओं ने शुरू किया था अखाड़ा

जिले के मुस्करा क्षेत्र के लोदीपुर निवादा गांव में को लोगों पर ब्रिटिश
हुकूमत के दौरान अंग्रेजी फौजों ने जुल्म ढाया था। उनके खिलाफ जब विद्रोह की आग भडक़ी तो महिलाओं ने भी पुरुषों को बताये बिना कुश्ती में दांवपेंच सीखे थे। इस गांव में सैकड़ों बरस पूर्व महिलाओं के दंगल की शुरूआत हुई थी। इस गांव में मालती देवी शुक्ला के घर के पास सोमवार को दंगल का आयोजन किया गया। जहां सैकड़ों साल पुरानी प्रथा को आगे बढ़ाते हुये महिलाओं ने दंगल में दांवपेंच दिखाये।

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कजली के बाद मंगल गीत गाकर की दंगल की शुरुआत
दंगल का शुभारंभ समाज सेविका मालती देवी शुक्ला ने किया। उसने बताया कि दंगल के आयोजन से पहले समूचे क्षेत्र में महिलाओं ने जवारे (कजली) निकालकर मंगल गीत गाया है फिर महिलायें गांव की परिक्रमा करती है। दंगल के अखाड़े में महिलायें मुगदर भांजते हुये अपनी कला का प्रदर्शन करने लगी। दंगल में घूंघट वाली महिलाओं में भी कुश्ती भी करायी गयी जिसे देखने के लिये आसपास के ग्रामों से बड़ी संख्या में महिलाओं की भीड़ जुटी।

हमीरपुर में घूँघट वाली महिलाओं की कुश्ती
हमीरपुर में घूँघट वाली महिलाओं की कुश्ती

महिलाओं ने ही किया सामूहिक कुश्ती का आयोजन, मर्दों के प्रवेश पर थी रोक
बता दें कि दंगल के आयोजन की तैयारियां गांव की महिलायें करती है। इसमें पुरुषों की कोई मदद नहीं ली गयी। दंगल में एक बुजुर्ग महिला ने ढोल बजाया। जबकि दंगल के चारों ओर लाठी डंडे से लैस महिलायें पुरुषों पर नजर भी रखे रहीं।

बुन्देलखंडी महिलाएं घूँघट डालकर अखाड़े में उतरीं
बुन्देलखंडी महिलाएं घूँघट डालकर अखाड़े में उतरीं

ग्राम पंचायत संचालन समिति की लक्ष्मी देवी, गुडिय़ा देवी व मालती शुक्ला ने बताया कि महिलाओं के दंगल में सिर्फ गांव और आसपास के इलाकों की महिलाओं की ही इन्ट्री करायी गयी है। महिलाओं की कुश्ती के दौरान कोई पुरुष न घुस आये इसके लिये महिलाओं की एक टुकड़ी अखाड़े के चारों ओर मुस्तैद की गयी थी। कुछ पुरुषों को महिलाओं के दंगल में घुसने का प्रयास भी किया जिसे लाठी डंडे से लैस महिलायें उसके लिये दीवाल भी बनी।

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अखाड़े में महिलाओं की अनोखी लड़ाई – सभी फोटो- bundelkhandkhabar.com

पंचायत संचालन समिति के सदस्य भी हुये बाहर
बताते हैं कि गांव के सरपंच को हटाने के बाद ग्राम पंचायत की तीन सदस्यीय संचालन समिति गठित है जिसमें लक्ष्मी, गुडिया और शैलेन्द्र सिंह सदस्य हैं। तीनों महिलाओं के दंगल में पहुंचे तो दोनों महिलाओं की तो एन्ट्री हो गयी मगर शैलेन्द्र सिंह को दंगल के अंदर जाने नहीं दिया गया। उन्हें दंगल से काफी दूर रहना पड़ा। पंचायत संचालन समिति की दोनों महिला सदस्यों की भी आपस में कुश्ती करायी गयी जिसे देख महिलायें वाह-वाह कर उठी। लड़कियों ने घूंघट वाली महिलाओं की कुश्ती देख खूब ताली बजायी।

दंगल में घूंघट वाली महिलायें पड़ीं भारी
बताते हैं कि दंगल में कैलसिया मुन्नी देवी के बीच कुश्ती हुयी जिस पर कैलसिया ने मुन्नी देवी को अखाड़े में पटक दिया। सियादुलारी व लीलावती के बीच रोमांचक कुश्ती करायी गयी जिसमें सियादुलारी ने उसे अखाड़े की धूल चटाकर दंगल अपने नाम किया। ग्राम पंचायत की संचालन समिति की सदस्या गुडिया व लक्ष्मी के बीच जबरदस्त कुश्ती हुयी जिसमें लक्ष्मी ने अखाड़े में उसे पटक दिया। तमाम बुजुर्ग महिलाओं के बीच भी कुश्ती हुयी जिसमें बुजुर्ग कई महिलायें अखाड़े में गिर पड़ी।

अंग्रेजों के समय से जारी है फीमेल दंगल
गांव के बुजुर्ग रिटायर्ड शिक्षक जगदीश चंद जोशी, रामकिशोर सिंह, रतन सिंह, करनसिंह, संतोष शुक्ला व बृजकिशोर ने बताया कि महिलाओं का दंगल अंग्रेजों के समय से चल रहा है। उन्होंने बताया कि अंग्रेज सैनिकों के अत्याचार का सामना करने के लिये उस जमाने में महिलाओं ने अखाड़े में दांवपेंच सीखे थे। तभी से परम्परा कायम है।

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