बुन्देलखंड: दमोह के प्रह्लाद पटेल को मंत्री पद, जालौन के भानु वर्मा खाली हाथ

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8+2 सीटों वाले बुन्देलखण्ड को इस बार प्रहलाद पटेल के रूप में एक राज्य मंत्री मिला है. वह मध्य प्रदेश के दमोह से सांसद हैं. लेकिन उत्तर प्रदेश के हिस्से से किसी को मंत्री नहीं बनाया गया. अभी यहां से उमा भारती केंद्र सरकार में मंत्री थीं. पांच बार के सांसद भानु वर्मा भी मंत्री नहीं बन पाए.

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#डॉ. राकेश द्विवेदी

उरई। बुंदेलखंड की जनता का दिल टूट गया । उम्मीद थी कि पिछली बार की तरह किसी एक को मंत्री बनाया जाएगा पर इस बार इस ओर देखा तक नहीं गया । ऐसा लगातार दूसरी बार है जब बुंदेलखंड के मतदाताओं ने चारों सीटें भाजपा को जिताकर दी । पिछली सरकार मेँ उमा भारती को मंत्री बनाया गया था । उनकी अनुपस्थिति मेँ भानुप्रताप के वरिष्ठता को देखकर मंत्री बनने संभावना थी जो उनके लिए स्वप्न बनकर ही रह गया ।

  • मोदी मंत्रिमंडल मेँ चारों सीटें देने वाले बुंदेखण्ड को नहीं मिली कोई जगह
  • 1952 से अब तक बुंदेलखंड से सिर्फ चार सांसद ही बन पाये केंद्र मेँ मंत्री
  • पाँच बार के सांसद भानु प्रताप के इस बार केंद्र मेँ मंत्री बनने की थी उम्मीद

1952 से अभी तक के राजनीतिक इतिहास मेँ बुंदेलखंड से ऐसे चार ही सांसद हैं जो केंद्र मेँ मंत्री बन सके । शुरूआत जवाहर लाल नेहरू की सरकार से हुई थी । गांधीवादी नेता सुशीला नैयर को मंत्री बनने का मौका मिला। वह झांसी से चार बार सांसद रहीं । झांसी मेँ मेडिकल कालेज स्थापना का श्रेय उन्हीं को जाता है । इसके बाद इंदिरा गांधी सरकार मेँ जालौन के सांसद चौधरी रामसेवक को स्वास्थ्य राज्य मंत्री बनाया गया था । जब वह मंत्री थे , वह दौर इमरजेंसी का था । 2009 मेँ कांग्रेस के प्रदीप जैन आदित्य को मनमोहन सरकार मेँ लंबे समय बाद मंत्री बनने का अवसर मिला । इसके बाद झांसी से सांसद चुनी गईं उमा भारती को 2014 मेँ मोदी सरकार मेँ कैबिनेट मंत्री के रूप मेँ शामिल किया गया । केंद्र मेँ अभी तक तीन सांसद झांसी के रहे जो मंत्री बने । जबकि जालौन के हिस्से मेँ यह उपलब्धि सिर्फ एक बार ही आई । बांदा और हमीरपुर के किसी भी सांसद को मंत्री नहीं बनाया गया ।


जालौन लोकसभा क्षेत्र से भानु प्रताप वर्मा पहले ऐसे सांसद हैं जो पाँच बार सांसद बने हैं । ऐसा पहले कोई और नहीं कर पाया । ऐसे मेँ ऐसी उम्मीद जताई जा रही थी कि भानु की वरिष्ठता को देखते हुए इस बार उन्हें मंत्रिमंडल मेँ जगह मिल सकती है , जो संभव नहीं हो सका । यदि वह मंत्री बनते तो चौधरी रामसेवक की बराबरी कर लेते । फिलहाल अब संभव नहीं लगता क्योकि भानुप्रताप की यह आखिरी पारी मानी जा रही है । सूत्रों के अनुसार भाजपा से जीते सांसदों की संख्या के आधार पर आर्थिक और राजनीतिक रूप से पीछे बुंदेलखंड की ओर से नजरें फेर ली गईं ।

झांसी और बांदा के सांसद पहली बार भाजपा से जीते और हमीरपुर के चंदेल दोबारा जीते है । ऐसे मेँ ईं लोगों का दावा पहले से ही कमजोर माना जा रहा था । सारी उम्मीदें भानु पर ही केन्द्रित थीं । सूत्रों के अनुसार यदि भानु प्रताप को मोदी मंत्रिमंडल मेँ स्थान नहीं मिला तो इसके पीछे उनकी जिम्मीदारियों के प्रति शिथिल रहना भी एक मुख्य कारण बन सकता है क्योंकि मोदी त्वरित कार्यों मेँ विश्वास रखते हैं ।

♦( लेखक जालौन जिले के वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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