डीएम के माध्यम से भेजी पीएम को चिठ्ठी, कहा पृथक बुन्देलखण्ड का वादा निभाओ साहब

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@बुन्देलखण्ड खबर
झांसी। बुन्देलखण्ड राज्य निर्माण को लेकर अब तमाम संगठन एक साथ आंदोलन की दहलीज पर दिखने लगे हैं। लोगों ने केन्द्र और राज्य सरकारों को राज्य निर्माण के वादे की याद दिलाते हुए उनके खिलाफ मोर्चा खोलने का ऐलान कर दिया है और इसी को लेकर बुधवार को पहली बार एक साथ सभी 13 जिलों में एक साथ पृथक राज्य निर्माण के समर्थन में आवाज बुलंद की गई। सभी जिला मुख्यालय के कलेक्टरों को ज्ञापन देकर सरकार को उसके द्वारा किए गए वादे की याद दिलाई गई।
झांसी में सौपे गये ज्ञापन में कहा गया कि बुन्देलखण्ड राज्य निर्माण का आन्दोलन लम्बे समय से किया जा रहा है, जिसका हर बुन्देली हृदय से समर्थन कर रहा है। मुद्दा भावनात्मक है, इसलिये राजनैतिक दल इसका उपयोग एवं दुरूपयोग अपने-अपने तरीके से करते आये हैं
कांग्रेस पार्टी ने अपने दो प्रान्तीय कार्यकर्ता अधिवेशनों में बुन्देलखण्ड राज्य निर्माण के पक्ष में प्रस्ताव पारित किये तथा वर्ष 2012 के उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में भी छोटे राज्यों के निर्माण का समर्थन किया था।
बहुजन समाज पार्टी की राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश विधान सभा से प्रदेश के बटवारे का प्रस्ताव पारित कराकर केन्द्र सरकार के पास भेजकर पार्टी की प्रतिबद्धता दर्शाई है।
बुन्देलखण्ड निर्माण मोर्चा के अध्यक्ष भानु सहाय ने कहा कि लोकसभा (2014) चुनाव में झाँसी-ललितपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद एवं केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री सुश्री उमा भारती जी ने पृथक बुन्देलखण्ड राज्य निर्माण के मुद्दे को जोर-शोर से उठाकर बुन्देलखण्ड की जनता से वादा किया था कि केन्द्र में एन0डी0ए0 की सरकार बनने के तीन साल के भीतर बुन्देलखण्ड राज्य वनवा दिया जायेगा। झाँसी में हुई आम सभा में वर्तमान गृहमंत्री राजनाथ सिंह एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी सुश्री उमा भारती जी के वादे का समर्थन करते हुये भरोसा दिलया था कि तीन वर्ष के भीतर राज्य निर्माण करा दिया जायेगा। इसी वायदे पर जनता ने बुन्देलखण्ड की सभी सीटों पर भाजपा के सांसदों को जिताया। केन्द्र सरकार के गठन के चार साल से अधिक का समय गुजर जाने के बाद भी राज्य निर्माण के पक्ष में कार्यवाही नहीं होते देख बुन्देलखण्ड वासी अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
अब लोगों में सरकार की वादाखिलाफी को लेकर गुस्सा है। लोगों का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने सात जनपदों झाँसी, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, बाँदा, चित्रकूट एवं महोबा, को मिलाकर बुन्देलखण्ड विकास निगम बनाया है। मध्य प्रदेश सरकार ने सागर,छतरपुर, टीकमगढ़, दमोह, पन्ना व दतिया को शामिल कर बुन्देलखण्ड विकास प्राधिकरण बनाया है। इन्हीं 13 जनपदों को बुन्देलखण्ड मानकर केन्द्र सरकार ने आर्थिक पैकेज दिया था। जब केन्द्र सरकार, उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश सरकारों ने बुन्देलखण्ड के उक्त भू-भाग को चिन्हित कर भौगोलिक मान्यता प्रदान कर दी है तो विधिक मान्यता दिये जाने में देरी क्यों की जा रही है। केन्द्र, उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है जो अपने आप को छोटे राज्यों का पक्षधर मानती हैं तो अब देरी क्यों की जा रही है।
ज्ञापन भेट करने वाले सहयोगी संगठन बुन्देलखण्ड मुक्ति मोर्चा अध्यक्ष डॉ बाबूलाल तिवारी, उत्तर प्रदेश व्यापार मण्डल अध्यक्ष संजय पटवारी, बुन्देलखण्ड किसान पंचायत अध्यक्ष गारी शंकर बिदुआ, बुन्देलखण्ड खण्ड दल अध्यक्ष सतेन्द्र पाल, बुन्देलखण्ड राज निर्माण सेना अध्यक्ष संजय शर्मा, वा0स0पा0 नेता सीता राम कुशवाहा, लोक जन शक्ति पार्टी जिला अध्यक्ष नरेश महाजन, अधिवक्ता संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष राजेन्द्र खरे, दिनेश भार्गव, अनिल पाठक, ग्यासी लाल, सत्येन्द्र पटेल, सत्येन्द्र राजपूत, चन्द्रभान आदिम, शुभम बड़ोनिया, प्रमुख रहे। इसके साथ बुन्देलखण्ड निर्माण मोर्चा की ओर से मोर्चा अध्यक्ष भानू सहाय, रघुराज शर्मा, हमीदा अंजूम, उत्करष साहू, कुंवर बहादुर आदिम, विजेत कपूर, सुन्दर गोवाला, हरवन्श लाल, नरेश वर्मा, निरमोही , प्रदीप झॉ विकास पुरी, बन्टी दूबे, बृजेश राय, छोटे राजा, सी0डी0 लिटौरिया, विकास पुरी, आदि कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा।

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