सेफ एबाॅर्शन पर बुंदेलखंड स्तरीय कार्यशाला , गर्भपात से 8 फीसदी महिलाओं की असमय मौत

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झांसी। समाज में जागरूकता की कमी, प्रशिक्षण व जानकारी के अभाव के कारण गर्भधारण के दौरान महिला का सही तरीके से गर्भपात नहीं हो पाता है, जिससे अधिक रक्तस्राव और इंफेक्शन आदि के कारण से महिला की मौत हो जाती है। भारत सरकार और आईपास संस्था द्वारा सुरक्षित गर्भपात की विस्तारपूर्वक जानकारी देने के लिए 7 मार्च को एनजीओ के प्रतिनिधियों एवं वरिष्ठ स्टाॅफ को एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया।
मंगलवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के सभागार में बुंदेलखंड स्तर के गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों एवं वरिष्ठ स्टाॅफ को सुरक्षित गर्भपात के तरीके आईपास से स्टेट प्रोग्राम मैनेजर उपेंद्र सिंह ने बताया। उन्होंने गर्भपात के कानून की विस्तार से जानकारी दी। साथ ही सुरक्षित गर्भपात करने के तरीकों एवं उपकरणों आदि के बारे में बताया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. विनोद यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि देश में असुरक्षित गर्भपात के कारण प्रतिवर्ष आठ प्रतिशत महिलाओं की असमय मौत हो जाती है। हमारे यहां विभिन्न प्रकार के कानून वैद्यानिक गर्भपात की इजाजत देते हैं, लेकिन कम जागरूकता के कारण गर्भपात को लेकर समाज में काफी भ्रम व्याप्त है। आईपास के सहयोग से सुमित्रा सामाजिक कल्याण संस्थान एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा बुंदेलखंड स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सुमित्रा संस्था की निदेशक मीरा शर्मा, प्रोग्राम कार्डिनेटर अमृता गुप्ता, प्रोजेक्ट एसोसिएट शिल्पी, ललितपुर से साईं ज्योति संस्था, महोबा से आशा ग्रामोद्योग संस्थान, हमीरपुर से प्रयास, झांसी से प्रगति पथ संस्था के प्रतिनिधि आदि उपस्थित रही। संस्थान के संस्थापक के के चतुर्वेदी ने सभी के प्रति आभार प्रकट किया।

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