बुंदेलखंड में है अक्ति कौ विशेष महत्व, जानलो का है ई कौ...

बुंदेलखंड में है अक्ति कौ विशेष महत्व, जानलो का है ई कौ पूरौ इतिहास

हिन्दू कलेंडर के बैशाख महिना के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि खों अक्षय तृतीया के रूप में एक त्यौहार मनाओ जाऊत हेगो। ई कौ बुंदेलखंडी नाम है अक्ती। अक्ती मतलब अक्षय तृतीया। अक्षय तृतीया और भैया हरो आप सबन खों हम बता देवें कै हमाये बुंदेलखंड की बात तो बिल्कुल अलग है। भैया हरो आप खों पतो है की ई दिना हमाये बुंदेलखंड के गाँवन में मोड़ी- मोड़ा, पुतरा- पुतरिया (गुड्डा- गुडिय़ा) को ब्याव सोई करत हैं। रात कैसे निकर जात पतों नई चलत। ऐसें जा परंपरा खों आगे निभाऊत हैं।

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वर्षा रायकवार
हिन्दू कलेंडर के बैशाख महिना के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि खों अक्षय तृतीया के रूप में एक त्यौहार मनाओ जाऊत हेगो। ई कौ बुंदेलखंडी नाम है अक्ती। अक्ती मतलब अक्षय तृतीया।
अक्षय तृतीया और भैया हरो आप सबन खों हम बता देवें कै हमाये बुंदेलखंड की बात तो बिल्कुल अलग है। भैया हरो आप खों पतो है की ई दिना हमाये बुंदेलखंड के गाँवन में मोड़ी- मोड़ा, पुतरा- पुतरिया (गुड्डा- गुडिय़ा) को ब्याव सोई करत हैं। रात कैसे निकर जात पतों नई चलत। ऐसें जा परंपरा खों आगे निभाऊत हैं।

देखो भैया बुंदेलखंड के मोड़ी मोड़ा अक्ती (अक्षय त्रतीया) के एक हप्ता पैलें से इकी तैयारियन में लग जाऊत हैं। मौड़ी मौड़ा बजारे जाके माटी से बने पुतरा-पुरारिया पईसन से लेके आय। फिर पूरे बिधि- बिधान से उनको ब्याव करत है । इन सब आयोनजनन खों कराबे के लाने बड़े बूड़े अपनों पूरो सहयोग मोड़ी मोडऩ खों देत हैं।
ऐसो कत हैं बड़े बूड़े कै आज के दिना कोनऊ भी काम करो वो भौतई शुभ मानो जात है। केबे को मतलब है कि अपन जब कोनऊ शुभ काम करत हैं तो कलेंडर देखत या पंडित खों दिखात हैं । कै महूरत शुभ हेगो या नईया,अक्ती के दिना कोनऊ भी शुभ काम करबे के लाने पंचाग देखबे की जरूरत नईया। आज के दिना करे गए काम कई गुना फल प्राप्त होत है,ऐसो बड़े बूड़े कत हैं।

जौन तिथि को कबहु क्षय नई होत ऊखो अक्षय तृतीय कतई। अगर हम बेद पुराण की बात करे तो पुराणन में भी कई गई है कै,जो भोतई पुण्यदायी तिथि है,अगर ई दिना दान पुन्य करत है तो ऐसो कओ जात है की उको फल जो मिळत है वो अक्षय होत हेगो केबे को मतलब है की कई जन्मन तक इको फल मिलत रै।

जय हो भगवान बिष्णु की! बड़े बूड़े जा बात खों भी बताउत हैं की भागवान विष्णु के छटवें अवतार खों माने जाने वाले परशुराम को जन्म भओ हतो। परशुराम ने महर्षि जमदागिन और उनकी माता रेनुकादेवी के घर में जन्म लओ हतो,जोई कारन है कै अक्ती (अक्षय तृतीया) के दिना भागवान विष्णु की उपासना करी जात है। ई दिना परशुराम की पूजा को विधान भी है।
अक्षय तृतीया के दिनई खो पांडव पुत्र युधिष्ठर खों अक्षय पात्र की प्राप्ति भई हती। ई पात्र की खास बात जा हती कै जौ पात्र कभऊ खाबे पीबे से खाली न रैहै। और आपको आज हम ऐसी केऊ बाते बतात जा रय जिनखो आप जानत तो हते लेकिन भूल गये ते तो ऐसी एक और बात है। आज के जा शुभ दिना में महर्षि वेदव्यास जी ने महाभारत लिखबे की शुरुआत करी ती,और हमाये साथी तो जानत हेंगे की महाभारत खों पांचवें वेद के रूम में भी मानो गयो है।

और भी कछु ऐसियई मानताए हेगी जिनखों आज हम अपनी बुन्देली भाषा में आप सबन खो बताऊँ चात है।
जैसे मनो जात है कै आज के दिना गंगा माता स्वर्ग से धरती पै आई हती। राजा भागीरथ ने गंगा माता खो धरती पै अवतरित करबे के लाने हजारन साल तक तपस्या करी हती। जब जाके गंगा माता धरती पै अवतरित भई हती। सो ऐसो मानो जात है की आज कै दिना पवित्र गंगा नदी में सपरवे से सबरे पाप धुब जाऊत हैं।

देखो बात करें अगर पुतरा- पुतरियां कै व्याओ तक सिमित नई रत है। बिल्कुल साथियों आज अक्ती (अक्षय तृतीया ) और बाल विवाह (कच्ची उम्र में मोड़ा मोड़ी को ब्याओ)जैसे कुरीति खों अपराध की श्रेणी में रखवे के बाद भी कछु रुढि़वादी आदमी अक्ती के पवन पर्व पै भी ई अपराध खों करबे से नई डरात हैं। जबकि कच्ची उमर में व्याओ करवे कै दुष्परिणाम हमाये सबके सामने हैं।

आओ अब अपन सब मिलके अक्ती को बटिया सो गीत खो गुनगुना लेऊत है जौ ई प्रकार से है-

गाना—हिलमिल हो मोरी गुइंया,घर मेले आज लिवाऊआ
पैले लिवाऊआ ससुरा आय,सुख सासों के नईया!
हिलमिल हो मोरी गुइंया,घर मेले आज लिवाऊआ
दूजे लिवाऊआ जेठा आये,घर जिठ्नी के सुख नईया!
हिलमिल हो मोरी गुइंया,घर मेले आज लिवाऊआ!
साथियों आज की जा कहानी अक्ती (अक्षय तृतीया) खो लेके आपको सुनाई है!
आप सबखो कैसी लगी हमें जरुर बतावे! अक्ती के पवन पर्व पै आप सबखो खूब खूब बधाई होवे!
घर में रवे सुरक्षित रवे! इनई सब बातन कै संगे हम जात है-राम राम

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