मायावती की शर्तों ने कांग्रेस की नींद उड़ाई, गठबंधन का अभी एलान नहीं

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भोपाल। कांग्रेस और बसपा के गठबंधन को लेकर अभी असमंजस की स्तिथि बनी हुई है. कांग्रेस की मजबूरियों को देखते हुए मायावती भी अपनी पार्टी की पूरी कीमत गिनाने की मुद्रा में आ गईं हैं. अब जब कांग्रेस के नेता बार बार गठबंधन की बात कह रहे हैं तभी मायावती ने एलान किया है कि मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ उनकी पार्टी सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के साथ गठबंधन तभी होगा जब हमें सम्मानजनक सीटें मिलेंगी।

मायावती ने कहा कि बीते कुछ दिन से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के नेताओं द्वारा पार्टी से गठबंधन होने की बात प्रचारित की जा रही है। लेकिन अभी गठबंधन जैसी कोई बात नहीं हुई है। तीनों प्रदेशों में बसपा का अपना जनाधार है। फिलहाल बसपा तीनों प्रदेशों में सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है। लेकिन, अगर तीनों प्रदेशों में कांग्रेस की ओर से गठबंधन का प्रस्ताव आता है तो उसपर विचार किया जाएगा। गठबंधन तीनों प्रदेशों में होगा।

मानक अग्रवाल कह रहे हैं गठबंधन की बात 

16 जुलाई को मध्य प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी मानक अग्रवाल ने मीडिया से कहा था कि बसपा से गठबंधन हो गया है। सही समय पर इसकी घोषणा कर दी जाएगी। इससे पहले मायवती की कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सोनिया गांधी से मिलने की खबर भी आई थी। राहुल और सोनिया की मायावती से मुलाकात के बाद कांग्रेस की ओर से कहा गया था कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ भी मायावती से प्रदेश में गठबंधन पर बातचीत कर चुके हैं।

पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मायावती तीनों प्रदेशों में गठबंधन करना चाहती हैं। मध्य प्रदेश औऱ छत्तीसगढ़ में गठबंधन की बातचीत आखिरी दौर में पहुंच चुकी है। लेकिन. राजस्थान के कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट प्रदेश में अकेले चुनाव लड़ना चाहते हैं। सचिन बसपा से गठबंधन के पक्ष में नहीं हैं।

दो दशक से साल से बरकरार है बसपा का वोट बैंक

पिछले 20 सालों से मध्य प्रदेश में बसपा का वोट शेयर करीब सात प्रतिशत के करीब बना हुआ है। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का वोट शेयर 37 प्रतिशत, बसपा का सात प्रतिशत और भाजपा का 45 प्रतिशत था। ऐसे में अगर बसपा व कांग्रेस के वोट शेयर को जोड़ लिया जाए तो यह गठबंधन भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है।

साल 2013 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने चार सीटें जीती थीं। 62 विधानसभा सीटें ऐसी थीं जहां बीएसपी को 10 हजार और 17 सीटों पर 30 हजार वोट मिले थे।

लोकनीति-सीएसडीएस के एक सर्वे में कहा गया कि मध्य प्रदेश में एंटी इनकंबेंसी का असर राजस्थान से ज्यादा है। मध्य प्रदेश में गठबंधन की तरह बसपा के राजस्थान और छत्तीसगढ़ में गठबंधन बनाए जाने की बात हो रही है। दोनों प्रदेशों में बसपा का वोट शेयर लगभग इतना ही है। सूत्रों का कहना है कि मध्यप्रदेश में बसपा 30 सीटें मांग रही है।

मध्य प्रदेश में यहां है प्रभाव

मध्य प्रदेश में बसपा का विंध्य, बुंदेलखंड औऱ ग्वालियर-चंबल संभाग में प्रभाव है। साल 2013 में हुए चुनाव में बसपा ने यहां से 4 सीटें जीती थी। राज्य की 230 विधानसभा सीटों में भाजपा ने 165, कांग्रेस ने 58 सीटें जीती थीं।

बसपा का अपना स्थाई वोट बैंक है। बसपा के प्रदेश प्रभारी रामअचल राजधर का कहना है कि पार्टी में सभी निर्णय मायावती लेती हैं। विधानसभा चुनाव में पार्टी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी ये निर्णय उन्हीं को लेना है।

 

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