शारीरिक-मानसिक विकास में स्तनपान की होती है अहम भूमिका

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झांसी. यहांWPDA 1 मुख्य चिकित्सा अधिकारी सभागार में विश्व स्तनपान सप्ताह के उपलक्ष्य में मुख्य चिकित्सा अधिकारी की अध्यक्षता में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य कर रहे स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को स्तनपान के लिए लोगों में कैसे जागरूकता फैलाई जाए, इसके संबंध में बताया गया। इस कार्यशाला में शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के सभी स्वास्थ्य अधिकारी व प्रतिनिधि मौजूद थे। कार्यशाला का संचालन कर रहे नोडल अधिकारी डॉ॰ एनके जैन ने बताया कि स्तनपान सिर्फ शिशु स्वास्थ्य के लिए नहीं बल्कि माँ के स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी हैं। उन्होने बताया कि शिशु के लिए माँ का दूध सर्वोत्तम आहार के साथ ही उसका मौलिक अधिकार भी है। माँ का दूध जहाँ शिशु को शारीरिक व मानसिक विकास प्रदान करता है वहीं उसे डायरिया, निमोनिया और कुपोषण जैसी जानलेवा बीमारियों से बचाता भी है।

यह साक्ष्य आधारित है कि जन्म के एक घंटे के भीतर नवजात को स्तनपान शुरू कराने से 20 फीसद शिशु मृत्यु दर में कमी लायी जा सकती है। छह माह तक शिशु को केवल स्तनपान कराने से दस्त और निमोनिया के खतरे में क्रमशः 11 फीसद और 15 फीसद कमी लायी जा सकती है। लैंसेट की 2015 की रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि अधिक समय तक स्तनपान करने वाले बच्चों की बुद्धि उन बच्चों की अपेक्षा तीन पॉइंट अधिक होती है, जिन्हें माँ का दूध थोड़े समय के लिए मिलता है। इसके अलावा स्तनपान स्तन कैंसर से होने वाली मौत को भी कम करता है।

शिशु व बाल मृत्यु दर में कमी लाने के लिए इन बातों का रखें ख्याल- 1. जन्म के एक घंटे के भीतर नवजात को स्तनपान शुरू कराया जाए। 2. शिशु को छह माह तक केवल स्तनपान कराया जाए। 3. शिशु के छह माह पूरे होने पर ही संपूरक आहार देना शुरू करें और शिशु के दो साल पूरे होने तक स्तनपान जारी रखा जाए।

क्या कहते हैं आंकड़े : नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे-4 के अनुसार प्रदेश में एक घंटे के अन्दर स्तनपान की दर अभी मात्र 25.2 प्रतिशत है जो की काफी कम है। छह माह तक केवल स्तनपान की दर 41.6 फीसद है जो कि अन्य प्रदेशों की तुलना में काफी कम है। झाँसी की बात करें तो यहाँ एक घंटे के अन्दर स्तनपान की दर अभी मात्र 35.1 प्रतिशत ही है जबकि छह माह तक केवल स्तनपान की दर 52.4 फीसद है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुशील प्रकाश का कहना है कि स्तनपान कराने वाली धात्री माँ को प्रत्येक स्तर पर पूर्ण सहयोग प्रदान करके ही हम स्वस्थ शिशु की कल्पना कर सकते हैं। इसके लिए जरुरी है कि परिवार, समुदाय और कार्य स्थल सभी स्थानों पर माँ को पूर्ण सहयोग दिया जाए तथा उसे छह माह तक केवल स्तनपान कराने हेतु प्रेरित किया जाए। इसके साथ ही आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी घर-परिवार में जाकर धात्री माँ और शिशु को स्तनपान कराने में मदद करें। आंगनबाड़ी केंद्र पर या ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस पर प्रसव पूर्व और प्रसवोत्तर सत्र के दौरान भी माताओं को स्तनपान के महत्त्व की जानकारी दे सकती हैं। विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान स्तनपान को हर स्तर पर बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा।

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